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आचार्य पाट गादी पर हुए विराजित, ऋषभविजयजी मसा का हुआ पहला नगर प्रवेश

Chandraprakash Sharma

Publish: Dec 04, 2019 17:10 PM | Updated: Dec 04, 2019 17:10 PM

Ratlam

आचार्य पाट गादी पर हुए विराजित, ऋषभविजयजी मसा का हुआ पहला नगर प्रवेश

जावरा. दादा गुरुदेव के पाट परंपरा के अष्टम पट्टधर वर्तमान गच्छाधिपति श्रीमोहनखेडा तीर्थ विकास प्रेरक, आचार्य देवेश श्रीमद् विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी मसा आदि ठाणा का मंगलवार को प्रवेश हुआ। आचार्यश्री का सामैया सहित चल समारोह पहाडिय़ा रोड स्थित चार बंगला से प्रारंभ हुआ, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ पिपली बाजार स्थित आचार्य पाट परंपरा की गादी स्थल पर पहुंचा। चल समारोह में आगामी 15 जनवरी को मोहनखेड़ा महातीर्थ में होने वाली दीक्षा के मुमुक्षु अजय नाहर का वर्षीदान वरघोड़ा भी निकाला गया। इसमें मुमुक्षु ने अपने दोनों हाथों से दिल खोलकर वर्षीदान किया। उल्लेखनीय है कि तीन वर्ष पूर्व आचार्यश्री को जावरा श्रीसंघ द्वारा आचार्य पद् प्राप्त होने से पूर्व श्रीसंघ ने काम्बली ओढ़ाकर आचार्य पद् ग्रहण करने के लिए विनती की थी। यहां पर दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीश्वरजी मसा की पाट परम्परा के सात आचार्य पूर्व में इस पाट पर विराजित होकर धर्मदेशणा जैन समाज को दे चुके है।
आचार्यश्री ने पिपली बाजार स्थित मंदिर पर पाट गादी पर विराजित होकर अपने धर्म संदेश में कहा कि धर्म उत्कृष्ट मंगल है। धर्म को धारण करने वाले व्यक्ति को देवता भी नमन करते है। 150 वर्षों बाद 151 वें वर्ष में मुझे इस पाट पर बैठने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। गुरुदेव की असीम कृपा है, साधु-साध्वी श्रावक-श्राविकाओं को मेरे प्रति निष्टा बनी हुई है तभी में पाट गादी पर बैठने के लायक बना हंू। आचार्यश्री ने कहा कि इस पाट गादी से मुझे ऊर्जा मिलेगी। इस मौके संगीतमय भजनों की प्रस्तुति अभय-चिराग चौपड़ा ने दी। मुमुक्षु का बहुमान श्रीसंघ के अलावा एमएम ग्रुप ने भी किया। सुशील कोचट्टा, माणक चपडोद, अभय सुराणा, राकेश पोखरना आदि उपस्थित थे।
उपाश्रय के लिए 1 करोड़ की घोषणा
इस मौके पर आचार्यश्री ने घोषणा करते हुए कहा कि जावरा नगर में महिलाओं को पर्यूषण पर्व में प्रतिक्रमण करने में बहुत दिक्कत होती है, इसके लिए जावरा श्रीसंघ उपाश्रय जब भी बनाएगा उसमें श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ की ओर से एक करोड आठ लाख का सहयोग प्रदान किया जाएगा। वरिष्ठ साध्वीश्री संघवण श्रीजी मसा ने अपने संयम काल में खूब सेवा की है उन्हें उनको हमारे पूर्वाचार्यो ने सेवाभावी की पदवी से अलंकृत किया था, ने आज साध्वीश्री को शासन ज्योति पद से अलंकृत करता हूं।

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