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मध्यप्रदेश के इस जिले में अब गेहूं की फसल पर संकट, सूख रहे पौधे

Gourishankar Jodha

Publish: Dec 05, 2019 12:56 PM | Updated: Dec 05, 2019 12:56 PM

Ratlam

जिला कृषि विभाग ने कृषि विज्ञान केंद्र से मांगे विषय विशेषज्ञ के वैज्ञानिक, लिखा पत्र, ताकि मौके पर पहुंचकर देख सकें स्थिति

रतलाम। खरीफ में लगातार बारिश अतिवृष्टि से सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई, अब किसानों को गेहूं की फसल में भी नुकसानी का अनुमान लग रहा है। इन दिनों जिले के कई खेतों में गेहूं के पौधे सूखने की समस्या बढ़ती जा रही है। जिसको लेकर जिला कृषि विभाग का अमला भी चिंतित है और विभागीय अधिकारियों को इसके नियंत्रण के लिए कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा को पत्र लिखकर विषय विशेषज्ञों की मांग की है, ताकि वस्तु स्थिति का पता लगाया जाकर गेहूं में लगी बीमारियों पर नियंत्रण किया जा सके। कृषि विभाग के अधिकारियों की माने तो इन दिनों गेहूं में तीन प्रकार का रोग नजर आ रहा है। पहला जड़माहु कीट, दूसरी जड़ सडऩ और तीसरी व्हाइट ग्रेब से फसल नष्ट हो रही है।

रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं में इन दिनों तीन प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो चुकी है। इस कारण गेहूं के पौधे खेतों में सूखने लगे हैं। जिसकी कई कुआझागर सहित अन्य गांवों से किसानों द्वारा कृषि विभाग के पास शिकायतें भी पहुंचने लगी है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो गेहूं की फसल में इन दिनों तीन प्रकार की बीमारी का प्रकोप बड़ रहा है। जिसमें पहली जड़माहु कीट, दूसरी जड़ सडऩ और तीसरी व्हाइट ग्रेब की शिकायते देखने को मिल रही है। इससे गेहूं के पौधे सूख रहे है।

बीमारियों के नियंत्रण के किए जा रहे प्रयास
कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी कई गांवों में पहुंचकर खेतों का निरीक्षण किया, इसके बाद केवीके के कृषि वैज्ञानिकों को भी पत्र लिखकर मांग की है कि वे यहां आए और वस्तुस्थिति से अवगत कराए ताकि इस पर नियंत्रण किया पाया जा सके। कृषि विशेषज्ञों की माने तो गेहूं में जो इस बार स्थिति देखने को मिल रही है, उसमें जड़सडऩ की बिमारी है, यह वहां दिखाई दे रही है जहां पर किसानों ने पलेवा नहीं किया, जिन्होंने पलेवा करवाया है उन खेतों में जड़माहु कीट लग रहा है और व्हाइट ग्रेब भी पौधों की जड़ों का चट कर रहा है। इसके पिछे कारण यह देखा जा रहा है कि खरीफ फसल कटाई के बाद किसान खेत हकाई कर 10-15 दिन की अंतर रखता है, कई किसानों ने एक पानी की बचत करते हुए बारिश के पानी में ही गेहूं की बुआई कर दी है। नमी अधिक होने के कारण यह बीमारियां आ रही है।

ऐसे करें नियंत्रण का उपाय
उप संचालक कृषि जीएस मोहनिया ने बताया जड़माहु कीट नियंत्रण के लिए पांच किलो ग्राम क्लोरोपाइरीफॉस 12 से 15 किलो रेत में मिलाकर प्रति बिघा भुरकाव करें। इसके लिए किसान भाई ध्यान दे कि जो सिंचाई रेलकर कर रहे हैं, वे तुरंतबाद भुरकाव करें, और स्प्रींगलर सिंचाई कर रहे वे पहले भुरक दे फिर हल्की सिंचाई करें। इसी प्रकार जड़सडऩ में सिंचाई के बाद यूरिया दे तो जड़ कम सड़ेगी। इसके नियंत्रण के लिए कार्बनडॉजीन प्लस मैनकोजेब 500-600 ग्राम 10-12 किलो ग्राम रेत में मिलाकर भुरकाव करें।

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