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Marble की Rate से ज्यादा रॉयल्टी की राशि, Government की दोहरी नीति से घट रही मार्बल बिक्री

Laxman Singh Rathore

Publish: Jul 18, 2019 21:58 PM | Updated: Jul 18, 2019 21:58 PM

Rajsamand

भौतिक हालात सुनने को तैयार नहीं सरकार

marble business distress at rajsamand

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

संकट से घिरे Marble उद्योग में पत्थर की कीमत से ज्यादा राज्य सरकार द्वारा रॉयल्टी की राशि वसूल की जा रही है। माल से भी ज्यादा टैक्स वसूली की दोहरी नीति की वजह से ही लगातार मार्बल की बिक्री घटती जा रही है। ऐसी स्थिति मार्बल कारोबारियों के लिए टिके रहना मुश्किल होता जा रहा है, मगर सरकार द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस कारण दो से तीन दशक से मार्बल business का अनुभव रखने वाले उद्यमी अब नए बिजनेस के लिए राजसमंद से पलायन कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा डीएमएफटी सहित रॉयल्टी 291.92 रुपए प्रति टन लफरों पर (मार्बल के छोटे टुकड़े) पर वसूले जा रहे हैं। इस तरह एक ट्रक-ट्रेलर में 30 टन मार्बल खरीदकर ले जाता है, तो रॉयल्टी की राशि 8 हजार 747 रुपए हो रहे हैं, जबकि तीस टन मार्बल लफर की दर सिर्फ सात हजार रुपए है। मार्बल ब्लॉक की कीमत से ज्यादा अब रॉयल्टी राशि बन रही है, जिसकी वजह से दिनों-दिन मार्बल खरीदने वाले लोग कम होते जा रहे हैं। इस कारण कारोबारियों के लिए गुजारा चलाना मुश्किल होता जा रहा है, जो अब नए व्यवसाय की ओर रुख करने लगे हैं।

अनुभव कारोबारी कर रहे पलायन
राजसमंद में वर्ष 1990 से मार्बल ट्रेडिंग, खनन पट्टा व गैंगसॉ स्थापित कर कारोबार करने वाले चुरू हाल राजसमंद निवासी रतनलाल मंत्री ने मार्बल कारोबार में मंदी को देखते हुए छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयरन की फैक्ट्री खोल दी। डेढ़ वर्ष में छत्तीसगढ़ में कारोबार जमने लगा, तो खान व गैंगसा बेचकर जनवरी 19 को राजसमंद से पलायन कर गए। इसी तरह केलवा निवासी तनसुख बोहरा भी 90 के दशक से मार्बल का व्यवसाय कर रहे हैं, जिन्होंने मार्बल कारोबार में मंदी के चलते मुंबई का रूख करते हुए एल्युमीनियम का व्यवसाय शुरू किया। यही स्थिति अन्य सभी कारोबारियों की बनी हुई है।

इसलिए घटी कीमत, बढ़ी रॉयल्टी
पहले खदान से मार्बल ब्लॉक बिना के्रक का निकलता था। खान से ब्लॉक निकालने का खर्च भी कम आता। अब खदानों की गहराई बढ़ गई, जिससे ब्लॉक में के्रक, टूट-फुट बढ़ गई। इस वजह से मार्बल निकालने की लागत काफी बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में सरकार टैक्स, रॉयल्टी घटाने की बजाय बढ़ाती गई। इसलिए अब मार्बल की मूल कीमत से ज्यादा दर रॉयल्टी की हो गई है। लफरे का 40 फीसदी भाग वेस्ट में चला जाता है।

पॉलिसी बदलने की जरूरत
मार्बल ब्लॉक की कीमत से ज्यादा रॉयल्टी की राशि हो रही है। इसके लिए सरकार को कई बार बता दिया कि पॉलिसी में संशोधन करें, ताकि गर्त में जाते मार्बल उद्योग प्रतिस्पद्र्धी बाजार में टिक सकें। फिर भी सरकार सुनने को भी तैयार नहीं है।
गौरवसिंह राठौड़, अध्यक्ष, मार्बल माइंस ऑनर्स एसोसिएशन, राजसमंद

हां, चिंताजनक हालात
मार्बल उद्योग के चिंताजनक हालात है। मैंने मार्बल उद्योग की समस्या को लेकर सरकार अवगत कराया, मगर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वैकल्पिक उद्योग के लिए भी मैंने केन्द्रीय उद्योग मंत्रालय को हाल ही गैस लाइन का प्रस्ताव रखा है, जिस पर जल्द सकारात्मक निर्णय होने की उम्मीद है।
किरण माहेश्वरी, विधायक, राजसमंद