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बुखार में ही महिला का यूट्रिस और एपेन्डिस का ऑपरेशन किया, इन्फेक्शन फैला

Akram Khan

Publish: Sep 21, 2019 17:23 PM | Updated: Sep 21, 2019 17:23 PM

Ratlam

बुखार में ही महिला का यूट्रिस और एपेन्डिस का ऑपरेशन किया, इन्फेक्शन फैला

रतलाम। जिले के आलोट में सेवालय दवाखाना के नाम से निजी प्रेक्टिस करने वाले एक रिटायर्ड सर्जन ने ग्राम दुधाखेड़ी की महिला का बुखार में ही यूट्रिस और एपेन्डिस का ऑपरेशन कर दिया। जब महिला को इन्फेक्शन फैला तो परिजन उसे जावरा के निजी नर्सिंग होम लेकर आए, जहां उसे टायफाइड की पुष्टी हुई और हालत गंभीर होने पर रतलाम रैफर कर दिया गया। महिला के पति ने डॉक्टर पर बुखार की हालत में ऑपरेशन करने तथा डिस्चार्ज पेपर नहीं देने के आरोप लगाए है। डॉक्टर ने ऑपरेशन के दौरान महिला को बुखार नहीं होने की बात कहीं है, वहीं डिस्चार्ज पेपर भी देने की बात कही है। सेवालय के नाम से दवाखाना का पंजीकृत नर्सिंग होम की सूची में नाम नहीं है। बगैर अनुमति के दवाखाना में महिला का आपरेशन किया गया।

समीपस्थ ग्राम दुधाखेड़ी निवासी मंजू पति भरत सैन यूट्रिस की बिमारी से पीडि़त थी, जिसका उपचार जारी था। मंजू के पति भरत ने बताया कि पत्नी को उपचार के लिए आलोट स्थित सेवालय दवााखाना के डॉ. आरएस चौहान के पास लेकर गया था, जो पूर्व में सरकारी अस्पताल में सर्जन थे। चौहान ने कई सरकारी अस्पतालों में भी सर्जरी है, इसके चलते वह डॉक्टर के पास गया था। डॉक्टर ने उसकी पत्नी को बच्चादानी के साथ ही एपेन्डिस का भी ऑपरेशन करने की सलाह दी और दोनों ऑपरेशन करने के लिए १८ हजार रुपए तय हुए। जब पत्नी को बुखार आया तो पुन: डॉक्टर चौहान के पास पहुंचा तो दोनो ऑपरेशन कर दिए। करीब सात दिन बाद उसकी छुट्टी कर दी। घर जाने के बाद महिला को इन्फेक्शन हुआ व तबीयत बिगड़ी। महिला को लेकर जावरा नर्सिंग होम लेकर पहुंचा, जहां जांच के बाद महिला को टायफाइड की पुष्टी हुई, लेकिन हालत गंभीर होने पर नर्सिंग होम से महिला को रतलाम रैफर कर दिया गया। जहां महिला का उपचार जारी है, रतलाम में उपचार से परिजन संतुष्ट है।

आलोट में डॉ चौहान का सेवालय दवाखाना ऑप्रेशन सुविधाओं के लिए पंजीकृत है या नहीं है, इसकी जानकारी अभी नहीं है, सुबह कार्यालय पहुंचकर कर दिखावाता हूं, यदि नहीं हुआ तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. प्रभाकर ननावरे, सीएमएचओ, रतलाम

मंजू का ऑपेरशन किया था, लेकिन ऑपरेशन के दौरान उसे किसी प्रकार का बुखार नहीं था, ऑपरेशन के बाद भी यदि कोई समस्या हुई थी, तो मेरे पास आना था, मेरे पास ऑपरेशन के बाद उपचार के लिए नहीं आए और सीधे जावरा चले गए तो मेरी जवाबदारी नहीं है, मेरे पास आते मैं उपचार ना करता तो मैं दोषी होता, जहां तक सवाल है पंजीकृत होने का मेरे पास ऑनलाइन पंजीयन है। पीडि़त द्वारा जो भी आरोप लगाए गए है, सभी निराधार है। डिस्चार्ज पेपर भी पेशेंट को दिए थे।
- डॉ. एसआर चौहान, संचालक सेवालय दवाखाना