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रिश्वत लेने वाले इस अधिकारी को कोर्ट ने सुनाई सजा

Sourabh Pathak

Publish: Aug 20, 2019 11:57 AM | Updated: Aug 20, 2019 11:57 AM

Ratlam

excise sub-inspector - रिश्वत लेने वाले इस अधिकारी को कोर्ट ने सुनाई सजा

रतलाम। रिश्वत लेने के मामले में न्यायालय (court) ने एक बड़े अधिकारी को सजा सुनाई है। न्यायालय (court) ने अधिकारी को चार वर्ष की सजा के साथ जुर्माने की सजा से दंडित किया है। ये रिश्वत शराब के एक दुकान का संचालन करने वाले दुकानदार से मांगी गई थी। जिस पर पीडि़त की शिकायत पर लोकायुक्त उज्जैन ने कार्रवाई कर अधिकारी को रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़ा और अब जाकर उसे सजा दिलाकर सलाखों के पीछे भेज दिया है।

 

शराब दुकानदार से 35 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ाए तत्कालीन आबकारी उपनिरीक्षक (excise sub-inspector ) को सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। करीब छह वर्ष पूर्व हुई इस कार्रवाई के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश ने फैसला सुनाया है। इसमें आलोट में पदस्थ तत्कालीन आबकारी उपनिरीक्षक (excise sub-inspector ) राजीव थापक को न्यायालय (court) ने चार वर्ष के सश्रम कारावास के साथ सात हजार रुपए के जुर्माने की सजा से दंडित किया है। लोकायुक्त ने इस मामले में एक और निजी व्यक्ति को आरोपी बनाया था, जिस पर दोषसिद्ध नहीं होने पर उसे छोड़ दिया गया है।

वर्ष 2013 में पकड़ाया था
उप संचालक अभियोजन एसके जैन ने बताया कि लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने आलोट निवासी राजेश सिंह की शिकायत पर 10 जून 2013 को दोपहर 12.40 बजे कार्यालय आबकारी उपनिरीक्षक वेयर हाउस आलोट से राजीव थापक को 35 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा था। थापक ने राजेश से रिश्वत के रुपयों से भरा लिफाफा लेकर आबकारी वेयर हाउस के प्रबंधक चंद्रपाल जायसवाल को दे दिया था। लोकायुक्त ने चंद्रपाल की पेंट की जेब से रुपयों से भरा लिफाफा बरामद किया था। वहीं दोनों के हाथ धुलाने पर पानी रंगीन हो गया था। जिसके चलते लोकायुक्त ने प्रकरण दर्ज किया था।

दुकान चलाने के मांगे थे रुपए
शिकायतकर्ता राजेश सिंह ने लोकायुक्त उज्जैन कार्यालय पहुंचकर 7 जून 2013 को राजीव थापक के खिलाफ लिखित में शिकायत आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें बताया था कि वह आलोट में लाइसेंसी मनीष जायसवाल की देशी-अंगे्रजी शराब दुकान चलाता है। दुकान चलाने के लिए आबकारी उपनिरीक्षक थापक उससे 35 हजार की रिश्वत मांग रहा है। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने उसी दिन शाम को अपने आरक्षक के साथ आवेदक को वाइस रिकॉर्डर लेकर भेजा और फिर रिश्वत की पूरी कहानी उसमें रिकाड हो गई। जिसके आधार पर लोकायुक्त 10 जून 2013 को राजेश को लेकर उज्जैन से आलोट पहुंची और कार्रवाई की।

इस धारा में हुई सजा
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश ने तत्कालीन आबकारी उपनिरीक्षक राजीव थापक पर दोषसिद्ध होने पर उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 1988 की धारा 13 (1)(घ)(दो) सहपठित धारा 13 (2) के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 7 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं दूसरे आरोपी चंद्रपाल पर किसी प्रकार का दोषसिद्ध नहीं होने पर उसे छोड़ दिया गया।