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वेयर हाउस का तर्क घुन और स्प्रे से बढ़ा वजन, अब सवाल ये : हर कट्टे में तीन किलो कैसे संभव?

Rajesh Kumar Vishwakarma

Publish: Nov 18, 2019 04:13 AM | Updated: Nov 17, 2019 18:30 PM

Rajgarh

- मामला वेयर हाउस के गेहूं में नमी के खेल का
- पिछली बार की कार्रवाई भी हो गई थी रफा-दफा, कोई गहराई तक जाता ही नहीं, पीडीएस और सरकारी गेहूं से शासन को चूना लगा रहे जिम्मेदार

ब्यावरा. लंबे समय से शासन को चूना लगाकर बचते आ रहे वेयर हाउस कॉर्पोरेशन के जिम्मेदार सही जवाब तक तैयार नहीं कर पा रहे हैं। सरेआम सरकारी गेहूं में पानी छिड़़कर वजन बढ़ाने वाले जिम्मेदार ऊपरी स्तर तक सेटिंग कर लेते हैं और इसी कारण उन पर कार्रवाई नहीं हो पाती।

पिछली बार भी दिसंबर-2018 में इसी तरह की शिकायत सामने आई थी, विभाग के आर. एम. तक ने निरीक्षण किया था लेकिन उन्हें भी गुमराह कर इधर-उधर का स्टॉक चेक करवाकर इतिश्री कर ली गई थी। अब फिर से बड़े स्तर पर शिकायत सामने आई है।

दरअसल, वेयर हाउस कॉर्पोरेशन के जिस अधिकृत वेयर हाउस में पानी मिलाकर वजन बढ़ाया गया वहां साफ तौर पर यह गड़बड़ी की जाती है। अब विभाग इसमें घुन और स्प्रे का तर्क दे रहा है लेकिन स्प्रे यदि होता भी है तो इतना पानी या नमी नहीं हो सकती कि प्रति कट्टी तीन से चार किलो वजन बढ़ जाए।

वहीं, घुन भी प्रति क्वींटल एक प्रतिशत बढ़ता है, लेकिन उस हिसाब से भी वजन अधिक है और घुन जैसी स्थिति पिछले साल ही पैक हुए गेहंू में कहीं है ही नहीं? विभाग के जिम्मेदार गाढ़ी कर्मा के फेर में स्टॉक को इधर-उधर कर देते हैं और दर्शा देते हैं कि नमी के कारण वजन बढ़ा, यदि ऐसा है तो पूरे गोडाउन में सभी कट्टियों में ऐसा क्यों हुआ?

दूसरी बात यदि नमी बढ़ ही रही है तो वेयर हाउस की सुरक्षा किस काम की? ऐसे तमाम सवालों ने वेयर हाउस कॉर्पोरेशन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछली बार 18 दिसंबर 2018 को भी ऐसे ही पानी मिलाने की शिकायत सामने आई थी लेकिन उस दौरान बनाए गए पंचनामे में भी तर्कहीन चीजें दर्शाकर इतिश्री कर ली गई थी, ऐसा ही इस बार भी हुआ है।

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स्टॉक में भी होती है बड़ी हेर-फेर, प्याज में लाखों कमाए!
सूत्रों के अनुसार वेयर हाउस कॉर्पोरेशन में पीडीएस के गेहूं सहित अन्य शासकीय सामान के स्टॉक में भी बड़ी हेर-फेर की जाती है। साथ ही तमाम प्रकार की गड़बडिय़ां विभाग के ही जिम्मेदार आगे रहकर करवाते हैं।

वेयर हाउस कते जिम्मेदारों पर बीते दो-तीन सालों में हुई प्याज खरीदी में भी लाखों रुपए के हेर-फेर के आरोप लगे हैं। शासन की खीरीदी गई उस प्याज को भी जिम्मेदारों ने खराब की गिनती में दर्शा दिया जो पूरी तरह से सही थी।

उसी के बदले में मनमाने रुपए व्यापारियों से लेकर औने-पौने दाम में उन्हें प्याज बेच दी गई। इसीलिए अब वृहद स्तर पर शॉर्टेज प्याज की आ रही है। हालांकि यह मनमानी पकडऩे के लिए भी प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू किया है।


आरएम को लिखेंगे मामला
हमने पंचनामा बनाया था जिसमें जांच की है, उन्होंने कुछ तर्क दिए हैं लेकिन फिर भी यदि ऐसी गड़बड़ी है तो हम उनके आरएम को मामला लिखेंगे। जो भी होगा नियमानुसार कार्रवाई होगी।
- एसके तिवारी, डीएसओ, राजगढ़

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