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धारा 370 हटने के बाद विपक्ष में डर,'कहीं इस बड़े एक्ट में बदलाव ना कर दें MODI'

Prateek Saini

Publish: Aug 05, 2019 20:40 PM | Updated: Aug 05, 2019 20:40 PM

Ranchi

Jammu And Kashmir: जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन बिल ( Bill On Jammu And Kashmir ) के राज्यसभा में पास होते ही विपक्षी नेताओं के चेहरों पर चिंता की रेखाएं आ गई हैं । उन्हें डर हैं कि मोदी...

(रांची,रवि सिन्हा): जम्मू-कश्मीर पर देश की संसद (राज्यसभा) में ऐतिहासिक बिल पारित होने पर झारखंड के विपक्षी नेताओं ने सूबे में जनजातीय और अन्य वर्गों को छोटनागपुर-संतालपरगना काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी-एसपीटी एक्ट) के तहत प्राप्त विशेष अधिकार छीन जाने का भय सताने लगा है।


कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राजेश ठाकुर ने कहा कि पार्टी को इस बात का डर है कि झारखण्ड में लागू सीएनटी-एसपीटी एक्ट को भी भाजपा सरकार आने वाले समय में खत्म कर देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा देश में भय का माहौल तैयार कर पूंजी पतियों को लाभ पहुॅंचाने के लिए इस तरह के एक्ट को हटाने का काम रही है। कांग्रेस पार्टी ऐसे किसी भी जनविरोधी कृत्य को रोकने का प्रयास करती आई है और करती रहेगी।

 

इधर, झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा है कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र की एनडीए सरकार संघीय ढांचे की अनदेखी कर रही है। उन्होंने बताया कि भाजपा ने जम्मू-कश्मीर पर फैसला कहीं न कहीं राजनीतिक एजेंडे के तहत लिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी यह मानती है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था और रहेगा। हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र सरकार संघीय ढांचे की अनदेखी कर रही है, देश संविधान से चलेगा या गुंडागर्दी से। उन्होंने कहा कि यदि उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले को खारिज कर दिया, तब क्या होगा।


गौरतलब है कि झारखंड संतालपरगना प्रमंडल के छह जिलों में संतालपरगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी) लागू है, वहीं राज्य के शेष 18 जिलों में सीएनटी प्रभावी है। इस कानून के तहत अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य वर्गों की जमीन को गैर एसटी-एससी के लोग नहीं खरीद सकते है। हालांकि एसटी और एससी में शामिल जातियां अपने थाना क्षेत्र में संबंधित जातियों की जमीन की खरीद-बिक्री कर सकती है।


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