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धनप्रसाद की शव यात्रा रोक रहे लोगों से पुलिस की झड़प, मुक्तिधाम में जाने से रोकने पर भिड़े भाजपा विधायक

Sanjay Sharma

Publish: Jan 24, 2020 23:58 PM | Updated: Jan 24, 2020 22:44 PM

Sagar

अहिरवार महापंचायत अध्यक्ष और सरकार के विरोध में जमकर हुई नारेबाजी, भारी पुलिस बल और अधिकारियों की मौजूदगी में हंगामे के बीच हुई अंत्येष्टि

सागर. जिंदा जलाए गए धनप्रसाद के अंतिम संस्कार के दौरान शुक्रवार को नरयावली नाका मुक्तिधाम में भारी तनाव बना रहा। आक्रोशित भीड़ द्वारा मोतीनगर चौराहे पर अर्थी रोकने की कोशिश के बाद पुलिस ने मोर्चा संभाला। सरकार विरोधी नारेबाजी धक्का-मुक्की को देख पुलिस को सख्ती बरतते हुए मुक्तिधाम के गेट बंद करने पड़े। मुक्तिधाम में दाखिल होने के दौरान भाजपा विधायकों की पुलिस से तीखी बहस और झूमाझटकी भी हुई। इस दौरान भाजपा- कांग्रेस कार्यकर्ता आमने-सामने जबकि अहिरवार समाज दो फाड़ नजर आया। तनाव और तकरार को देखते हुए भारीपुलिस बल की मौजूदगी में धनप्रसाद के शव को मुखाग्नि दी गई।

दिल्ली में उपचार के दौरान मौत के बाद शुक्रवार सुबह 8.20 बजे धनप्रसाद अहिरवार का शव धर्मश्री में उसके घर पहुंचा। शव पहुंचने के कुछ देर बाद वहां समाज के लोगों की भीड़ जमा हो गई। भीड़ के कारण तनाव की स्थिति देख अधिकारियों के इशारे पर अंतिम यात्रा शुरू कर दी गई। शव यात्रा में भारी पुलिस बल के साथ दो दर्जन से ज्यादा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी, वज्र और सीसीटीवी कैमरों से लैस वाहन तैनात रहे। धनप्रसाद के शव को जल्दबाजी में मुक्तिधाम ले जाने को लेकर अहिरवार समाज के दो धड़े मोतीनगर चौराहे पर आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों में बहस के बाद कुछ लोगों ने अर्थी को चौराहे पर रखने की कोशिश की लेकिन नारेबाजी शुरू होते ही पहले से सतर्क पुलिस ने अर्थी को घेर लिया। 40 से ज्यादा लाठीधारी पुलिसकर्मियों ने अपनी सुरक्षा में अर्थी और उसे थामकर चले रहे शामिल परिवार के सदस्यों के मुक्तिधाम में दाखिल कराया।

शव यात्रा में जमकर हुई नारेबाजी -

धनप्रसाद की अर्थी को पुलिस द्वारा मुक्तिधाम पहुंचाने पर भाजपा विधायक प्रदीप लारिया और शैलेन्द्र जैन के साथ मौजूद कार्यकर्ता और अहिरवार समाज का दूसरा धड़ा भड़क गया। शव यात्रा के पीछे चल रही भीड़ सरकार और प्रशासन विरोधी नारेबाजी करते हुए मुक्तिधाम के गेट पर पहुंची तो उसे नियंत्रित करने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। लेकिन भीड़ धक्का-मुक्की करते आगे बढ़ गई।

पुलिस से हुई विधायकों की झड़प :-

मुक्तिधाम की ओर आक्रोशित भीड़ को बढ़ते देख गेट पर तैनात कुछ पुलिसकर्मियों ने लाठियां लगाकर रोका लेकिन जब भीड़ संभलती नहीं दिखी तो गेट लगा दिए। हांलाकि भीड उन्हें भी धकेलकर अंदर दाखिल हो गई। भीड़ को रोकते समय पुलिसकर्मियों और भाजपा विधायक प्रदीप लारिया और शैलेन्द्र जैन के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई जिसके चलते वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस बहस के बाद विधायकों ने अंदर मौजूद अधिकारियों को भी खरीखोटी सुनाईं।

ये पहुंचे मुक्तिधाम -

धनप्रसाद के अंतिम संस्कार में भाजपा के नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, सागर विधायक शैलेन्द्र जैन, पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी, कांग्रेस जिला कोषाध्यक्ष जितेन्द्र ङ्क्षसह चावला, कांग्रेस जिला शहर अध्यक्ष रेखा चौधरी, सेवादल अध्यक्ष ङ्क्षसटू कटारे, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रभुदयाल पटेल, पार्षद चेतराम अहिरवार, वृंदावन अहिरवार, नीरज जैन गोलू, युवा मोर्चा अध्यक्ष अर्पित पांडे, अहिरवार महापंचायत अध्यक्ष अनिल अहिरवार शामिल हुए।

सरकार पर लगाए आरोप, 25 लाख की मदद की मांग -

मुक्तिधाम के बाहर रोकने की कोशिश को भाजपा विधायक शैलेन्द्र जैन ने सरकार और प्रशासन का दलित विरोधी कृत्य बताया है। जैन का कहना था कि सागर के इतिहास की यह पहली घटना है जब किसी अंतिम संस्कार में जाने से लोगों को रोकने मुक्तिधाम के गेट बंद कर लोगों के साथ धक्का-मुक्की और लाठी मारी गई हो। उन्होंने धर्मश्री में अनाधिकृत लोगों को बाहर करने व धनप्रसाद के घर के पास छत पर अनाधिकृत रूप से शेड लगाकर धर्मस्थल के रूप में उपयोग करने पर भी आपत्ति की है। विधायक प्रदीप लारिया ने धनप्रसाद की मौत के लिए सरकार की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा सरकार समय पर धनप्रसाद का इलाज कराती तो आज वे जीवित होते। धनप्रसाद के घर की माली हालत ठीक नहीं है इसलिए परिवार को 25 लाख रुपए की आर्थिक मदद और एक सदस्य को नौकरी की मांग सरकार से की है।

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