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Patrika Alert : छलकते पानी के बीच मस्ती की लापरवाही कहीं डूबो न आपकी जिन्दगी की कश्ती

Laxman Singh Rathore

Publish: Aug 19, 2019 11:25 AM | Updated: Aug 19, 2019 11:25 AM

Rajsamand

जरा संभलकर उतरें पानी में, थोड़ी सी चूक पड़ सकती है भारी
river & pound व अन्य झरनों पर सुरक्षा प्रबंध के अभाव में मंडरा रहा खतरा

Rain in rajasthan

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

इस बार मानसून की मेहर रही, जिससे पानी से धरा भी तृप्त हो गई, बल्कि आम जनजीवन के लिए भी अपार जलराशि आई है। Bageri Band के साथ कुंडेली, भीम टेंक सहित पांच बांध छलक गए, जिससे नदियां पूरे वेग से मैदान की ओर बह रही है, तो पहाडिय़ों से बह रहे झरनों ने अंगड़ाई ली है। छोटे बड़े बांध, तालाब लबालब होने लगे हैं, जहां कहीं पानी की कमी है, तो वहां आवक अब भी जारी है। अच्छी बारिश से लोग हर्षित और पुलकित हैं और जलाशयों में आए नए पानी को लेकर हर कोई इनकी ओर खींचे चले जा रहे हैं। लोगों में उतावलापन इतना कि बिना सोचे समझे पानी में उतरने के लिए अपने को रोक नहीं पाते। इसकी परिणित हादसों से होती है। अधिकतर तालाब, बांध लबालब हो गए, तो बनास, गोमती, चन्द्रभागा व खारी नदी के साथ नालों में भी कलकल कर बहता पानी आमजन को आकर्षित कर रहा है। पहाडिय़ों के झरने, हरियाली की खूबसूरत वादियां लोगों का दिल रिझाने लगी हैं। बेशक, हर कोई परिवार के साथ खूब मस्ती करना चाहेगा और करें भी, मगर थोड़ा संभलकर। क्योंकि गत वर्षों में जरा सी बेपरवाही की वजह से कई लोगों जान चली गई और ऐसा ही हादसा रविवार को केलवा थाना क्षेत्र के बागुन्दड़ा में गोमती नदी के पुल पर हो गया। इधर, अस्थायी पिकनिक स्पॉट बन चुके इन पानी वाले स्पॉट पर आपात स्थित से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसलिए वहां जाने वाले लोगों को आफत से सकुशल निकालना मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन है। इस पर पत्रिका की खास रिपोर्ट

बाघेरी पर 10 जवान, अन्य जगह नहीं
छलकते बाघेरी बांध पर भ्रमण के लिए आने वाले लोगों की सुरक्षा व मनचलों पर नजर रखने के लिए जिला पुलिस द्वारा 10 जवानों की विशेष टुकड़ी तैयार की, जो वाकई आमजन के लिए सुविधाजनक है। खमनोर थाना प्रभारी सुनील शर्मा ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से पुलिस जाब्ता तैनात है।

चेतावनी तक नहीं लिखी
जिले के सातों ब्लॉक में कुल डेढ़ दर्जन से अधिक छोटे-बड़े तालाब व झीले हैं। यहां सिंचाई विभाग से लेकर पुलिस व प्रशासन तक ने चेतावनी तक अंकित नहीं है। सख्ती नहीं होने से लोग आसानी से नहाने के लिए इनमें उतर जाते हैं। इधर, बनास, गोमती, चंद्रभागा, खारी नदी व झील के बहाव क्षेत्र में लगातार हुए बजरी व मिट्टी दोहन से बड़े-बड़े खढ्ढे हो गए हैं। इनके घाटों पर चेतावनी नहीं लिखी होने से हमेशा हादसे की अंदेशा रहता है। इसमें अगर तैराक का पैर भी फंस जाए तो वह भी डूब सकता है।

सैकड़ों की तादाद, फिर भी सुरक्षा नहीं
मावली से मारवाड़ को जाने वाली मीटर गेज ट्रेन सुबह जब साढ़े छह बजे जब मावली से निकलती है तो यहां से सैकड़ों लोग गोरमघाट के लिए चढ़ते हैं। नाथद्वारा, कांकरोली, कुंवारिया, आमेट और फिर देवगढ़ स्टेशन पर इनमें और इजाफा होता है। ये यात्री गोरमघाट में विभिन्न झरनों व जलकुण्डों और झरनों में उतरते हैं। बेहद फिसलन और गहरी खाई होने के कारण यहां खतरे बना रहता है। इधर, बाघेरी बांध जलप्रपात में नहाने का लुत्फ लेने के लिए पहुंच रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक यहां प्रतिदिन ५ सौ से १ हजार परिवार पहुंचते हैं। रविवार को यह कई गुना बढ़ जाता है।

अचानक बारिश से हो सकती है परेशानी
बाघेरी बांध से लेकर वेरों का मठ, कुंभलगढ़, सैवंत्री लक्ष्मणझुला, रामदरबार, सातपालिया, दिवेर, गोरमघाट, भील बेरी सरीखे पिकनिक स्थल जंगली और पहाड़ी इलाके में है, जहां पर बारिश के कारण आप को किसी भी प्रकार की परेशानी हो सकती है। साथ ही दूर दूर तक जंगल के कारण इलाका सूनसान भी है। इसलिए तत्काल मदद नहीं मिल सकती।

जरूरत से कम है कुशल गोताखोर
जिले में तालाब, बांध के मुकाबले कुशल तैराक व गोताखोर का अभाव है। राजसमंद में आपदा प्रबंधन में गोताखोर करणसिंह व गोवर्धन वैष्णव तैनात है। इसके अलावा नन्दसमंद के लिए गोपाल काबरा व आमेट में गोरीलाल व दिलावर की मदद ली जाती हैं।