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'नई दिल्ली' में न तो श्मशान घाट है और न ही पक्की सड़कें हैं ,पढें पूरी खबर

Amit Mishra

Publish: Sep 16, 2019 12:11 PM | Updated: Sep 16, 2019 15:50 PM

Rajgarh

नई दिल्ली में नहीं बन सका मुक्तिधाम
अंतिम संस्कार के ट्रॉली में शव रखकर ले जाना पड़ता है
मीणों को अंत्येष्टि की अंतिम यात्रा कच्चे रास्ते से रेल्वे लाइन पार कर ले जाना पड़ता है, वहां पर भी खुले में अंतिम संस्कार होता है।

राजगढ़/ उदनखेड़ी। समीपस्थ ग्राम पंचायत छपरा का गांव village नई दिल्ली new delhi की आबादी चार सौ population लगभग है, लेकिन यहां पर अगर बारिश rain में किसी की मृत्यु dies हो जाए तो उसकी अंत्येष्टि करने में समस्या problem in cremation खड़ी हो जाती है। यहा ग्रामीणों को अंत्येष्टि की अंतिम यात्रा कच्चे रास्ते से रेल्वे लाइन पार कर ले जाना पड़ता है, वहां पर भी खुले में अंतिम संस्कार होता है।


उदनखेड़ी गांव ले जाकर अंतिम संस्कार किया
गांव में तीन दिन पहले एक महिला नयादीबाई की मौत हो गई, जिसका अंतिम संस्कार करने का संकट सामने आ गया। क्योंकि पूर्व में जहां पर खुले में अंत्येष्टि की जाती थी उस रास्ते पर काफी पानी था और लगातार हो रही बारिश से खुले में अंतिम संस्कार संभव नहीं था, जिससे ग्रामीणों ने शव को ट्रैक्टर ट्रॉली में रखकर तीन किलोमीटर दूर स्थित उदनखेड़ी गांव ले जाकर अंतिम संस्कार किया।

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खतरे से खाली नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि कभी भी गांव में मौत हो जाती है तो हमें बहुत परेशानी होती है एक तो खुले में अंत्येष्टि करना दूसरा अंतिमयात्रा को रेलवे पटरी पार कर ले जाना भी खतरे से खाली नहीं है। ग्रामीणों ने जल्द ही cremation ground मुक्तिधाम बनाने की मांग की है।

 

प्रस्ताव जनपद पंचायत को भेजा जा चुका है

हमारे द्वारा पूर्व में भी गांव में मुक्तिधाम बनाने के लिए प्रस्ताव जनपद पंचायत को भेजा जा चुका है, पुन: प्रस्ताव भेजकर जल्दी ही मुक्तिधाम बनाने की मांग की जाएगी।
मुकेश विश्वकर्मा, सरपंच ग्राम पंचायत छपरा

श्मशान घाट तक नहीं ले जा सके अर्थी, गांव में की अंत्येष्टी

उधर दो दिन पहले सीहोर जिले के मेहतवाड़ा ग्रामीण अंचल में मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के दावे की पोल खटसुरा गांव में शनिवार को खुल गई थी। जब ग्रामीणों को श्मशान तक जाने पक्का रास्ता नहीं होने से गांव में ही आस्थाई रूप से चद्दर लगाकर एक महिला की अंत्येष्टी करना पड़ी।

 

बारिश के मौसम में समस्या बढ़ जाती है
मेहतवाड़ा क्षेत्र का खटसुरा गांव आज भी सुविधा से वंचित है। सबसे बड़ी समस्या श्मशान तक के एक किमी के कच्चे मार्ग से हो रही है। ग्रामीण किसी की मौत होने पर 8 महीने तो जैसे तैसे उसे श्मशान ले जाकर अंत्येष्टी कर देते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में समस्या बढ़ जाती है। कच्चे मार्ग पर कीचड़ होने से उनको काफी तकलीफ उठाना पड़ती है। गांव में एक महिला की मौत होने पर शनिवार को श्मशान तक ले जाकर उसकी अंत्येष्टी करने का संकट खड़ा हो गया।

चद्दर लगाकर अंत्येष्टी करना पड़ी
समस्या को देखते हुए लोगों को महिला को श्मशान ले जाने की बजाए गांव में ही चद्दर लगाकर अंत्येष्टी करना पड़ी। इस दौरान लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला। उनका कहना था कि कई बार इस समस्या को लेकर अफसर-जनप्रतिनिधियों को अवगत करा चुके हैं। इसमें निराकरण होने की बजाए सिर्फ आश्वासन ही मिला है।