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नौ देवियों के इन रूपों से 9 ग्रह भी रहते हैं शांत, रोज करें इनकी आराधना

Tanvi Sharma

Publish: Sep 18, 2019 15:02 PM | Updated: Sep 18, 2019 15:02 PM

Religion

नौ देवियों के इन रूपों से 9 ग्रह भी रहते हैं शांत, रोज करें इनकी आराधना

हिंदू धर्म में नवरात्रि के नौ दिनों का बहुत अधिक महत्व होता है। नौ दिनों में देवी दुर्गा के स्वरूपों की पूजा की जाती है। माता के नौ स्वरुपों का अलग-अलग महत्व, श्रृंगार, विशेषताएं होती हैं। नवरात्रि के दिनों में दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए व्रत, उपवास और पूजा का विधान है। कहा जाता है की माता की भक्ति में भूल-चूक होने से वे नाराज़ हो जाती हैं। इसलिए इस दौरान गलति ना करें और देवी दुर्गा की आराधना कर उन्हें प्रसन्न करें।

 

navratri day wise puja

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा दिन अनुसार की जाती है। पहले दिन से नौवे दिन तक मां के अलग-अलग स्वरुप पूजे जाते हैं। हर रूप का अपना एक महत्व और खासियत होती है। तो आइए जानते हैं माता के किस रूप की कौन से दिन पूज करना चाहिए।

 

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नवरात्रि के पहले दिन- मां शैलपुत्री पूजा

नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। क्योंकि शैलपुत्री दुर्गा जी के नौ स्वरुपों का पहला स्वरुप है। शैलपुत्री का स्वरुप चंद्रमा को दर्शाता है। इसलिए इनकी पूजा से जातक के चंद्रमा से संबंधित दोष दूर हो जाते हैं।

नवरात्रि का दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी पूजा

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रहम्चारिणी की पूजा का विधान होता है। इस दिन माता दुर्गा के दूसरे स्वरुप मां ब्रह्मचारिणी को मंगल ग्रह को नियंत्रित करने वाला माना जाता है। इसलिए इस स्वरुप की पूजा करने से व्यक्ति के मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं।

नवरात्रि के तीसरे दिन- मां चंद्रघंटा

नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा जी के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माना जाता है की मां चंद्रघंटा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं। शुक्र से पीड़ित जातकों को देवी के इस स्वरूप की पूजा करना शुभ होता है।

 

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नवरात्रि के चौथे दिन- मां कूष्मांडा

इस माता के चौथे स्वरुप देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार देवी का यह स्वरुप सूर्य से संबंधित होता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार यदि किसी जातक को सूर्य से संबंधित परेशानियां या सूर्य दोषों से मुक्त होना है तो मां कुष्मांड़ा की पूजा फलदायी होती है।

नवरात्रि के पांचवे दिन- मां स्कंदमाता

नवरात्रि के पांचवे दिन देवी दुर्गा के इस स्वरुप को पूजा जाता है। देवी स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इसलिए इस दिन पूजा करने से व्यक्ति के बुध ग्रह के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

नवरात्रि के छठें दिन- मां कात्यायनी

नवरात्रि के छठें दिन देवी दुर्गा के छठें स्वरुप की पूजा करने की मान्यता है। देवी मां के इस स्वरुप को पूजने से बृहस्पति के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है। मां कात्यायनी बृहस्पति ग्रह को नियंत्रित करती हैं।

नवरात्रि के सातवा दिन- मां कालरात्रि
नवरात्रि के सातवे दिन देवी दुर्गा के कालरात्रि स्वरुप की पूज करने से शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है। ज्योतिष के अनुसार शनि ग्रह को मां कालरात्रि नियंत्रित करती हैं।

नवरात्रि के आठवां दिन- मां महागौरी

नवरात्रि के आठवे दिन मां दुर्गा के स्वरुप महागौरी की पूजा करनी चाहिए। इस स्वरूप की पूजा करने से देवी महागौरी राहु से संबंधित बुरे प्रभावों को कम कर देते हैं और देवी मां का यह स्वरुप राहु को नियंत्रित करता है।

नवरात्रि के नवमें दिन- मां सिद्धिदात्री

नवरात्रि के नौवे दिन दुर्गा जी के नौवे स्वरुप की पूजा की जाती है। यह स्वरुप देवी सिद्धिदात्री होता है जो की केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से केतु के बुरे प्रभावों से जातक को मुक्ति मिलती है।