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44 साल से लिख रहे खत, पढ़ नहीं रहा निगम

Laxman Singh Rathore

Publish: Aug 31, 2019 12:46 PM | Updated: Aug 31, 2019 12:46 PM

Rajsamand

राउमावि चारभुजा में भवन को छूकर गुजर रही बिजली लाइन, शिकायत के बावजूद हो रही अनदेखी

हीरालाल पालीवाल/प्रमोद भटनागर
चारभुजा. एक स्कूल 44 साल से बच्चों की जान को खतरे में डालकर अपनी पनाह में उन्हें रखे हुए है। साढ़े चार दशक में कितनी ही चिट्ठियां लिखीं, मगर विद्युत निगम ने शायद अब तक उन्हें रद्दी की टोकरी में ही डाल रखा है। चारभुजा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भवन व चारदीवारी से होकर गुजरती 1100 केवी की विद्युत लाइन से विद्यार्थी जान पर खेलकर भविष्य बनाने को मजबूर हैं। विद्यालय भवन और चारदीवारी से सटी 11 केवी विद्युत लाइन का मामला कोई एक-दो बरस से नहीं, बल्कि 44 सालों से लंबित पड़ा है। अनुमान लगाया जा सकता है कि स्थानीय प्रशासन और विद्युत निगम कितने गंभीर हैं। कितनी ही बार निगम को लिखित में दिया जा चुका है, लेकिन इस दरम्यान विद्युत विभाग राजस्थान विद्युत मण्डल से बदलकर अजमेर विद्युत वितरण निगम हो गया, मगर उसकी कार्यशैली में कोई अंतर नहीं आया। प्रधानाचार्य बीरबल मीणा ने बताया की सन् 1975 से 1978 के बीच गर्मी की छुट्टियों में तत्कालीन बिजली विभाग ने बिना स्वीकृति लाइन खींच दी थी, जबकि विद्यालय 1959 से संचालित हो रहा है।

कई बार दिए प्रार्थना पत्र
भवन से सट रही विद्युत लाइन को हटाने के लिए कई बार निगम में प्रार्थना पत्र दिए जा चुक हैं। इनमें विद्यालय में 1996 से पहले का रिकॉर्ड नहीं है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 22 अक्टूबर 1996 , एक फरवरी 2006 , 24 अगस्त 2006, 4 अक्टूबर 2006 एवं 13 अप्रेल 2018 को प्रार्थना पत्र दिए गए थे। वहीं ग्राम पंचायत गढ़बोर में अलग से पत्र दिए गए। लेकिन, दोनों ओर से अब तक किसी ने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
कक्षा कक्ष निर्माण में हो रही दिक्कत
विद्यालय में वर्तमान में कमरों का निर्माण कार्य शुरू करवाया गया, लेकिन, बिजली की लाइन के कारण कार्य को बीच में रोकना पड़ गया है।
अदालती आदेशों पर भारी पोल हटाने की राशि
उल्लेखनीय है कि अविनाश मल्होत्रा बनाम भारतीय विद्युत विभाग के बीच पत्रावली संख्या 48 3 सन् 2004 के मामले में सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली ने विद्यालय की चारदीवारी से बिजली लाइन या पोल आदि नहीं लगाने की व्यवस्था दी थी।
यह है खतरा
विद्युत लाइन विद्यालय के भवन को छूकर जा रही है। बरसात में भवन की छत गीली रहती है, जिससे भवन में करंट दौडऩे की आशंका बनी रहती है। वॉलीबॉल मैदान भी सटा हुआ है, जिसमें बालक घूमते रहते हैं।