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Once Upon A Time: जिस रामपुरी चाकू की फिल्मों में भी दी जाती थी मिसाल, आज बन गया इतिहास

lokesh verma

Publish: Nov 25, 2019 15:16 PM | Updated: Nov 25, 2019 15:16 PM

Rampur

Highlights
- पिछले 20 वर्षों में मार्केट से गायब हुआ रामपुरी चाकू
- चाकू बाजार में पहले थी तकरीबन 100 से ज्यादा दुकानें
- अब रामपुर में एक-दो दुकान ही हैं चाकू की

रामपुर. एक समय था जब रामपुरी चाकू अपनी आन, बान और शान के लिए जाना जाता था, लेकिन पिछले 20 वर्षों से रामपुरी चाकू मार्केट से गायब हो गया है। रामपुरी चाकू बनाने वाले कारीगर अब इस काम से किनारा कर चुके हैं। यही वजह है कि रामपुर में अब न तो चाकू बनाने वाले ही बचे हैं और न ही चाकू बेचने और खरीदने वाले। हालांकि कुछ लोग ही शेष हैं, जो अपने पुरखों के इस कार्य में लगे हैं।

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'पत्रिका' संवाददाता ने रामपुर के चाकू बाजार में पड़ताल करते हुए 300 साल पुरानी दुकान पर बैठे एक कारीगर महेश से बात की। महेश ने बताया कि हमारे पूर्वजों ने चाकू बनाने का काम शुरू किया था, लेकिन अब इससे दो जून की रोटी भी नहीं मिल पा रही है। उन्हाेंने बताया कि पिछले 20 साल से चाकू मार्केट से गायब हो गया है। चाकू बनाने वाले कारीगर अब दूसरे कामों में लग गए हैं। मैं खुद भी चाकू पर धार तेज करता था, लेकिन आज कैंची की धार तेज कर रहा हूं। पहले चाकू का यहां बड़ा कारोबार था। हिंदुस्तान की राजधानी में जब बड़े-बड़े बाजार लगते थे तो उन बाजारों में भी रामपुरी चाकू को जगह मिलती थी।

महेश कहते हैं कि पहले चाकू बाजार में तकरीबन 100 से ज्यादा दुकानें हुआ करती थी, लेकिन आज चाकू बाजार में महज गिनती की एक-दो दुकान ही हैं। उन दुकानों पर भी चाकू कम बाकी के घरेलू सामान ज्यादा नजर आते हैं। उन्होंने बताया कि हमें तीन इंच के चाकू बेचने की परमिशन है। जबकि चीन और दूसरे देशों से यहां पर आ रहे चाकू 6 से 12 इंच तक के हैं। उन पर कोई रोक नहीं लगाता है। रामपुरी चाकू से सरकार की पाबंदी हट जाए तो आज फिर से रामपुरी चाकू काे बड़ा बाजार मिल सकता है।

चाकू कारोबारी जमील बताते हैं कि पहले रामपुर जिले में तकरीबन 5 हजार परिवार चाकू के कारोबार से जुड़े थे। घरों के सभी लोग चाकू बनाते थे। इससे उनके परिवार का पालन-पोषण होता था, लेकिन धीरे-धीरे रामपुरी चाकू मार्केट से गायब हो गया है।

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