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सावन में शिवलिंग पर क्यों चढ़ाते हैं बेलपत्र, क्या है चढ़ाने का सही तरीका

Devendra Kashyap

Publish: Jul 14, 2019 14:50 PM | Updated: Jul 14, 2019 14:52 PM

Religion

Sawan 2019 : बेलपत्र और जल से भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि शिव की पूजा करते वक्त बेलपत्र का प्रयोग किया जाता है।

सावन महीने ( month of sawan ) में श्रद्धालु महादेव को प्रसन्न करने के लिए हर उपाय करते हैं ताकि भोलेनाथ प्रसन्न रहें। सावन में शिवलिंग पर गंगाजल के साथ-साथ बेलपत्र ( bel patra ) भी चढ़ाया जाता है। आज हम आपको बताएंगे कि सावन शिवलिंग पर बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है, साथ ही ये भी बताएंगे कि क्या है बेलपत्र तोड़ने का तरीका। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, बेलपत्र या विल्वपत्र भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है। मान्यता है कि बेलपत्र और जल से भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि शिव की पूजा ( Worship of Lord Shiva ) करते वक्त बेलपत्र का प्रयोग किया जाता है।

दरअसल, हमारे धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि धर्म के साथ-साथ प्रकृति की भी रक्षा करनी चाहिए। यही कारण है कि देवी-देवताओं को अर्पित किये जाने वाले फल-फूल तोड़ने के नियम भी बताए गए हैं।

 

 

बेलपत्र तोड़ने के नियम...

  1. चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों को बेलपत्र न तोड़ें। इसके अलावे सं‍क्रांति के समय और सोमवार को बेलपत्र न तोड़ें।
  2. शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के लिए इन तिथियों या वार से पहले तोड़ा गया पत्र ही चढ़ाना चाहिए।
  3. बेलपत्र तोड़ते वक्त टहनी नहीं तोड़ना चाहिए। टहनी से सिर्फ बेलपत्र ही चुन-चुनकर तोड़ना चाहिए।
  4. बेलपत्र तोड़ने से पहले और तोड़ने के बाद में वृक्ष को मन ही मन प्रणाम करें और कष्ट देने के लिए माफी मांगें

 

 

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के नियम

  1. शिवलिंग पर बेलपत्र हमेशा उल्टा चढ़ाना चाहिए।
  2. बेलपत्र में चक्र और वज्र नहीं होना चाहिए।
  3. बेलपत्र 3 से लेकर 11 दलों तक के होते हैं। बेलपत्र जितने अधिक दल के होंगें, उतने ही उत्तम रहेंगे।
  4. अगर बेलपत्र न हो तो बेल के वृक्ष के दर्शन मात्र से ही पाप नष्ट हो जाते हैं।
  5. ध्यान रहे कि शिवलिंग पर दूसरे के चढ़ाए गए बेलपत्र की उपेक्षा या अनादर नहीं करना चाहिए।