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लहसुन-प्याज का ग्रह दोष कनेक्शन, जानें कैसे हुई लहसुन-प्याज की उत्पत्ति

Devendra Kashyap

Publish: Sep 09, 2019 13:13 PM | Updated: Sep 09, 2019 13:13 PM

Religion

Grah Dosh: लहसुन-प्याज का सेवन करना कई लोग अधर्म मानते हैं, तो कई इसे मांसाहारी की श्रेणी में भी रखते हैं

आज की तारीख में अधिकतर लोग लहसुन-प्याज का सेवन करते है। यूं कहा जाए तो लहसुन-प्याज हम सबके भोजन का अहम हिस्सा बन गया है। कुछ लोग तो इसके इतने आदि हो गए हैं कि अगर भोजन में लहसुन-प्याज न हो तो उन्हें लगता है कि उन्होंने कुछ खाया ही नहीं।

जबकि कुछ लोगों का मानना है कि लहसुन-प्याज का सेवन करना अधर्म है। कुछ लोग तो इसे मांसाहारी की श्रेणी में भी रखते हैं तो कई विद्वान इसे ग्रह दोष से भी कनेक्शन बताते हैं।

ज्योतिष शास्त्रों में कहा जाता है कि कुंडली में राहु खराब होने से व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों ( शुगर, बल्डप्रेशर, पाइल्स, हार्ट प्रॉब्लम ) का सामना करना पड़ता है। तो कुंडली में केतु की दशा खराब होने पर जोड़ों में दर्द की समस्या से जूझना पड़ता है।

बताया जाता है कि राहु-केतु के प्रकोप से बचने के लिए लहसुन की कलियों की माला बनाकर कुछ दिन गले में पहनना चाहिए। इसके अलावा प्याज की गांठ काले कपड़े में बांधकर गले में धारण करना चाहिए। इसके अलावा घर के बाहर कच्ची प्याज दबाकर रखना चाहिए। ऐसा करने से राहु-केतु का प्रकोप कम हो जाता है।

वहीं पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से राहु और केतु के सिर कटे थे। इस दौरान राहु-केतु के सिर से अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिर गईं थी। ऐसा माना जाता है कि लहसुन-प्याज की उपज इन्हीं बूंदों की वजह से हुई।

माना जाता है कि लहसुन-प्याज अमृत के बूंद से बने हैं, इसलिए ये रोगों के लिए संजीवनी बूटी के समान प्रभावशाली है। माना तो ये भी जाता है अमृत राक्षसों के मुंह में तले जाने की वजह से लहसुन-प्याज से तेज गंध आती है। यही कारण है कि इसे अपवित्र भोजन माना जाता है।