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मुक्केबाजी में देश को पहला रजत दिलाने वाले पंघाल सागर के महार रेजिमेंट में हैं नायब सूबेदार

Sanjay Sharma

Publish: Sep 23, 2019 08:10 AM | Updated: Sep 22, 2019 23:12 PM

Sagar

वर्ष 2017 में सागर में सैन्य प्रशिक्षण पूरा करके 22 महार बटालियन में हैं तैनात

सागर. विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारत को पहला रजत पदक दिलाने वाले अमित पंघाल का सागर से गहरा नाता है। वे महार रेजिमेंट में नायब सूबेदार के पद पर पदस्थ हैं। उन्होंने पहली बार विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया है और ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई हो गए हैं। इससे पहले पंघाल ने एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था।

रूस के एकातेरिनबर्ग शहर में शनिवार शाम 52 किलोग्राम वर्ग से मुक्केबाजी के मुकाबले में पंघाल भले ही स्वर्ण पदक से एक कदम पीछे रह गए लेकिन उन्होंने पहली बार देश के लिए रजत जीतकर इतिहास रच दिया। यह खबर लगते ही महार रेजिमेंट सेंटर में सेना के अधिकारी और जवानों में भी दिनभर उत्साह का माहौल रहा। महार रेजिमेंट के इस जवान ने अब तक मुक्केबाजी में कई पदक हासिल कर देश, रेजिमेंट और सागर का नाम रोशन किया है।

महार रेजिमेंट सेंटर में पूरा किया सैन्य प्रशिक्षण -

अमित पंघाल हरियाणा के रोहतक जिले के मायना गांव में 16 अक्टूबर 1995 में पैदा हुए और 13 अगस्त 2017 में महार रेजिमेंट में शामिल हुए। उन्होंने सागर स्थित महार रेजिमेंट सेंटर में 34 सप्ताह का कड़ा सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और इसके बाद वे नायब सूबेदार बने।

अब तक अर्जित किए कई विश्वस्तरीय सम्मान -

रेजिमेंट के नायब सूबेदार पंघाल ने 2017 में प्रशिक्षण के दौरान एशियाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। उन्होंने बल्र्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पांचवा स्थान, बुल्गारिया के स्टैंडजा में 2018 में स्वर्ण पदक, कॉमनवैल्थ गेम 2018 में रजत पदक और सितंबर 2018 में ही 18वें एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक अर्जित किया था।

रेजिमेंट में उत्साह, अब खेलों पर और देंगे जोर -

महार रेजिमेंट सेंटर के डिप्टी कमांडेंट कर्नल प्रदीप कुमार चौबे का कहना है कि उन्हें शनिवार को नायब सूबेदार पंघाल के देश के लिए रजत पदक अर्जित करने की खबर लगी थी। इसके बाद पूरे रेजिमेंट में न केवल अधिकारी और जवान बल्कि प्रशिक्षण में शामिल नवसैनिकों में भी उत्साह है। रेजिमेंट खेल विधाओं में अव्वल खिलाडिय़ों के प्रशिक्षण के लिए और भी व्यवस्थाएं जुटाएगी ताकि वे आगे बढ़कर देश और रेजिमेंट का नाम दुनिया में रोशन करें।