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नरक चतुर्दशी के दिन क्यों की जाती है घर के बाहर दीया जलाकर यमराज की पूजा? जानें कारण

Tanvi Sharma

Publish: Oct 20, 2019 17:50 PM | Updated: Oct 20, 2019 17:50 PM

Religion

इस दिन मुख्य द्वार पर लगाते हैं दीपक, कथा के अनुसार ये है मान्यता

कार्तिक मास की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, यम चतुर्दशी या कई जगहों पर रुप चतुर्दशी भी कहा जाता है। यह पर्व दिवाली के एक दिन पहले मनाया जाता है। जिसमें घर के बाहर मुख्य द्वार पर दीया जलाया जाता है और यमराज की पूजा भी की जाती है। जानकर आपको आश्चर्य जरूर होगा कि दिवाली जैसे खुशियों के त्योहार पर मृत्यु के देवता यमराज की पूजा क्यों होती है। तो आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा

 

Narak Chaturdashi history: why we do yamraj puja on roop chaturdashi

इसलिये मुख्य द्वार पर लगाते हैं दीपक

एक कथा के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने 16,000 महिलाओं को बंदी बना रखा था जिन्हें कृष्ण ने उसका वध करके मुक्त किया था। इसलिए दिवाली के त्योहार में एक दिन इस विजय के रूप में मनाया जाता है और दीप जलाकर खुशी मनाई जाती है।

 

Narak Chaturdashi history: why we do yamraj puja on roop chaturdashi

कथा के अनुसार ये है मान्यता

प्राचीन कथा के अनुसार एक धर्मात्मा राजा रतिदेव थे। राजा रतिदेव ने अपने जीवनकाल में कभी कोई पाप नहीं किया था। लेकिन उसके बावजूद जब उनकी मृत्यु हुई तो उन्हें नरक प्राप्त हुआ। नरक लोक पहुंचते ही राजा यमदूत से बोले कि मैंने अपने जीवन में कोई पाप नहीं किया इसके बाद भी मुझे नरक क्यों मिला। तब यमदूत नें उन्हें नें उन्हें उत्तर देते हुए कहा- हे वत्स एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा पेट लौट गया था, यह आपके उसी कर्म का फल है।

यह बात सुनते ही राजा ने यमराज से एक वर्ष का समय मांगा और ऋषियों के पास अपनी इस समस्या को लेकर पहुंचे तब ऋषियों ने उन्हें कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत रखने और ब्राह्मणों को भोजन कराकर उनसे माफी मांगने को कहा। एक साल बाद यमदूत राजा को फिर लेने आए, इस बार उन्हें नरक के बजाय स्वर्ग लोक ले गए तब ही से कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष को दीप जलाने की परंपरा शुरू हुई। ताकि भूल से हुए पाप को भी क्षमादान मिल सके।