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Bel patra ka podha: माता पार्वती के पसीने से हुआ है बेलपत्र का उद्भव, जानें इससे जुड़ी कथा

Tanvi Sharma

Publish: Aug 07, 2019 10:25 AM | Updated: Aug 07, 2019 10:25 AM

Religion

बेलपत्र बहुत ही पवित्र और शिव जी को प्रिय होता है

सावन महीने ( sawam month ) में बेलपत्र का विशेष महत्व होता है। बेलपत्र ( bel patra ka mahatva ) बहुत ही पवित्र और शिव जी को प्रिय होता है। कहा भी गया है 'दर्शनम्‌ बिल्व पत्रस्य, स्पर्शनमं पाप नाशनम्‌' अर्थात बेल पत्र का दर्शन कर लेने मात्र से पापों का शमन हो जाता है। लेकिन बेलपत्र का इतना महत्व क्यों है, इसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। बैलपत्र के फल व पेड़ ( bel patra ka podha ) भी पूजनीय होता है। परंतु क्यों इसको लेकर एक कथा प्रचलित है। जिसके अनुसार भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र की उत्पत्ति व उसका महत्व बताया गया है। तो आइए जानते हैं, बेलपत्र से जुड़ी कथा के बारे में....

 

belpatra mahatva

ऐसे हुई बेलपत्र की उत्पत्ति

स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती के पसीने की बूंद मंदराचल पर्वत पर गिर गई और उससे बेल का पेड़ निकल आया। चूंकि माता पार्वती के पसीने से बेल के पेड़ का उद्भव हुआ। अत: इसमें माता पार्वती के सभी रूप बसते हैं। वे पेड़ की जड़ में गिरिजा के स्वरूप में, इसके तनों में माहेश्वरी के स्वरूप में और शाखाओं में दक्षिणायनी व पत्तियों में पार्वती के रूप में रहती हैं।

फलों में कात्यायनी स्वरूप व फूलों में गौरी स्वरूप निवास करता है। इस सभी रूपों के अलावा, मां लक्ष्मी का रूप समस्त वृक्ष में निवास करता है। बेलपत्र में माता पार्वती का प्रतिबिंब होने के कारण इसे भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है। भगवान शिव पर बेल पत्र चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामना पूर्ण करते हैं। जो व्यक्ति किसी तीर्थस्थान पर नहीं जा सकता है अगर वह श्रावण मास में बिल्व के पेड़ के मूल भाग की पूजा करके उसमें जल अर्पित करे तो उसे सभी तीर्थों के दर्शन का पुण्य मिलता है।

bel patra mahatva

चमत्कारी होते हैं चार पत्तियों वाले बेलपत्र

सावन में शिव जी को बेलपत्र बहुत ही प्रिय होते हैं। वहीं तीन पत्तियों वाले बेलपत्र तो आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन चार पत्तियों वाले बेलपत्र बहुत ही चमत्कारी और अद्भुत होते हैं। पंडितों का कहना है कि यह चार पत्तियों वाले बेल पत्र दुर्लभ माना गया है। इस तरह के बेल पत्र में यदि राम का नाम लिखकर उसे शिवजी को अर्पित कर दिया जाए तो उसका अनंत फल प्राप्त होता है।