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आरटीआई में चाही जानकारी से बड़ा खुलासा, हितग्राहियों को भनक नहीं और कागज में बंट रहा था खाद्यान्न

Mrigendra Singh

Publish: Feb 14, 2020 12:29 PM | Updated: Feb 14, 2020 12:29 PM

Rewa

- राज्य सूचना आयोग की फटकार पर विभाग ने जानकारी उपलब्ध कराई -


रीवा। सूचना का अधिकार अधिनियम से जुड़े एक आवेदन में जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी कार्यालय की ओर से की गई लापरवाही पर राज्य सूचना आयोग ने संज्ञान लिया है। इस पर जिला आपूर्ति नियंत्रक राजेन्द्र सिंह ठाकुर को कारण बताओ नोटिस जारी की गई थी और तत्काल जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश था।

आयोग के निर्देश पर गुरुवार को जिला आपूर्ति नियंत्रक ने मांगी गई जानकारी उपलब्ध करा दी है। जिसमें चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। गंगेव जनपद पंचायत के सरईकला ग्राम पंचायत के हितग्राही लालमणि यादव के नाम पर ५० किलोग्राम खाद्यान्न की पात्रता पर्ची जारी होने का उल्लेख किया गया है। खिलाड़ी कोल नाम के व्यक्ति के बारे में कहा गया है कि पात्रता पर्ची जारी नहीं की गई है। विभाग द्वारा आयोग के हस्तक्षेप के बाद दी गई जानकारी पर आवेदक शिवानंद द्विवेदी ने कहा है कि इसमें कई नई विसंगतियां सामने आई हैं।

लालमणि यादव ने पहले ही कहा है कि उसे खाद्यान्न नहीं मिल रहा है, वहीं विभाग का कहना है कि 50 किलोग्राम खाद्यान्न दिया गया है। इसी तरह खिलाड़ी कोल को पात्रता पर्ची ही जारी नहीं होने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि हितग्राही यदि अनुसूचित जाति या फिर जनजाति वर्ग का है तो वह गरीबी रेखा सूची में नाम नहीं होने के बाद भी सस्ते खाद्यान्न की पात्रता रखता है। जबकि खिलाड़ी कोल आदिवासी है और गरीब भी है। ऐसी स्थिति में विभाग का यह कहना कि उसे पात्रता पर्ची जारी नहीं हुई है, इस पर सवाल खड़े होते हैं। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी शिकायतकर्ता की ओर से की गई है।


- जवाब में कहा 48 घंटे की जानकारी नहीं थी
राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के जवाब में जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक ने जवाब प्रस्तुत किया है। जिसमें कहा है कि आवेदक शिवानंद द्विवेदी ने मौखिक रूप से इसकी जानकारी नहीं दी थी कि आवेदन व्यक्ति की जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है। इस पर जवाब 48 घंटे के भीतर दिया जाना चाहिए। सामान्य आवेदन इसे माना गया था। जवाब में यह भी स्वीकार किया है कि जानकारी नहीं दे पाना किसी द्वेष या अन्य व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं जुड़ा था।

जवाब में अन्य कई बातों का उल्लेख करते हुए यह भी कहा गया है कि खाद्यान्न वितरण से जुड़ी जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है, इस वजह से जानकारी नहीं देने का कोई सवाल ही नहीं उत्पन्न होता है। बता दें कि आवेदक ने दो बिन्दुओं की जानकारी त्वरित उपलब्ध कराने का उल्लेख आवेदन में किया था लेकिन आवेदन को पढऩे की किसी ने जरूरत ही नहीं समझी। इस कारण इसकी शिकायत राज्य सूचना आयोग में हुई और तत्काल नोटिस जारी कर दी गई।

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