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सरकारी भवन खाली, निजी भवनों में संचालित हो रहे कई विभागों के ऑफिस, पढ़ें खबर

Anuj Hazari

Publish: Dec 09, 2019 09:00 AM | Updated: Dec 08, 2019 20:36 PM

Sagar

सरकार को हजारों रुपए देना होता है हर माह किराया

बीना. शहर में करीब आधा दर्जन से ज्यादा सरकारी ऑफिस निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं जिसके लिए शासन के लिए हजारों रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि शहर में ही कई सरकारी भवन खाली पड़े हैं, जिनमें यह ऑफिस संचालित किए जा सकते हैं, लेकिन विभाग के उच्चाधिकारियों की उदासीनता के कारण इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गौरतलब है कि शहर में कई विभागों के ऑफिस निजी भवनों में संचालित होने के कारण लोगों को इनकी जानकारी भी नहीं होती है जो बार-बार किराए के भवनों में बदले जाने के कारण लोग ऑफिस ढंूढऩे में ही परेशान हो जाते हैं। जबकि छोटी बजरिया में दो नंबर स्कूल के कई भवन खाली पड़े हैं, जिनमें जगह पर्याप्त न होने के कारण स्कूल शिफ्ट नहीं किया जा सका है। इस बिल्ंिडग में कई ऑफिस खोले जा सकते हैं। शहर में सेल टैक्स ऑफिस सहित आधा दर्जन से ज्यादा विभाग निजी भवन में चल रहे हैं।
किराए के भवन में संचालित हो रहा महिला बाल विकास विभाग
महिला बाल विकास विभाग की शहरी शाखा राजीव गांधी वार्ड में किराए के मकान में संचालित हो रही है। जिसका किराया शासन को देना पड़ रहा है। जबकि महिला बाल विकास विभाग की ग्रामीण शाखा सरकारी भवन में संचालित हो रहा हैं। शहरी ऑफिस के लिए जो जगह दी गई थी वहां जगह कम होने के कारण गोदाम बना दिया गया और किराए से मकान लेकर ऑफिस संचालित किया जा रहा है।
एलआइबी ऑफिस निजी भवन में संचालित
शहर की गोपनीय जानकारी शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए एलआइबी (लोकल इनवेस्टीगेशन ब्यूरो) का ऑफिस भी शहर में खोला गया है, लेकिन यह ऑफिस निजी भवन में संचालित हो रहा है। यदि किसी के लिए कोई जानकारी देनी भी हो तो उन्हें ऑफिस की जानकारी नहीं रहती है। जबकि पुलिस थाने के पीछे व पुराने क्वार्टर में यह ऑफिस संचालित किया जा सकता है।
आबकारी विभाग भी निजी भवन में संचालित
शराब के अवैध व्यापार से लेकर नकली शराब बेचने वालों पर कार्रवाई ठीक ढंग से हो इसके लिए शहर के गांधी वार्ड में आबकारी विभाग का ऑफिस खोला गया है, लेकिन वह ऑफिस भी किराए के भवन में है। शहर के 95 प्रतिशत लोगों को यह जानकारी नहीं है कि आबकारी विभाग का ऑफिस किस जगह पर है।

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