स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

ये कैसा जिला मुख्यालय जानिये कैसे माहौल में रह रहे लोग

Shashikant Dhimole

Publish: Sep 19, 2019 09:00 AM | Updated: Sep 18, 2019 21:43 PM

Sagar

निचली बस्तियों में कीचड़ में रहने की मजबूरी न कोई सुनने और देखने वाला

ग्रॉऊड रिपार्ट
- बि_लल नगर, ग्राम भैंसा, संत रविदास वार्ड के हालात बेहद खराब, बरसात में घरों में कैद हो जाते है लोग

सागर. भारी वर्षा से जहां ग्रामीण अंचलों के हालात बेहद दयनीय हैं वहीं जिला मुख्यालय के निचली बस्तियों में लोग कीचड़ और पानी से सराबोर सड़कों के बीच रहने को मजबूर हैं। शहर के संत रविदास वार्ड, तुलसी नगर, बि_ल नगर और संत कंवराम वार्ड के एेसे ही हालात हैं। लोग अपने घर को छोड़कर किराए के मकानों में पलायन कर गए हैं। कहने को तो नगर निगम ने सफाई अभियान के साथ वार्डो की सफाई व्यवस्था के लिए कर्मचारियों की तैनाती की है लेकिन उक्त वार्डों की स्थितियां बयां कर रही है कि निगम अपने दायित्व के पालन में कमजोर साबित हो रहा है। लोगों की शिकायत है कि पार्षद और अधिकारियों से कहने पर भी कोई हल नहीं निकल पा रहा।

जहन्नुम जैसे हालात

भगवानगंज स्थित डॉ. अंबेडकर की मूर्ती के पीछे वाले रास्ते की शुरुआत में तो सबकुछ ठीक है लेकिन जैसे ही नाले की पुलिया के पास पहुंचते हैं तो हालात दिखाई देने लगते हैं। यह इलाका नगर निगम के वार्ड और ग्राम पंचायत भैंसा का सीमावर्ती है। पंचायत और निगम की उदासीनता की वजह से रहवासियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पर रहीं। यहां के नागरिक राकेश पटैल का कहना था कि न रोड है न बिजली काई सुनने वाला नहीं है। वृद्ध नूूर बेगम अपने पांव के छाले दिखाते कहती हैं कि दिन में टहलना दूभर हो गया है, बच्चों को खेलने के लिए कोई स्थान नहीं है। पार्षद सिर्फ चुनाव के समय आते हैं। जिन्नत बी और युसुफ का कहना था कि हम तो जहन्नुम (नर्क ) जैसे माहौल में रहने को मजबूर हैं। पास में ही मस्जिद है लेकिन बरसात में नमाज के वक्त भी बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

अपना घर छोड़ किराए के मकान में रहने की मजबूरी

संत कंवराम वार्ड के हालात तो और भी बदतर हैं, यहां पहुंचने में भी सड़कों में भरे पानी और कीचड़ में से होकर गुजरना पड़ता है। पानी भरने की वजह से अपना घर छोड़कर किराए के मकान में रह रहीं बबीता लखवानी ने तो एेसे हालातों से तंग आकर आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए तक कह डाला। बबीता का कहना था कि साफ-सफाई न होने से घर में पानी भर जाता है, इस वजह से घर छोडऩा पड़ा। इसी तरह से अपना मकान छोड़क कर किराए के मकान में रह रही मनीषा सुखवानी बताती हैं कि रोड पर पानी और कीचड़ हमेशा भरा रहता है। मच्छरों का प्रकोप हो रहा है, बच्चे बीमार हो रहे हैं, स्कूल भी नहीं जा पा रहे, कोई सुनवाई नहीं हो रही। मंदिर का पुजारी भी महज औपचारिकता करके चला जाता है। कंचन सुखवानी का कहना था कि यहां बड़ा नाला था जिस पर अतिक्रमण कर बाऊंड्रीवाल बना दी गई, इस वजह से पानी भर रहा है। बहरहाल भारी वारिश ने निचली बस्तियों में रहने वाले लोगो को मुसीबत में डाल रखा है और नगर निगम ने अब तक इन इलाकों की सुध नहीं ली है।