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video - मलवासा का पटाक्षेप, हड़ताल हुई खत्म

kamal jadhav

Publish: Jan 22, 2020 11:38 AM | Updated: Jan 22, 2020 11:41 AM

Ratlam

video - मलवासा का पटाक्षेप, हड़ताल हुई खत्म

रतलाम। मलवासा हाईस्कूल के प्राचार्य आरएन केरावत का निलंबन खत्म करने और परीक्षा का बहिष्कार करके स्कूल में ही हड़ताल पर बैठे विद्यार्थियों के मामले का पटाक्षेप मंगलवार को हो गया। रतलाम ग्रामीण विधायक दिलीप मकवाना भी बच्चों के साथ स्कूल परिसर में धरने पर बैठे। इसके बाद उन्होंने बच्चों को समझाया और कहा कि वे उनके साथ हर स्तर पर लड़ाई लडऩे को तैयार है किंतु वे (बच्चे) परीक्षा देें क्योंकि इससे उनका भविष्य जुड़ा हुआ है। काफी देर तक उनके साथ धरने पर बैठे रहने और उनहें समझाने के बाद बच्चे तैयार हो गए। विधायक मकवाना ने खुद अपने हाथों से बच्चों को बिस्किट खिलाकर उनका धरना और हड़ताल खत्म करवाई। अब बुधवार को प्री बोर्ड और प्री वार्षिक परीक्षा के प्रश्न पत्रों में वे सभी शामिल होने को तैयार हो गए हैं।

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दिन में मलवासा पहुंचे अधिकारी
मंगलवार की सुबह से फिर से बच्चों के स्कूल परिसर में एकत्रित होने की सूचना मिलने के बाद अधिकारी दोपहर में फिर से गांव मलवासा पहुंचे। उन्होंने बच्चों को समझाने का प्रयास किया किंतु सफल नहीं हुए और बच्चे अपनी बात पर अड़े रहे। जिला पंचायत सीईओ संदीप केरकट्टा, रतलाम ग्रामीण एसडीएम प्रवीण फुलपगारे और जिला शिक्षा अधिकारी केसी शर्मा काफी समय तक समझाते रहे लेकिन बच्चे टस से मस नहीं हुए। इसी बीच जिला प्रशासन ने नामली पुलिस थाने से कुछ पुलिसकर्मियों को मलवासा बुला लिया। उन्होंने अभिभावकों को स्कूल से बाहर किया और परिसर में नहीं आने की हिदायत भी दी।

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दोपहर में विधायक मकवाना पहुंचे
बच्चों के आंदोलन में शामिल होने के लिए दोपहर में रतलाम ग्रामीण विधायक दिलीप मकवाना भी गांव पहुंचे। वे धरने पर बैठे बच्चों के बीच जाकर बैठ गए और उनकी मांग का समर्थन करने लगे। बच्चों के बीच उन्होंने उनकी समस्या भी पूछी। साथ ही उन्हें समझाया कि उनका भविष्य खराब नहीं हो इसलिए वे परीक्षा दें। इसके बाद वे बच्चों के साथ जिला प्रशासन से लेकर वरिष्ठ अधिकारी तक साथ चलने को तैयार है। कुछ अभिभावकों से भी चर्चा की। इस पर आखिर में बच्चे मान गए और फिर विधायक मकवाना ने उन्हें बिस्किट खिलाकर उनकी हड़ताल समाप्त करवाई और बुधवार को परीक्षा देने को राजी किया।
शाम को निलंबित प्राचार्य ने प्रेस कांफे्रंस की

दिन में मलवासा में घटनाक्रम चलने के बाद बच्चे हड़ताल खत्म करके परीक्षा देने को तैयार हो गए तो शाम को स्कूल के निलंबित प्राचार्य आरएन केरावत ने जिला पंचायत में प्रेस कांफे्रंस बुलाई और अपनी बात रखी। प्राचार्य ने उस दिन के पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि एक एनजीओ ने रजिस्टर बांटे थे। इस दिन वे व्यस्त थे तो स्टाफ से बंटवा दिए। बाद में कुछ समय के लिए वे एनजीओ के लोगों के साथ बच्चों के बीच रहे। बाद में पता चला कि रजिस्टर पर वीर सावरकर की जीवनी लिखी और फोटो लगे हैं। साथ ही एनजीओ के लोगों के फोटो लगे तो मैंने उन्हें फड़वा दिया था। जो लोग आए थे उन्हें मैं पहले से नहीं जानता था। जहां तक बच्चों के परीक्षा से बहिष्कार का सवाल है तो बच्चों को ऐसा नहीं करना चाहिए। उनका भविष्य खराब होता है। बच्चे परीक्षा दे और आगे बढ़ें। जो घटनाक्रम हुआ है उससे मेरा मनोबल टूटा है और मेरी कार्यशैली निश्चित रूप से प्रभावित हुई है। हम अब किसी भी संस्था को स्कूलों में कोई कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं देंगे यह सबक मिला है।
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शासन ने जो किया वह गलत है
शासन ने प्राचार्य की गलती नहीं होने के बाद भी उन्हे निलंबित किया है जो गलत है। इसमें न तो प्राचार्य का दोष है और न ही बच्चों का लेकिन शासन ने जो कार्रवाई की है वह ठीक नहीं है। इस तरह कोई इमानदार व्यक्ति कार्य ही नहीं कर पाएगा। जो रजिस्टर बांटे गए थे वह बच्चों के हित में बांटे गए थे और उस पर कोई आपत्तिजनक चीजे नहीं थी।
दिलीप मकवाना, विधायक, रतलाम ग्रामीण
सेवा से बर्खास्त हो प्राचार्य
आरएसएस का एजेंडा चलाने वाले प्राचार्य केरावत को सेवा से बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए। बच्चों से करवाए जा रहे प्रदर्शन भी निंदनीय है। स्कूल में बिना सक्षम अनुमति लिए इस तरह की नोटबुक बंटवाना प्राचार्य की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती है। नोटबुक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है जो घोर आपत्तिजनक है।
हर्षविजय गेहलोत, विधायक, सैलाना