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महालक्ष्मी के भक्तों की आस्था, मंदिर पर बंटे कुबेर पोटली

Gourishankar Jodha

Publish: Oct 21, 2019 22:13 PM | Updated: Oct 21, 2019 22:13 PM

Ratlam

प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर माणकचौक बरसों पुरानी परम्परा कुबेर पोटली का वितरण

रतलाम। शहर का माणकचौक स्थित प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र है, यहां से कुबेर पोटली प्राप्त करना माता के आशीर्वाद के समान माना जाता है। मंदिर प्रदेश ही नहीं अपने स्वर्ण आभूषण और नगद राशि के अद्भूत शृंगार से विश्वप्रसिद्ध हुआ। अद्भूत शृंगार दर्शन और कुबेर पोटली प्राप्त करने के लिए भक्त यहां बैंगलरू, कर्नाटक, दिल्ली, महाराष्ट्र आदि स्थानों से पहुंचते है। मंदिर पर बंटने वाली कुबेर पोटली से लोगों की इतना आस्था जुड़ी हुई है, 60-70 हजार महिला भक्त लम्बी-लम्बी कतार में खड़े होकर प्राप्त करती नजर आती है। इस साल प्रशासनिक दबाव के चलते मंदिर पर मुहूर्त में पोटली वितरण नहीं की जा रही है।

हमने नहीं कहा कि पोटली बांटना बंद कर दें
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि हमने नहीं कहा कि पोटली बांटना बंद कर दें, बस समय फिक्स न करे। पुजारी से जब इस संबंध में पूछा तो उनका कहना था कि लगातार पोटली बांटना संभव नहीं है, इसकी व्यवस्था नहीं हो पाती है। भक्तों का कहना है कि पोटली से लोगों की आस्था जुड़ी है, प्रशासनिक व्यवस्था हो और भक्तों की पोटली मिलना चाहिए, नहीं बंटने से हजारों भक्तों की आस्था पर ठेस पहुंचेगी। बतां दे कि महालक्ष्मी मंदिर पर कुबैर पोटली नहीं बटने के समाचार के बाद हर दिन कई महिला-पुरुष भक्त मंदिर पहुंचकर तलाश करते नजर आ रहे हैं कि इस साल पोटली मिलेंगी के नहीं।

शृंगार दर्शन-कुबेर पोटली विश्वप्रसिद्ध हुआ मंदिर
20 सालों से मंदिर से जुड़े माता भक्त अशोक शर्मा ने बताया कि कुबेर पोटली जरूर बंटना चाहिए, क्योंकि इससे भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है। कुबेर पोटली लेने के लिए लोग कलकत्ता, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बैंगलरू, दिल्ली आदि स्थानों से भक्त माता मंदिर पहुंचते हैं। प्रशासनिक दबाव के कारण इस साल पोटली नहीं बंट रही है। मैं पार्षद प्रतिनिधि हूं, इसलिए कई पार्षदों के साथ ही कई राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारी तक कुबेर पोटली की मांग करते है और हर साल लेकर जाते हैं। लोगों में आस रहती है कि कुबेर पोटली मंदिर से मिलेगी। नहीं मिलने से हजारों भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचेगी, हर दिन मंदिर पर कुबेर पोटली कब बटेंगी पुछने के लिए लोग आ रहे हैं। इस कुबेर पोटली से ही मंदिर को प्रसिद्धी मिली और पूरे भारत में पहचाना जाने लगा है। प्रशासन ने रंगरोंगन के लिए कहा था, लेकिन अब तक नहीं किया गया। दानपात्र से प्राप्त राशि प्रशासन मंदिर खजाने में जमा करता है, लेकिन शासकीय मंदिर है और बाहर की गेलरी भी टूट रही है, वहां प्लास्टिक लगा रखी उसे भी नहीं सुधारा गया, पूरा मंदिर काला हो रहा है, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना था कि दो-तीन दिन में रंगरोंगन साफ-सफाई करवा देंगे, लेकिन अब तक कोई नहीं आया।

कुबेर पोटली से घर में माता की कृपा बनी रहती है
महालक्ष्मी मंदिर से जुड़़ी थावरिया बाजार निवासी भक्त महिला कांता चारोडिय़ा और शांता सेनी ने बताया कि महालक्ष्मी के दर्शनार्थ जब समय मिलता है आते हैं, सालों से मातारानी के यहां मिलने वाली कुबेर पोटली लेकर जाते हैं। महालक्ष्मीजी की पूजा में पोटली का उपयोग माता मंदिर में रखी जाती है, जिससे साल भर बरकत बनी रहती है। पोटली बंटना चाहिए, बाकि माताजी की कृपा है। इसी आस्था से मंदिर आते हैं कि माता की कृपा अपने को कुबेर पोटली के रूप में मिलेगा। प्रात:काल से कुबेर पोटली के लिए लाइन में लगकर लेते हैं।

बरसो से ले जा रहे कुबेर पोटली से आस्था बनी है, बंटना चाहिए
रेलवे कॉलोनी निवासी शारदा चौहान ने बताया कि मैने पेपर में पढ़ा कि इस साल कुबेर पोटली नहीं बटेंगी इसलिए मंदिर पुछने आई थी कि क्यों नहीं बंट रही है। पिछले साल गुडिय़ा लेकर गई थी, इस साल सोचा था कि दोनों मां-बेटी लेने चलेंगे। इंदौर से आई रंजना जायसवाल ने बताया कि मैं चार-पांच सालों से माता मंदिर से जुड़ी हूं और हर साल स्वर्ण आभूषण से होते माता के शृंगार दर्शन के लिए आती हूं, दो-तीन साल से भय्या लेकर कुबेर पोटली आते हैं। इस साल मैने कहा था कि मैं भी चलुंगी। मातारानी की इतना कृपा है कि मेरे घर कुबेर की कृपा बहुत बरसी, इसलिए दर्शन करने आई हूं। पहली बार सोंचा की पोटली लेने चलेंगे और नहीं बंट रही तो अच्छा नहीं लग रहा है, बंटना चाहिए। कुबेर पोटली तिजारो और घर के पूजा स्थान पर रखने से महालक्ष्मी का कृपा अपने उपर बनी रहती है, परेशानी दूर होती है।

पुजारी ने कहा दिन भर कुबेर पोटली बांटना संभव नहींं
महालक्ष्मी मंदिर के पुजारी संजय ने बताया कि कुबेर पोटनी प्राप्त करने के लिए रतलाम जिले सहित अन्य स्थानों से भी भक्त मंदिर पर आने लगे हैं। पिछले साल भी अनुमानित ६५-७० हजार के करीब बांटी गई थी, पूजन कर नवरात्र से पोटली बनाई जाती है। इस साल पूजा पाठ के लिए तैयार की है, आम लोगों को नहीं बांट पाएंगे। प्रशासन ने बांटने के लिए प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन उनका कहना है कि मुहूर्त में ना बांटते हुए लगातार बांटी जाए वह संभव नहीं है, क्योंकि कतार में फिर बच्चे, महिला-पुरुष सभी को देना पड़ती है। भीड़ बहुत रहती है, प्रशासनिक मंदिर में मिलता है लेकिन बाहर की व्यवस्था में भी सहयोग जरूरी है। ऐसे में कुछ हो जाए तो सारी जवाबदारी पुजारी नहीं ले सकता है। भक्त तो हर दिन कुबेर पोटली के लिए पुछने के लिए आ रहे हैं, लेकिन उन्हे मना करना पड़़ रहा है। आस्था के साथ भक्तों की संख्या में भी हर साल माता मंदिर पर दीपोत्सव के दौरान बढ़ती जा रही है। मंदिर पर हर साल की तरह दीपोत्सव धूमधाम से मने इसके लिए शृंगार, पूजन में पूरा प्रयास किया जा रहा है। एक दिन में चार मुहूर्त में बांटी जाती रही थी, लेकिन प्रशासन का कहना है कि नियमित रूप से बांटी जाए, जो संभव नहीं है।

जो परम्परा है वह चलती रहे, बस समय निर्धारित न करें
जो परम्परा है वह चलती रहे, कुबेर पोटली बांटने के लिए प्रशासन ने पहले भी नहीं कहा बांटों और आज भी नहीं कह रहा की ना बांटो। हम केवल यह चाहते है कि कोई समय फिक्स न किया जाए। दिन भर बांटों, पिछले साल भी लम्बी लाइन हो गई, धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हम चाहते है कि व्यवस्था नहीं बिगड़े, जो व्यक्ति जिस समय लेने आ रहा उसे दे दो। मंदिर पर सुरक्षा की दृष्टिगत पुलिस प्रशासन व्यवस्था कर रहा है। मंदिर की पीओपी उखड़ गया तो इंस्टीमेट दे दें, जिससे पहले करवाया उसी से करवा लें। मांग करे प्रशासन पूरा सहयोग करेगा।

गोपाल सोनी, तहसीलदार, रतलाम