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8 एकड़ में सोयाबीन की फसल पर खर्च हुए 80 हजार रुपए, उपज मिली महज 11 क्ंिवटल

Satish Likhariya

Publish: Oct 22, 2019 09:01 AM | Updated: Oct 22, 2019 01:09 AM

Sagar

फायदा तो दूर किसानों की लागत निकलने लायक भी नहीं हो रहा पैदावार

सागर. आठ एकड़ में बोई गई सोयाबीन फसल की कटाई के बाद पामाखेड़ी के किसान बब्लू तिवारी को महज 11 क्ंिवटल उपज मिली है। जबकि इस पर वे करीब 80 हजार रुपए अब तक खर्च कर चुके हैं। वर्तमान में बाजार में चल रहे भाव पर यह सोयाबीन बेचने पर उन्हें मुश्किल से 30 से 35 हजार रुपए ही मिल पाएंगे। यानी की लागत की आधी रकम भी उन्हें नहीं मिल पाएगी।

अतिवृष्टि के कारण अफलन और फसल गलने से उत्पादन में गिरावट की यह स्थिति लगभग पूरे जिले की है। किसान बब्लू तिवारी ने बताया कि उन्होंने ५० एकड़ में सोयाबीन की बोनी की थी। इसमें से अभी 8 एकड़ की कटाई और थ्रेसिंग कराने की हिम्मत जुटा पाए थे। बाकी 42 एकड़ की फसल अभी भी खेत में ही है और उसकी थे्रशिंग या हार्वेस्टिंग के लिए सोचना पड़ रहा है। 8 एकड़ के खर्च का हिसाब लगाते हुए उन्होंने बताया कि बोनी से लेकर थे्रशिंग पर तकरीबन 80 हजार रुपए का खर्च आया है। वे यह भी जोड़ते हैं कि अगर अतिवृष्टि का कहर नहीं टूटता तो इतने रकबे में ही ८० क्ंिवटल से कम उपज नहीं मिलती और बेचने पर औसतन ढाई लाख रुपए हाथ में आते। यह स्थिति अकेले एक किसान की नहीं बल्कि जिले के अधिकांश क्षेत्रों में डेढ़ से दो क्विंटल प्रति एकड़ का ही औसत बना हुआ है।
आदित्य ने भी सुनाई पीड़ा

किसान बब्लू की तरह बाछलोन के किसान आदित्य सिंह ने भी पीड़ा सुनाई। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा 20 एकड़ में बोई गई सोयाबीन की फसल अफलन की शिकार हो गई थी। ऊपर से लगातार खेत में पानी भरा रहने से कई जगह सड़ भी गई है। कुछ फसल की थ्रेशर कराई तो प्रति एकड़ डेढ़-दो क्विंटल सोयाबीन ही निकल रहा है। अब इसकी कटाई कराने से डर लग रहा है। फिर भी रबी के लिए जोखिम उठाने की मजबूरी उनके सामने है ही।

एेसे समझें एक एकड़ में लागत का गणित

किसानों के अनुसार सोयाबीन की बोवनी के पहले खेत की तैयारी से लेकर उपज घर तक आने में एक एकड़ में 9 से लेकर 11 हजार रुपए तक का खर्चा आता है। इसमें खेत जुताई, बोवनी, बीज, खाद, बीज उपचार पाउडर, खरपतवार नाशक, कीटनाशक व अन्य दवाओं, कटाई, थ्रेशर आदि में होने वाले खर्चे शामिल हैं। इसके बाद किसान घर से मंडी लाने में जो व्यय करता है वह अलग से है।

किसान बोले कैसे होगी भरपाई
हार्वेस्टिंग के बाद बाकी फसल की तो कटाई कराने का भी मन नहीं कर रहा है। जितना खर्चा कटाई और थ्रेशर में हो रहा है वह लागत लायक भी उपज नहीं निकल रही है। अगले सीजन के लिए खेत तो साफ करनी ही पड़ेगा।

बब्लू तिवारी, किसान

दो दिन से थ्रेशर चल रही है, एकड़ का एवरेज निकालें तो दो क्विंटल के आसपास का ही है। हजारों रुपए लागत पहले ही लगा चुके हैं, अब अगली फसल की चिंता है। समझ नहीं आ रहा इस नुकसान की भरपाई कहां से होगी।
आदित्य सिंह, किसान