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महालक्ष्मी का जन्मोत्सव आज, इस तरह करें माता को प्रसन्न

Ashish Pathak

Publish: Sep 21, 2019 10:35 AM | Updated: Sep 21, 2019 10:35 AM

Ratlam

Dhan Pane Ka Upay : माता लक्ष्मी समुद्र मंथन से निकली थी, ये बात तो सभी को पता है, लेकिन इसके पीछे की कहानी क्या आपको पता है, क्या आपको इस बात की जानकारी है कि माता को प्रसन्न आसानी से किस तरह किसा जा सकता है। इसको जानने पढे़ं ये खबर।

रतलाम। Dhan Pane Ka Upay : धन बगैर सब व्यर्थ ये बात सभी जानते है। धन सबकुछ नहीं है, लेकिन बहुत कुछ है इस बात के बारे में सभी को पता है। शनिवार, 21 सिंतबर को महालक्ष्मी का प्रकट उत्सव है। लाखों - करोड़ों वर्ष पूर्व आज ही के दिन समुद्र मंथन से माता का अवतरण हुआ था। इनको प्रसन्न करने के वैसे तो अनेक उपाय है, लेकिन कुछ उपाय वो है जो घर में रहकर किए जा सकते है। ये बात रतलाम के प्रसिद्ध ज्योतिषी वीरेंद्र रावल ने भक्तों को कही।

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ये है पुराण की कथा

ज्योतिषी वीरेंद्र रावल ने बताया कि एक बार भगवान शंकर के अंशावतार महर्षि दुर्वासा कहीं जा रहे थे। तभी उन्होंने एक कन्या के हाथ में पारिजात के पुष्पों की एक सुंदर माला देखी। महर्षि ने उस कन्या से वह माला मांगी। कन्या से आदर भाव से वह माला महर्षि को दे दी। महर्षि ने वह माला देवराज इंद्र को दे दी। इंद्र ने उसे लेकर ऐरावत के मस्तक पर डाल दिया। ऐरावत ने वह माला पृथ्वी पर फेंक दी। यह देख महर्षि दुर्वासा बहुत नाराज हुए। उन्होंने इंद्र को श्राप दिया कि तुम्हारे अधिकार में जितनी भी धन-सम्पत्ति है वह नष्ट हो जाएगी। दुर्वासा के शापनुसार तीनों लोकों की लक्ष्मी नष्ट हो गई।

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इस तरह हुआ समुद्र मंथन

ज्योतिषी वीरेंद्र रावल ने बताया कि तब दानवों ने मौका पाकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु ने देवताओं को दानवों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने को कहा। भगवान का आदेश पाकर देवताओं ने दानवों के साथ समुद्र मंथन किया। तब उसमें से कामधेनु, वारुणीदेवी, कल्पवृक्ष और अप्सराएं प्रकट हुईं। इसके बाद चंद्रमा निकले। इस प्रकार अन्य रत्न भी निकले। सबसे अंत में भगवती लक्ष्मीदेवी प्रकट हुईं। सभी देवताओं ने मिलकर माता लक्ष्मी की स्तुति की जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने देवताओं को फिर से स्वर्ग प्राप्ति का वरदान दिया। इसके बाद मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित हो गई। ये ही माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के राम अवतार में सीता और श्रीकृष्ण अवतार में रुक्मिणी रूप में अवतरित हुईं।

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ये है सबसे बेहतर उपाय
ज्योतिषी वीरेंद्र रावल ने बताया कि घर में रखी काली मिर्च के पांच दाने ले।इनको लेकर छत पर जाए। इसके बाद इनमे से चार दाने एक-एक करके अपनी चारों दिशा में फैंक दें। बचा हुआ एक काली मिर्च का दाना आसमान की तरफ उछाल दे। इसके बाद घर नीचे आकर सफेद पुष्प, खीर आदि से माता का पूजन करें। ये उपाय लगातार २१ दिन करने से घन का लाभ होना शुरू हो जाता है। इसके अलावा काले कपडे़ में काली मिर्च के 21 दाने शनिवार शाम को दान करने से भी धन का लाभ होता है।

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