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क्या आप जानते हैं हमेशा उल्टी दिशा में क्यों बहती है नर्मदा, इसके पीछे है सच्ची प्रेम कथा

Tanvi Sharma

Publish: Sep 20, 2019 14:21 PM | Updated: Sep 20, 2019 14:21 PM

Religion

जानें नर्मदा के जन्म व उनके उल्टे बहने को लेकर रोचक कहानी

धर्म ग्रंथों में नदियों का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। नदियों को पूजनीय भी माना जाता है। कभी धर्म ग्रंथों में पवित्र नदियों के उल्लेख में नर्मदा का नाम भी शामिल है। मान्यताओं के अनुसार नर्मदा नदी में स्नान करने से गंगा नदी में स्नान करने का पुण्य मिलता है। इसके अलावा नर्मदा नदी का कंकड भी बहुत महत्वपूर्ण होता है कहा जाता है कि इस नदी का हर कंकड़ शंकर के बराबर होता है, जिसे नर्मदेश्वर शिवलिंग कहते हैं। लेकिन नर्मदा के जन्म व उनके उल्टे बहने को लेकर बहुत ही रोचक कहानी है, आइए जानते हैं....

 

narmada flows in opposite

कथा के अनुसार नर्मदा भगवान शिव के पसीने से 12 साल की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई। नर्मदा के संदर्भ में पुराणों में उल्लेख मिलता है, जिसके अनुसार गंगा स्नान करने से जो फल नहीं मिलता, वो नर्मदा के दर्शन मात्र से मिल जाता है। इसके अलावा भी पुराणों व ग्रंथों में नर्मदा को लेकर बहुत सी कथाएं मिलती है। जो कि आज के दौर में उत्पन्न प्रश्नों का उत्तर है, जिनमें से एक नर्मदा का उल्टा बहना है। आइए जानते हैं उससे जुड़ी कथा....

 

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राजा मैखल की पुत्री नर्मदा

कथा के अनुसार नर्मदा नदी राजा मैखला की पुत्री थी। नर्मदा के विवाह योग्‍य होने पर मैखल ने उनके विवाह की घोषणा करवाई। साथ ही यह भी कहा कि जो भी व्‍यक्ति गुलबकावली का पुष्‍प लेकर आएगा राजकुमारी का विवाह उसी के साथ होगा। घोषणा के अनुसार राजकुमार सोनभद्र आए और राजा की गुलबकावली पुष्प की शर्त पूरी कर दि। तभी राजा मैखल ने राकुमारी नर्मदा और राजकुमार सोनभद्र का विवाह तय कर दिया। लेकिन इसके बाद कुछ ऐसा हुआ के फिर दोनों का विवाह नहीं हो पाया।

विवाह तय होने के बाद एक दिन नर्मदा का मन हुआ कि वे राजकुमार सोनभद्र को एक बार देख लें। इसके लिए उन्‍होंने अपनी सखी जुहिला को राजकुमार के पास अपने संदेश के साथ भेजा। लेकिन काफी समय बीत गया और जुहिला वापस नहीं आई। इसके बाद तो राजकुमारी को चिंता होने लगी और वह उसकी खोज में निकल गईं। तभी वह सोनभद्र के पास पहुंचीं और वहां जुहिला को उनके साथ देखा। यह देखकर उन्‍हें अत्‍यंत क्रोध आया। इसके बाद ही उन्‍होंने आजीवन कुंवारी रहने का प्रण लिया और उल्‍टी दिशा में चल पड़ीं।

 

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मां नर्मदा को कहा जाता है अविनाशी

बताया जाता है कि नर्मदा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई हजार साल तपस्या की थी। एक दिन नर्मदा की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें दर्शन दिये। शिव जी नें मां नर्मदा को बहुत से वरदान दिये जिनमें प्रलय में भी अविनाशी होने विश्‍व में एकमात्र पाप नाशिनी और नर्मदा में पाए जाने वाले पाषाणों के शिवलिंग होने का वरदान पाया। यही वजह है कि नर्मदा में पाये जाने वाले शिवलिंग की बिना प्राण-प्रतिष्ठा के पूजा कर सकते हैं।