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बिना जीएसटी चुकाए जा रहा था ट्रक, जबलपुर की जीएसटी इंटेलीजेंस टीम पहुंची तो सकते में आए, पढ़े पूरी खबर

Rajesh Kumar Vishwakarma

Publish: Sep 20, 2019 17:37 PM | Updated: Sep 20, 2019 17:37 PM

Rajgarh

-जबलपुर से आई सेंट्रल जीएसटी की टीम ने आधी रात को दी दबिश, एक-एक दस्तावेज खंगाला, कार्रवाई जारी



कुरावर। जिले के एक मात्र औद्योगिक केंद्र पीलूखेड़ी में सरेआम जीएसटी की चोरी का मामला सामने आया है। इसके तहत वैरिट ग्लोबल ग्रुप द्वारा बिना जीएसटी चुकाए मील के अंदर की मशीनरी बेची जा रहीथी। जबलपुर से आई सेंट्रल जीएसटी की टीम ने रंगेहाथों कंपनी को यह करते पकड़ा है।


दरअसल, पीलूखेड़ी के उद्योग केंद्र वैरिट ग्लोबल ग्रुप (हिंद सिनटैक्स लिमिटेड) से अवैध तौर पर माल लोड करते हुए ट्रक को जबलपुर से आई सेंट्रल जीएसटी की टीम ने पकड़ा और पूरी जांच की। जांच में सामने आया कि कंपनी द्वारा बिना कोई टैक्स (जीएसटी) चुकाए सामान बेचा जा रहा है। इसी आधार पर कार्रवाई की गई। देर रा तक इनकम टैक्स विभाग की रेड की कार्रवाईचलती रही।अभी तक कार्रवाई में क्या हुआ यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।

 

दिवालिया हुई कंपनी, ले रखा 172 करोड़ का लोन
पिछले साल नवंबर (2018) में कंपनी दिवालिया हो गई थी। करीब 172 करोड़ रुपएका लोन इलाहाबाद बैंक से लोन लिया गया है। जब नहीं चुका पाए तो बंद कर भाग लिए। बाद में बैंक ने कोर्ट की शरण ली जहां से कंपनी को आधिपत्य में लेने के निर्देश दिए गए।

बैंक द्वारा कंपनी को आधिपत्य में लेने के बाद बैंककर्मियों और कंपनी के लोगों द्वारा मील (कंपनी) के अंदरूनी महंगे पाट्र्स बिना इनवॉइस और टैक्स चुकाए बेेचे जा रहे थे। इसी संबंध में शिकायत हुईथी और जबलपुर से टीम कार्रवाई के लिएआई थी। जीएसटी की टीम ने कंपनी के जिमेदारों को रंगेहाथों सामान ले जाते पकड़ा है।

 

अधिगृहित की लेकिन बोर्ड तक नहीं लगाया
आश्चर्य की बात यह है कि इतनी बड़ी कंपनी को अधिगृहित करने का नोटिस बोर्ड तक बैंक प्रबंधन ने नहीं लगाया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बैंककर्मीऔर संबंधित कंपनी के लोगों की मिलीभगत से सीधे तौर पर टैक्स चोरी की जा रही थी।वैरिट ग्लोबल ग्रुप ने अप्रैल 2013 में उद्योग नगर पीलूखेडी में धागा मील खोला था। जिसके लिएकरोड़ों का लोन लिया था।प्रदेश में हुए चुनावों के दौरान लगी आचार संहिता के दौरान कंपनी बंद कर संचालक फरार हो गए। बैंक पर करीब 172 करोड़ का लोन बाकी था।बैंक के अलावा उक्तमील पर बिजली विभाग के भी करीब चार करोड़ रुपए बाकी हैं।


जीएसटी इंटलीजेंस ने आधी रात को डाली रेड
उक्तपूरे घटनाक्रम की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को चलने के बाद और लगातार शिकायत के बाद जबलपुर से आई जीएसटी इंटलीजेंस की टीम ने मील में रेड डाली। जहां पता चला कि बैंक का इतना बकाया होने के बावजूद कंपनी को सील नहीं किया गया। इसी की आड़ में कुछकंपनी के लोग बैंक से मिलीभगत कर अंदर की मशीनरी का सामान चोरी छिपे बेच रहे थे।

लोगों का कहना है कि बैंक वाले आते तो थे लेकिन कंपनी के लोगों से बातचीत कर चले जाते थे। इतनी बड़ी चोरी की भनक जब जीएसटी इंटलीजें को लगी तो गुरुवार रात रेड डाली गई।जहां बहुत सारी खुली पड़ी मशीनरी को जब्त किया गया, अगले दिन देर रात तक भी कार्रवाई जारी रही।

 

मजदूरों की मेहनत के रुपएभी हड़पे
कंपनी जब भागी तो न सिर्फबैंक को चपत लगाई बल्कि टैक्स की भी सीधे तौर पर चोरी की। वहीं, कंपनी में काम करने वाले जरूरतमंद और गरीब मजदूरों के हक की राशि भी हड़प ली।उस दौरान तमाम कर्मचारियों ने हाईकोर्ट की शरण लीथी, इस पर हाईकोर्ट की सख्त हिदायत के बाद उसने आकर मजदूरों का रुपया दिया था।हालाकि उसमें भी कुछ लोगों के चेक बाउंस हो गये थे लेकिन कर्मचारियों का छह माह की पीएफराशि करीब 8 0 लाखकंपनी ही डकार गई। मामले में जबलपुर से आईसेंट्रल जीएसटी (जीएसटी इंटलीजेंस) के वरिष्ठ अधिकारियों से बात करना चाही लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया। फिलहाल कार्रवाईजारी है।