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हलाल मार्केट की दो दुकानों को लेकर छावनी परिसर में दिनभर नूराकुश्ती, नुकसान देख नीलामी रद्द

Sanjay Sharma

Publish: Jan 17, 2020 08:00 AM | Updated: Jan 16, 2020 22:28 PM

Sagar

छावनी प्रशासन ने अनुमानित किराया राशि तक बोली न पहुंचने पर प्रक्रिया टाली

सागर. छावनी के हलाल (मीट) मार्केट की दुकानों की नीलामी प्रक्रिया को गुरुवार को फिर रोक दिया गया। नीलामी प्रक्रिया के दौरान कुछ लोगों द्वारा अन्य प्रतिभागियों पर दबाव बनाने और अत्यंत कम बोली को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। इन दुकानों की नीलामी अब नए सिरे से की जाएगी। वहीं छावनी के सिविल लाइन चौराहा स्थित शॉपिंग मॉल की 10 दुकानों की नीलामी शुक्रवार को होगी। गुरुवार को छावनी कार्यालय परिसर में नीलामी को लेकर वर्षों से दुकानों पर काबिज रहने वाले पक्ष के लोगों में गहमा-गहमी बनी रही। वहीं छावनी कार्यालय में नीलामी प्रक्रिया को लेकर दबाव के पीछे भी कई तरह की चर्चाएं गरमाई हुई है। बताया जाता है कि जो व्यक्ति दबाव बना रहे हैं उनकी पत्नी आउट सोर्स एजेंसी के माध्यम से छावनी में कार्यरत हैं। वे पत्नी को नियमित कराना चाहते हैं और अलग-अलग वजहों से इसी तरह विरोध कर रहे हैं। कुछ दिन पूर्व इनके द्वारा सदर में धरना-प्रदर्शन कर आठ सूत्रीय मांगपत्र भी सौंपा था।

नीलामी से बाहर करने बनाया दबाव -

छावनी कार्यालय परिसर में बुधवार को हलाल मार्केट की दो दुकानों की खुली नीलामी की जानी थी। इसके लिए परिसर में ही बोली लगाने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन मीट मार्केट की दुकानों को कुरैशी समाज के अलावा अन्य किसी को देने पर कुछ लोगों द्वारा आपत्ति उठाई गई। फिरदौस कुरैशी का कहना था कि अब तक यहां केवल कुरैशी समाज के लोगों को ही दुकानें दी जाती रही हैं और अब छावनी प्रशासन इसे खुली नीलामी बोली के जरिए किसी भी वर्ग को देना चाहता है। सूत्रों के अनुसार इन दुकानों पर एकाधिकार बनाए रखने के चक्कर में नीलामी बोली में शामिल होने पहुंचे कुछ लोगों को दबाव बनाकर बाहर कर दिया और नीलामी बोली भी बहुत कम रखी गई।

किराया भी नियमित नहीं कराते जमा -

छावनी प्रशासन के अनुसार जिन दो दुकानों की नीलामी की जा रही है उनमें से एक पर मजीद कुरैशी पर 34 हजार रुपए से ज्यादा किराया राशि बकाया है। जबकि दूसरी दुकान मंगू मोहम्मद के नाम पर है जिसका बकाया किराया हाल ही में जमा करा दिया गया है। इससे पहले भी मीट मार्केट की चार दुकानों की नीलामी में कुछ लोग समूह बनाकर नीलामी बोली पहले ही तय कर लेते हैं। वे बाहरी लोगों को इसमें शामिल नहीं होने देते और दुकान मिलने के बाद उसका किराया भी समय पर जमा नहीं करते। इसके कारण छावनी प्रशासन को हर वर्ष काफी राजस्व छति हो रही थी।

बोर्ड में लाया जा चुका है प्रस्ताव -

इसी को देखते हुए विगत माह बोर्ड के समझ इस प्रस्ताव को रखा गया जिस पर चर्चा उपरांत मीट मार्केट की दुकानों की नीलामी खुली बोली के माध्यम से सभी के लिए खोली गई है। वहीं दुकानों की सभी वर्गों के लिए खुली नीलामी का विरोध कर रहे फिरदौस कुरैशी का कहना है कि मीट की दुकानों के पास अन्य दुकानें नहीं खोली जा सकतीं। पहले दुकानें केवल कुरैशी समाज के लोगों को ही नीलामी में दी जाती थी लेकिन अब नीलामी में किसी भी वर्ग को शामिल किया जा रहा है, हम इसी का विरोध कर रहे हैं।

इनका कहना है -

-मीट मार्केट की जिन दुकानों की नीलामी को लेकर विरोध जताया है उन्हें कुछ लोग दबाव बनाकर कम बोली पर ले लेते थे। अब तक इन दुकानों की नीलामी इसी तरह होती रही। और किराया भी जमा नहीं किया जाता है। राजस्व के नुकसान को देखते हुए दुकानों की खुली बोली से नीलामी की जाएगी। वर्ग विशेष को अलग से लाभ देने का प्रावधान नहीं है।
राजीव कुमार, सीइओ छावनी परिषद सागर

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