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देसूरी नाल में 150 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन ?

Laxman Singh Rathore

Publish: Aug 28, 2019 12:47 PM | Updated: Aug 28, 2019 12:47 PM

Rajsamand

प्रशासन, पीडब्लूडी, आरएसआरडीसी ने सडक़ चौड़ी करने के लिए प्रस्ताव नहीं भेजा
MP Diya Kumari के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से मुलाकात से सामने आया झूठ

Desuri nal road excident at rajsamand

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

Desuri Nal की तंग सडक़ प्रशासन, पीडब्लूडी और आरएसआरडीसी की लापरवाही के चलते मौत की सडक़ बन गई है। 7 सितम्बर 2007 को राजस्थान के सबसे बड़े सडक़ हादसे (Rajasthan Largest road excident) के बावजूद वन भूमि से गुजर रही सडक़ चौड़ी करने के प्रस्ताव तक नहीं भेजे। राजसमंद प्रशासन और विभागों का यह झूठ MP Diya Kumari के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से मुलाकात में खुलकर सामने आ गया। इस तरह सडक़ यौड़ी करने की योजना सिर्फ हवा हवाई रह गई और हकीकत नहीं बन पाई। पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा डेंजर जोन घोषित देसूरी नाल में इंसानी जिन्दगी को लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई। इस तरह 11 साल 11 माह की समयावधि में करीब 150 लोगों की मौतें हो गई, जबकि तीन सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस तरह इंजीनियरिंग विभागों के साथ जिला प्रशासन के प्रयास सिर्फ हादसों पर घडिय़ाली आंसू बहाने तक ही सीमित रह गए। सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है?

सितम्बर 2007 से अब तक 40 बड़े हादसे हुए और हर हादसे की भौतिक रिपोर्ट में यही कारण सामने आया कि सडक़ बहुत संकरी है, ढलान और मोड़ तीक्ष्ण है। साइड में पगडंडी तक नहीं है और क्रॉसिंग करना भी मुश्किल है। सुरक्षा दीवार भी तंग व क्षतिग्रस्त होने की वजह से ही हादसे हो रहे हैं। इस तरह परिवहन विभाग और जिला पुलिस राजसमंद द्वारा स्पष्ट लिखा गया कि सडक़ में इंजीनियरिंग डिफॉल्ट है, जिससे देसूरी नाल में सोलह किलोमीटर की सडक़ डेंजर जोन घोषित है, जहां सामान्य वाहनों के हर वक्त दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद सार्वजनिक निर्माण विभाग, राजस्थान सडक़ विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन द्वारा सर्वे करवाकर प्रस्ताव तक तैयार नहीं किया आखिर सडक़ चौड़ी करनी है या टनल अथवा फ्लाईओवर बनाना है और न ही इसके लिए वन विभाग से एनओसी के लिए कोई प्रस्ताव ही भेजा गया।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से मिली सांसद
राजसमंद सांसद व राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण सदस्य दीया कुमारी सोमवार को जयपुर में राज्य मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिंदम तोमर से मिल कर देसूरी नाल में सडक़ चौड़ी पर अनुमति देने की मांग की। इसके अलावा मावली मारवाड़ रेल लाइन, रायपुर, जस्साखेड़ा सडक़ बनाने के लिए एनओसी दिलाने पर विस्तृत चर्चा की। इस पर अरिंदम तोमर ने विधिवत प्रस्ताव भेजने पर जल्द स्वीकृति दिलाने की बात कही।

अब तक सिर्फ ये कार्रवाई हुई
पुलिस व परिवहन विभाग द्वारा तीन बार सर्वे करवा कर हादसों की भौतिक रिपोर्ट सरकार को भेजी। इस पर तत्कालीन जिला कलक्टरों द्वारा भी 4 बार पत्र शासन सचिवालय होम भेजे गए। इन्हीं प्रस्तावों में सार्वजनिक निर्माण विभाग और आरएसआरडीसी के अभियंताओं की टिप्पणी में भी सडक़ चौड़ी करने, टनल बनाने या फ्लाईओवर की आवश्यकता व्यक्त की। इस बीच न तो विधिवत सर्वे हुआ कि कितनी वन विभाग की जमीन दायरे में आ रही है, कितने पेड़ कटेंगे और प्रोजेक्ट रिपोर्ट क्या है और न ही इसका विधिवत प्रस्ताव वन विभाग को भेजा गया।

विधिवत कार्रवाई का तरीका
सडक़ चौड़ाई, टनल या फ्लाईओवर का अंतिम निर्णय लेकर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करना। फिर वन विभाग की कितनी जमीन उसके दायरे में आ रही है, उसकी भौतिक रिपोर्ट तैयार कर ऑनलाइन वन विभाग की वेबसाइट पर प्रस्ताव भेजना। राज्य वन बोर्ड कमेटी में चर्चा के बाद उस प्रस्ताव को केन्द्रीय वन बोर्ड को भेजा जाता है, जहां से स्वीकृति जारी होती है।

प्रस्ताव आए तो स्वीकृति दें
देसूरी नाल सडक़ चौड़ाई व विकास के लिए कोई प्रस्ताव ही नहीं मिले। रेलवे लाइन का प्रस्ताव जरूर आया है, जिसे राज्य बोर्ड से अनुशंषित कर दिया और जल्द नेशनल बोर्ड को भेज दिया जाएगा।
अरिंदम तोमर, राज्य मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक वन विभाग जयपुर

पत्र भेजे, प्रस्ताव का पता नहीं
देसूरी हादसों को लेकर पहले कई डीओ लेटर राज्य सरकार को भेजे गए हैं। विधिवत प्रस्ताव पीडब्लूडी व आरएसआरडीसी द्वारा भेजे गए या नहीं। इसके बारे में पता कर जल्द कार्रवाई करवाई जाएगी।
अरविंद पोसवाल, जिला कलक्टर राजसमंद

अभी नहीं बना प्रस्ताव
पहले कोई प्रस्ताव भेजे गए होंगे, तो उसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है। अब नए सिरे से सर्वे करवाने के बाद सडक़ की चौड़ाई या अन्य विकल्प की प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर प्रस्ताव भेजा जाएगा। पुराने कोई होंगे, तो उसका पता किया जाएगा।
अजीत जैन, परियोजना निदेशक राजस्थान रोड विकास प्राधिकरण उदयपुर

कोई प्रस्ताव ही नहीं
इंजीनियरिंग विभाग द्वारा सडक़ विस्तार का कोई प्रस्ताव ही नहीं बना, तो वन विभाग कैसे स्वीकृति दें। ऑनलाइन प्रस्ताव जाने पर हमारे द्वारा अनुशंषा पत्र भेज दिया जाएगा। इसके लिए बातें कई बार हुई, मगर भौतिक रूप से प्रस्ताव नहीं भेजे गए।
फतहसिंह राठौड़, उपवन संरक्षक वन विभाग राजसमंद

Forest land in desuri nal rajsamand