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जिला अस्पताल में हंगामा: मरीज से बोला रुपए दो नहीं तो पैर में लगी रॉड वापस निकाल लूंगा

Yggyadutt Parale

Publish: Oct 23, 2019 08:00 AM | Updated: Oct 23, 2019 00:46 AM

Ratlam

जिला अस्पताल में हंगामा: मरीज से बोला रुपए दो नहीं तो पैर में लगी रॉड वापस निकाल लूंगा

रतलाम। जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में मंगलवार को एक महिला के पैर में रॉड लगने के बाद जब एक युवक छह हजार रुपए लेने पहुंचा तो हंगामा खड़ा हो गया। रॉड देने वाला युवक यहां पहुंचा और मरीज के परिजन से कहा कि जल्दी रॉड के छह हजार रुपए दो। इस पर परिजनों ने कहा कि रॉड तुमसे नहीं ली तो रुपए तुम्हे क्यो दे, इस बात पर रुपए लेने के लिए आया युवक बोल पड़ा कि यदि रुपए नहीं दिए तो रॉड निकाल लूंगा। इस बात पर मरीज के परिजन ने अपने मिलने वालों को बुलाकर संबंधित को पकड़ा और फिर सिविल सर्जन के पास ले गए।

अस्पताल के ट्रामा सेंटर में पिपलौदा निवासी भंवर कुंवर भर्ती थी। वृद्धा के भतीजे ने बताया कि पैर फिसलकर गिरने से वह जख्मी हो गई थी। डॉक्टर ने जांच के बाद पैर में रॉड डालने की बात कही थी। इस काम में पांच से छह हजार रुपए का खर्च आना बताया था, जिस पर हामी भर ली थी। उसके बाद मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के दो डॉक्टर ने ऑपरेशन कर रॉड डाली थी। बाद में एक युवक घूमते हुए वार्ड में पहुंचा और पूछने लगा की इस मरीज के साथ कौन है। इस पर युवक ने जब कहा कि मैं हूं तो दूसरा युवक बोल पड़ा जल्दी से छह हजार रुपए दो। पीडि़त ने जब पूछा किस बात के तो कहना था कि पैर में रॉड डाली है।

थोड़ी देर रूकने का कहा था गरमा गया

पीडि़त की माने तो उसके द्वारा युवक से कहा कि थोड़ी देर रूको रुपए बुलवा रहा हूं, इस पर वह बोल पड़ा की रुपए तो अभी चाहिए नहीं तो पैर से रॉड निकलवाकर ले जाउंगा। इस बात को सुनकर परिजन नाराज हो गए और अपने परिचितों को बुलाकर संबंधित व्यक्ति को पकड़कर सिविल सर्जन डॉ. आनंद चंदेलकर के पास ले गए। वहां शिकायत पर पता चला कि उक्त व्यक्ति जिला अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत जिन मरीजों को रॉड की आवश्यकता होती है, उन्हे रॉड उपलब्ध कराता है। क्यो कि अस्पताल में रॉड व मरीजों को लगने वाले अन्य उपकरण नहीं है। एेसे में बीपीएल व आयुष्मान के मरीजों को छोड़ अन्य लोगों को राशि देना पड़ती है। बाद में पीडि़त पक्ष ने इस मामले में किसी प्रकार की शिकायत नहीं की।

इनका कहना है
शासन से करेंगे मांग

- प्रदेश के लगभग सभी अस्पतालों में रॉड सहित अन्य उपकरण नहीं है या फिर जहां है वहां पर कमी है। जिस व्यक्ति ने रॉड के रुपए मांगे थे वह आयुष्मान योजना से जुड़े मरीजों को सामान उपलब्ध कराने वाली फर्म का कर्मचारी है। अस्पताल में उपकरण नहीं होने पर मरीज उपचार के लिए स्वयं बाहर से लाते है, क्यो कि निजी अस्पताल में खर्च महंगा पड़ता है। इस कारण से यहीं पर सामान लाकर देते है। किसी ने कोई शिकायत नहीं की। दोनों डॉक्टर भी मेडिकल कॉलेज के थे।
डॉ. आनंद चंदेलकर, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, रतलाम