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बेटियों को गोद लेकर पुलिस करेगी कुपोषण के दंश से मुक्त

Bhanu Pratap Thakur

Publish: Sep 23, 2019 10:49 AM | Updated: Sep 23, 2019 10:49 AM

Rajgarh

बच्चों को कुपोषण मुक्त किया जाए इसके लिए जिले के कई अधिकारियों के साथ ही अब पुलिस ने भी इसका जिम्मा उठाया है। जिसके तहत रविवार बच्चों को गोद लिया है।

31 अतिकुपोषित बच्चो को एसपी सहित पुलिस अधिकारियों ने लिया गोद


एसपी ने पुलिस अधिकरियों की बैठक के दौरान उनसे बच्चों को गोद लेने की अपील की।

यहां जिस बच्चे को गोद लिए वहीं पहुंचकर की मुलाकात।

राजगढ़। बच्चों को कुपोषण malnutrition से मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन और महिला बाल विकास के संयुक्त तत्वधान में सेम फ्री अभियान की शुरुआत की गई है। जिसके तहत कलेक्टर ने पिछली टीएल की बैठक में जिले के विभिन्न अधिकारियों को बच्चों को गोद लेने की अपील की। जिसके बाद कई अधिकारी इस अभियान में आगे आए।


पूरी तरीके से बच्चों को कुपोषण मुक्त किया जाए इसके लिए जिले के कई अधिकारियों के साथ ही अब पुलिस ने भी इसका जिम्मा उठाया है। जिसके तहत रविवार को कंट्रोल रूम में आयोजित पुलिस अधिकारियों की एक बैठक के दौरान 31 अतिकुपोषित बच्चों को एसपी प्रदीप शर्मा, एएसपी नवल सिंह सिसोदिया सहित जिले भर के एसडीओपी और टीआई रैंक के अधिकारियों ने इन बच्चों को गोद लिया है। सभी बच्चों का वजन और पूरा पता अधिकारियों को दे दिया गया है।


अधिकारियों ने एक एक बच्चे को गोद लिया
सभी अधिकारियों को उनके थाने से लगे आसपास के बच्चों को गोद लेने की अपील की गई। सभी अधिकारियों ने एक एक बच्चे को गोद लिया। यहां एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा की अतिकुपोषित लगभग साढ़े 300 बच्चों में से यदि और भी ऐसे बच्चे बच रहे हो तो उनकी जानकारी दें। अन्य थाना प्रभारी उन बच्चों को भी गोद लेंगे। बैठक में ही उन्होंने अपील की कि जब तीन माह बाद इन बच्चों को हम देखेंगे तो बताने के लिए रहे कि हमने जिन बच्चों को गोद लिया उनका

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अधिक से अधिक वजन बढ़ जाए
पीडब्ल्यूडी ईई के गोद लिए बच्चे को बापस ले गए परिजन सालपुरा की एक अतिकुपोषित बच्चे को पीडब्ल्यूडी के अजय बेन ने गोद लिया है। उसकी कमजोरी को देखते हुए बच्ची को उन्होंने गांव से लाकर एनआरसी राजगढ़ में भर्ती कराया। लेकिन शाम को ही उनके परिजन एनआरसी में पहुंचे और सुपरवाइजर के साथ अभद्रता करते हुए बच्चे को वापस ले गए।


परिजनों को जागरूक किया
ऐसे में जब यह जानकारी महिला बाल विकास के वरिष्ठ अधिकारियों को लगी तो खुद महिला बाल विकास अधिकारी चंद्र और महिला सशक्तिकरण अधिकारी श्याम बापू खरे गांव पहुंचे और उन्होंने बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर परिजनों को जागरूक किया ऐसे में उन्होंने एनआरसी भवन के लिए तो हां नही किया। लेकिन उपचार के लिए बच्चे को एक निजी चिकित्सालय लाने को तैयार हो गए। जिसका खर्च भी ईई ने उठाने की बात कही। दूसरी तरफ आबकारी अधिकारी वीरेंद्र धाकड़ ने तलेन की एक बालिका को गोद लिया। जिसे वे कपड़े और खाने पीने की सामग्री लेकर मिलने के लिए उनके घर गए।

 

संजीवनी अभियान के तहत हमे बहुत कुछ सार्थक परिणाम देखने को मिले थे। जब आमजन खुद ऐसे अभियानों से जुड़ते है तो निश्चित रूप से उनके परिणाम बेहतर होते है। इसलिए ही एक बार फिर हमने कुपोषण मुक्त जिला बनाने के लिए इस अभियान को शुरू किया।
चंद्रसेना भिड़े महिला बाल विकास अधिकारी