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जीएसटी की विसंगतियों में उलझे 18 हजार कारोबारी, बिना सुधार रिटर्न जमा न करने का बना रहे मन

Sanjay Sharma

Publish: Aug 20, 2019 08:00 AM | Updated: Aug 19, 2019 22:49 PM

Sagar

तारीख बढऩे के बाद भी कम नहीं हुई रिटर्न की पेचीदगी, परेशान व्यापारियों ने बनाया रिटर्न दाखिल न करने का मन

सागर. वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू हुए दो साल हो चुके हैं लेकिन इसके प्रावधान अब भी टैक्सपेयर्स व्यापारियों के जी का जंजाल बने हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 का सालाना रिटर्न (जीएसटीआर-9) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त है। इससे पहले इस अवधि को दो बार बढ़ाया जा चुका है। लेकिन विसंगतियों के कारण अब तक सागर जिले के करीब 4000 व्यापारी ही रिटर्न दाखिल कर पाए हैं। 31 अगस्त से पहले रिटर्न दाखिल न करने पर पैनाल्टी लगना तय है लेकिन रिटर्न की उलझनों में फंसे व्यापारी प्रावधानों में सुधार के बिना रिटर्न जमा नहीं करने का मन बना चुके हैं।

जीएसटी का वार्षिक रिटर्न दाखिल की आखिरी तारीख 31 अगस्त है। इस लिहाज से व्यापारियों को अपना रिटर्न दाखिल करने के लिए केवल 12 दिन ही शेष रह गए हैं। इससे पहले भी विसंगतियों पर व्यापारियों के विरोध के चलते दो बार जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि आगे बढ़ाई जा चुकी है। लेकिन अब तक जिले में पंजीकृत करीब 18 हजार में से केवल 4 हजार ने ही अपने रिटर्न दाखिल कराए हैं। यानि अब भी जिले में 14 हजार से ज्यादा व्यापारी रिटर्न भरने से बचे हुए हैं। जो व्यापारी सालाना रिटर्न फाइल नहीं कर पाएंगे उनका आईटीसी(इनपुट क्रेडिट टैक्स) खतरे में पड़ गया है। यह दिक्कत जीएसटी रिटर्न फॉर्म की खामी की वजह से सामने आ रही हैं। व्यापारियों को ट्रेंड न करना और बार-बार प्रावधानों के बदलाव भी इसकी बड़ी वजह हैं।

व्यापारी 2017-18 का जुटा रहे विवरण -

जीएसटी रिटर्न (आर-9) फॉर्म का विवरण जुटाने इनदिनों कारोबारी परेशान हैं क्योंकि फार्म में करीब 15 टेबल हैं जिनमें 2017-18 में दाखिल विवरण को फिर से दर्ज करना है। किसी भी विवरण में चूक होने पर वह व्यापारी के टैक्स क्रेडिट पर भारी पड़ सकती है या पैनाल्टी की वजह बन सकती है। दरअसल, व्यापारियों ने मासिक रिटर्न में माल खरीद, बेचने एवं टैक्स भरने की जो सूचनाएं भरी थीं, उससे अलग सूचना सालाना रिटर्न फॉर्म में मांगी गई। यही नहीं, दो करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारी को ऑडिट कराकर जीएसटीआर-9 का 9-सी फाइल करना है। इसके ऑडिट में भी व्यापारी व्यस्तता झेल रहे हैं। व्यापारियों ने जीएसटी काउंसिल को पत्र भेज कर सालाना रिटर्न को 31 मार्च 2020 तक स्थगित करने की मांग की है। कारोबारियों का कहना है कि जीएसटीआर-9 फॉर्म की खामियों को दूर कर सरलीकरण किया जाए।

ये प्रमुख खामियां -

- सालाना रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया कठिन, फॉर्म में कई खामियां

- दो करोड़ से अधिक टर्नओवर के कारोबारी को कराना पड़ रहा ऑडिट
- डाटा पोर्ट (ऑटो विवरण) की गलत एंट्री का नहीं होता संशोधन

- अपंजीकृत व पंजीकृत का रिवर्स विवरण देने में हो रही मशक्कत
- फॉर्म में डाटा एडिट करने व रिवीजन करने का प्रावधान नहीं

-जीएसटी आर-9 के पी-पार्ट में ऑडिट है जो काफी उलझा हुआ है।

सीए-व्यापारी सबका सिरदर्द -

1.

सालाना रिटर्न को अपलोड करने के बाद रिवाइज नहीं किया जा सकता। यानि एक बार जो जानकारी दर्ज कर दी वही अंतिम होगी। एडिशनल क्रेडिट लिमिट का उपयोग करने से भी व्यापारी को वंचित रखा जा रहा है।
स्वप्निल शुक्ला, चार्टर्ड अकांटेंट

2.

इनपुट टैक्स क्रेडिट कैरी फारवर्ड नहीं हो रहा। जानकारी इतनी मांगी है कि उसे इक_ा करना ही मुश्किल है। जीएसटी नियमित रूप से दाखिल हो इसके लिए रिटर्न के सरलीकरण की बेहद आवश्कता है।

सौरभ गुप्ता, चार्टर्ड अकांटेंट

3.

जीएसटी की विसंगतियां इतनी है कि व्यापारी पूरे साल उसी में उलझा रहता है। काउंसिल विसंगतियों को दूर करे तो व्यापारी अपने काम के साथ रिटर्न भरने को सिरदर्दी नहीं समझेंगे।

वीरेन्द्र पटेल, ऑटोमोबाइल कारोबारी