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नदी के बहाव की उल्टी दिशा में तैरती है भगवान की यह प्रतिमा, आप खुद ही देख लीजिए चमत्कार

Tanvi Sharma

Publish: Sep 11, 2019 17:27 PM | Updated: Sep 11, 2019 17:27 PM

Religion

यहां पानी में तैरती है साढ़े 7 किलो वजनी मूर्ति

भगवान के चमत्कार के किस्से तो हमने बहुत सुने हैं। कई बार भगावन को दूध पीते हुए विडियो देखे तो कई बार पानी पीते हुए। इन सभी किस्सों को देखने के बाद ईश्वर के प्रित आस्था ओर गहरी हो जाती है। एसा ही एक किस्सा मध्यप्रदेश के देवास जिले में हाटपिपल्या में होता है। कहा जाता है की यहां भगवान नृसिंह की साढ़े सात किलो की पाषाण प्रतिमा पानी में तैरती है।

 

 

narisingh pratima

जी हां, हाटपिपल्या में भमोरी नदी है जहां भगवान नृसिंह की साढ़े सात किलों की पाषाण प्रतिमा तैरती है। ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई बार देखा जा चुका है। यहां हर साल डोलग्यासर पर नृसिंह भगवान की प्रतिमा को नदी में तीन बार तैराया जाता है। लोगों का दावा है की प्रतिमा पानी में तैरती है और नदी के बहाव की उल्टी दिशा में तैरती है। दरअसल, प्रतिमा तैराने के पीछे एक मान्यता है। जिसके अनुसार भगवान की प्रतिमा को तीन बार तैराने से आने वाले साल की खुशहाली का अंदाजा लगाया जाता है।

 

करीब 115 साल पुराना है इतिहास

बुजुर्गों के बताए अनुसार नृसिंह भगवान की इस पाषाण प्रतिमा का इतिहास करीब 115 साल पुराना है। साल 1902 से हर वर्ष भादौ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को यानी डोल ग्यारस के दिन नृसिंह भगवान की प्रतिमा तैराई जाने की परंपरा है। कहा जाता है की प्रतिमा की प्रतिष्ठा बागली रियासत के पंडित बिहारीदास वैष्णव ने नृसिंह पर्वत की चारो धाम की तीर्थ यात्रा करवाने के बाद पीपल्या गढ़ी में करवाई थी।

 

narsingh pratima

हर साल लाखो लोग बनते हैं इस चमत्कार के साक्षी

भमोरी नदी में पंड़ितों के स्नान के बाद नदी की पूजा की जाती है। उसके बाद पंडित द्वारा दीपक जलाकर नदी में छोड़ा जाता है और मंत्रोच्चार के साथ तीन बार प्रतिमा को तैराया जाता है। हर साल प्रतिमा पानी में तैरती है और तीनों बार कामयाबी मिलती है। हाटपिपल्या में हर साल होने वाले इस परंपरा को देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु भमोरी नदी के घाट पर जुटते हैं।