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जेल से चलेगी दबंग नेताओं की चुनावी सियासत

Navneet Sharma

Publish: Sep 26, 2019 18:27 PM | Updated: Sep 26, 2019 18:28 PM

Ranchi

Jharkhand: जेल में बंद नेताओं ने शुरू की चुनावी तैयारियां, किसी ने पत्नी तो किसी ने अपने रिश्तेदारों को मैदान में उतारने का बनाया मन, संभावित चुनावों को देखते हुए फौज को तैयार रहने का फरमान

रांची। आगामी नंवबर और दिसंबर में झारखंड विधानसभा के चुनावों की संभावनाओं को देखते हुए राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। दूसरी तरफ दलों के ऐसे प्रत्याशी जो विभिन्न मामलों को लेकर जेल में बंद है उन्होने ने भी जेल से ही तैयारियों की रूपरेखा बनाना शुरू कर दी हैं।

धनबाद जिले के झरिया विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2014 में निर्वाचित भारतीय जनता पार्टी विधायक संजीव सिंह पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड मामले में जेल में बंद है। गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित झारखंड विकास मोर्चा विधायक प्रदीप यादव अपनी ही पार्टी की एक महिला नेत्री के साथ दुष्कर्म मामले में जेल में बंद है। संजीव सिंह ने इस बार अपनी पत्नी का नाम चुनाव के लिए आगे किया है और वे भाजपा नेताओं से लगातार संपर्क में है। प्रदीप यादव ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वे खुद चुनाव मैदान में उतरेंगे या परिवार के किसी सदस्य को चुनाव मैदान में उतरेंगे। लेकिन उन्होने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है।
इधर, पूर्व मंत्री और झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय महासचिव बंधु तिर्की को एसीबी ने राष्ट्रीय खेल घोटाले मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। एसीबी की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और अब उन्होंने हाईकोर्ट से जमानत की गुहार लगायी है। जेल जाने से पहले बंधु तिर्की जोर से मांडर विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर चुनाव तैयारियों में जुटे और उनके समर्थकों का कहना है कि यदि चुनाव के पहले वे जेल से बाहर आ जाते है, तो ठीक है, अन्यथा जेल से ही चुनाव लड़ेंगे।
वर्ष 2014 में चुनाव जीतने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा के दो विधायकों योगेंद्र प्रताप और अमित महतो को निचली अदालत ने अलग-अलग मामलों में सजा सुनायी थी, जिसके बाद हुए उपचुनाव में योगेंद्र महतो की पत्नी बबीता देवी और अमित महतो की पत्नी सीमा महतो चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंच चुकी है। इस बार भी दोनों महिला नेत्री अपने पति के साथ मिलकर चुनाव की तैयारियों में जुटी है।
वर्ष 2014 में ही कोलेबिरा विधानसभा सीट से झारखंड पार्टी विधायक एनोस एक्का चुनाव जीत कर आये थे। बाद में पारा शिक्षक मनोज कुमार की हत्या मामले में सिमडेगा की निचली अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनायी। जिसके बाद हुए उन्हें उपचुनाव में उनकी पत्नी और जिला परिषद अध्यक्ष मेनन एक्का चुनाव मैदान में उतरी, लेकिन वह चुनाव हार गयी। एनोस एक्का को आज इस मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिल गयी है और जेल से बाहर निकलने के बाद फिर वे अपने क्षेत्र में पत्नी की जीत सुनिश्चित कराने में जुट जाएंगे।
वर्ष 2014 में लोहरदगा से आजसू पार्टी विधायक कमल किशोर भगत ने भी जीत हासिल की थी, लेकिन रांची के प्रसिद्ध चिकित्सक रहे डॉ. के.के. सिन्हा के साथ मारपीट, क्लीनिक में तोड़फोड़ और रंगदारी के मामले में उन्हें निचली अदालत ने सजा सुनायी, जिसके कारण उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गयी और उपचुनाव में उनकी पत्नी कांग्रेस के सुखदेव भगत से चुनाव हार गयी थी। राज्यस्तरीय समिति के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने दो अक्टॅबर को कमल किशोर भगत समेत 12 सजायाफ्ता कैदियों को रिहा करने के प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान कर दी है। जेल से रिहाई के बाद कमल किशोर भगत के फिर से क्षेत्र में अपनी पत्नी के पक्ष में सक्रिय होने की उम्मीद है।