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पूरे साल में दो मामले सबसे ज्यादा रहे चर्चित

kamal jadhav

Publish: Dec 10, 2019 11:21 AM | Updated: Dec 10, 2019 11:28 AM

Ratlam

पूरे साल में दो मामले सबसे ज्यादा रहे चर्चित

रतलाम। जिले में दुष्कर्म के दो मामले जो इस वर्ष सर्वाधिक चर्चित रहे। इसमें से एक पांच वर्षीय बालक से ब्लू फिल्म देखने के आदी पड़ौसी द्वारा हाट की चौकी क्षेत्र में दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर शव वाशिंग मशीन में छुपाया बाद में घर के पीछे नाले में फेंक दिए जाने का और दूसरा एक निजी स्कूल की 10वीं की छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला हैं। सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में 23 अक्टूबर को औद्योगिक थाना पुलिस द्वारा अभियोगपत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया हैं, परन्तु अब तक आरोपीगण पर आरोप विरचित नहीं किए गए हैं। 10 दिसंबर आरोप तय करने हेतु नियत हैं। तीन आरोपियों द्वारा अभिभाषक नियुक्त नहीं किये के कारण आरोप तय किये जाने में विलंब हुआ है। आरोपियों पर आरोप लगाए जाने के बाद पीडि़ता के कथन होंगे। बालक से दुष्कर्म और हत्या के प्रकरण में अभियोजन पक्ष के अंतिम साक्षी विवेचक टीआई आरएस बरडे के शेष प्रति परीक्षण हेतु 14 दिसंबर नियत हैं। इस साक्षी के कथन के बाद प्रकरण आरोपीयो के परीक्षण हेतु नियत होगा।
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देशभर के साथ ही जिले में इस वर्ष रैप और अपरहण के मामलों में बढ़ोतरी ने पुलिस की ङ्क्षचता बढ़ा दी है। यही नहीं घरों में चोरी और वाहन चोरी की वारदातों में बढ़ोतरी ने भी पुलिस की सक्रियता को कटघरे में खड़ा किया है। अच्छी बात यह है कि पूरे साल में हत्या के साथ ही चेन स्नेचिंग और डैकती या डकैती की योजना बनाने के मामलों में कमी आने से पुलिस ने थोड़ी राहत महसूस की है। पिछले तीन सालों के पुलिस में दर्ज आंकड़ों को देखे तो कम से कम यही बात सामने आती है। सड़क हादसों में भी लोगों में यातायात नियमों में जागरुकता और पुलिस की सख्ती का असर दिखाई दिया और इनमें भी कमी आई है। खास बात यह है कि सड़क हादसों में इंसानों की जान पिछले सालों के मुकाबले कम गई है लेकिन फिर भी कहा जा सकता है कि पौने दो सौ से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी है। चेन स्नेचिंग की वारदातों में भी कमी दर्ज हुई है। इस वर्ष चेन स्नेचिंग की अभी तक 4 वारदाते दर्ज हैं। पिछले वर्ष 2018 में पांच और 2017 में आठ वारदातें हुई थी।

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हत्या जैसे गंभीर अपराधों में कमी
वर्ष 2017, 2018 और 2019 के तीन सालों के आंकड़े बताते हैं कि हत्या जैसे गंभीर अपराध में कुछ कमी आई है। गंभीर अपराध पर तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2019 में अभी तक जिले मे हत्या के 23 मामले सामने आए चुके हैं जो वर्ष 2018 में इस अवधि तक हुई हत्या के 26 मामलों और वर्ष 2017 में हुई 30 हत्याओं से कम है। हत्या के प्रयास के प्रकरण में जहां 2019 में अब तक 40 मामले दर्ज हुए है, वहीं 2018 में 45 और 2017 में 35 मामले दर्ज हुए थे।
डकैती लूट और चेन स्नेचिंग हुई कम
पुलिस रेकार्ड के अनुसार पिछले वर्ष 2018 में 1 और 2017 में भी एक वारदात दर्ज है। इस वर्ष इस तरह की एक भी वारदात दर्ज नहीं होना पुलिस के लिए अच्छी खबर है। डकैती के प्रयास या डकैती की तैयारी के प्रकरण भी इस वर्ष एक भी नहीं है, जबकि पहले के दो वर्षो में जिले में इस तरह के दो-दो मामले सामने आ चुके हैं। लूट के प्रकरणों को देखा जाए तो वर्ष 2019 में लूट के 14 प्रकरण दर्ज हुए है, वहीं वर्ष 2018 में 22 और 2017 में लूट के 21 मामले जिले के थानों में दर्ज हुए थे।

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अपहरण, रेप और चोरी की मामले बढ़े
जिले में जहां चेन स्नेचिंग, डकैती सहित दूसरे अपराधों में कमी आई है तो दूसरी तरफ रेप और अपहरण और चोरी जैसे मामलों में जिले में पिछले साल से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जिले में वर्ष 2019 में अब तक रेप के 128 प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। 2018 में 104 और 2017 में 72 मामले दर्ज हुए थे। अपहरण के मामलों की बात की जाए तो इस वर्ष जिले के थानों में अपहरण के कुल 251 प्रकरण दर्ज हुए हैं जो वर्ष 2018 में दर्ज हुए 221 और 2017 में दर्ज हुए 202 मामलों की तुलना में ज्यादा है।
सड़क हादसों में आई कमी
जिले में सड़क हादसों की बात की जाए तो 2019 में इनमें उल्लेखनीय कमी आई है। इस वर्ष 2019 में अब तक जिले में 1085 वाहन दुर्घटनाएं हो चुकी है जिनमें 183 लोगों की जान गई जबकि इन दुर्घटनाओं में 1136 लोग घायल हुए है। 2018 में 1248 सड़क हादसे हुए और इनमें 231 लोगों की जान गई थी। घायलों की संख्या भी 1151 थी जो ज्यादा ही है। 2017 के आंकड़े देखें तो जिले में 1163 सड़क हादसों में 208 लोगों की जान गई थी और 1399 लोग घायल हुए थे। जिले में इस वर्ष वाहन चोरी के 206 मामले सामने आए हैए वहीं 2018 में 198 और 2017 में 185 वाहन चोरी हुए थे।

महिलाओं पर घटित अपराध
वर्ष ----- शीलभंग ------- अपहरण -------- बलात्कार -------- लूट, चैन खींचना
2019 --- 211 ----------- 218 --------- 128 ------------- 04
2018 --- 173 ----------- 201 --------- 104 ------------- 10
2017 --- 173 ----------- 175 --------- 72 -------------- 11
आम लोगों में नहीं है जागरुकता
आम लोगों में जागरुकता नहीं होने और अपने कत्र्तव्यों के प्रति गंभीरता नहीं होने से अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है। जहां तक रैप और महिलाओं के प्रति अपराधों की बात है तो हमें समाज के लोगों की मानसिकता बदलना होगी। इसके लिए जागरुकता अभियान चलाए जाना चाहिए। जब तक लोगों की मानसिकता नहीं बदलेगी इस तरह के अपराधों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकेगा। कानून बना दिए जाते हैं और उन्हें लागू भी कर दिया जाता है किंतु लोगों की मानसिकता में जब तक बदलाव नहीं आएगा तब तक समाज नहीं सुधरेगा।
डॉ. एसएस मौर्य, प्राध्यापक, समाजशास्त्र

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हत्या और हत्या के प्रयास जैसे अपराधों में इस साल कमी आई है। इसी तरह सड़क हादसों में भी जागरुकता अभियानों की वजह से कमी दर्ज की गई है। जहां तक रैप और महिलाओं के प्रति अपराध की बात है तो आदिवाली अंचल में बचपन में शादी करने और उनकी परंपरा में कम उम्र में शादी करना शामिल होना भी एक बड़ा कारण है। काम के बहाने किसी को साथ ले जाना और फिर वहां दुष्कर्म करने के मामले पर अंकुश लगाना मुश्किल होता है। फिर भी आदिवासी अंचल में ऊर्जा डेस्क के माध्यम से हम लोगों को जागरुक कर रहे हैं।
गौरव तिवारी, पुलिस अधीक्षक, रतलाम