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भूख से ग्रामीण की मौत, परिजनों का दावा-दस दिनों से भूखा था झींगुर

Brijesh Singh

Publish: Jul 17, 2019 17:02 PM | Updated: Jul 17, 2019 17:01 PM

Ranchi

Jharkhand straved: परिजनों के मुताबिक दस दिनों से झींगुर भूखा था। सरकारी योजना ( Government Scheme ) का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा था।

( रांची, रवि सिन्हा )। झारखंड ( Jharkhand ) के चतरा ( Chartra ) जिले में एक बार फिर एक व्यक्ति की भूख से मौत ( starved to death ) की खबर है। हालांकि प्रशासन ने इसे बीमारी के कारण हुई मौत बताया है। वहीं मृतक के कुछ परिजनों का कहना है कि घर में अनाज के अभाव में यह घटना हुई है। घटना के सामने आने के बाद प्रशासनिक जांच की कार्रवाई शुरू हो गई है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे सरकार की नाकामी करार दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार चतरा जिले के कान्हाचट्टी प्रखंड के डोंगागड़ा गांव के रहने वाले अनुसूचित जाति के झींगुर भुईयां नामक शख्स की मौत हो गई।

 

मृतक की पत्नी की मानें, तो घर में अनाज के अभाव में दस दिनों से झींगुर भूखा था। अन्य परिजनों का भी कहना था कि सरकारी योजना ( Government Scheme ) का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा था। हालांकि मौत की सूचना मिलने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मृतक के घर अनाज जरूर पहुंचावाया। इधर, घटना की सूचना मिलने पर प्रशासनिक जांच भी शुरू हो गई है। प्रशासनिक जांच में प्रथम दृष्टया यह बात भी सामने आई है कि झिंगुर पिछले कई महीनों से बीमार था और बीमारी की वजह से ही उसकी मौत हुई है। फिलहाल मामले की छानबीन की जा रही है।

 

दूसरी तरफ भूख से मौत ( Starved ) की सूचना मिलने पर विपक्षी नेताओं को भी एक मुद्दा को मिल गया है। पूर्व कृषिमंत्री और राजद नेता सत्यानंद भोक्ता ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि झींगुर की मौत जांच का विषय है, लेकिन यह घटना सरकारी मशीनरी के कामकाज पर सवालिया निशान खड़ा करती है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो सरकार अपनी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की बात करती है। दूसरी ओर चतरा में भूख से मौत हो रही है। पूर्वमंत्री ने कहा कि सरकार सिर्फ हवा हवाई बात करती है। जमीनी हकीकत कुछ और है। मामले की लीपापोती का प्रयास नहीं होना चाहिए।

 

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