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110 दुकानों का प्रस्ताव अटका, स्वीकृति से बेरोजगारों को मिल सकती हैं दुकानें

Praveen tamrakar

Publish: Dec 13, 2019 10:58 AM | Updated: Dec 13, 2019 10:58 AM

Rajgarh

दुकानदारों द्वारा प्रशासन से व्यवस्थित दुकानें दिए जाने की मांग की जा रही है

राजगढ़. शहर में पिछले दिनों चली अतिक्रमण मुहिम के बाद खिलचीपुर नाके, पुराने बसस्टैंड, जयस्तंभ चौक सहित शहर के अन्य हिस्सों से दर्जनों गुमठियों ओर कच्ची दुकानों को हटाया गया है। इसके बाद इन दुकानदारों द्वारा प्रशासन से व्यवस्थित दुकानें दिए जाने की मांग की जा रही है। जहां प्रशासन द्वारा भी इस सबंध में प्रोजेक्ट तैयार कर शहर में दुकानों के निर्माण कराने की बात की जा रही है।
जबकि नगरपालिका द्वारा शहर में दो अलग-अलग स्थानों पर 110 दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव करीब दो साल से अटका हुआ है। यदि इन दुकानों का निर्माण हो जाए तो शहरवासियों को रोजगार के लिए दुकानें उपलब्ध हो सकती हैं। जबकि शहर के सौंदर्यीकरण के लिए वित्तीय संकट से जूझ रही नपा को भी इन दुकानों के आवंटन से आमदानी होगी। नगरपालिका की मानें तो वर्तमान नगरपरिषद द्वारा शहर के पुराने बसस्टैंड पर पुरा स्कूल के बाहर 92 दुकानें बनाने का प्रस्ताव पहले किया गया था।

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इसके बाद योजना समिति की बैठक में भी इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई थी। लेकिन बाद में राजस्व विभाग द्वारा पुराने बसस्टैंड की इस जमीन को नपा के हैंडओवर नहीं करने से यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। अब प्रशासन द्वारा वहां पार्क बनाने पर विचार किया जा रहा है। इधर अस्पताल रोड पर 18 दुकानें बनाने के लिए नपा ने सिर्फ प्रस्ताव तैयार कर लिया था बल्कि टेंडर के बाद ठेकेदार को वर्क आर्डर भी जारी कर काम शुरू करवा दिया था। लेकिन बाद में प्रशासन ने इस जमीन को पार्क की जमीन बताकर काम रुकवा दिया।


कई साल से नहीं बनीं सार्वजनिक दुकानें
शहर के लगभग हर क्षेत्र में अवैध गुमठियों ओर कच्ची दुकानों से अतिक्रमण जमा हुआ है। इसका प्रमुख कारण यहां व्यवस्थित दुकानों का अभाव है। दरअसल नगरपालिका या शासन के किसी भी विभाग ने करीब दस साल से कहीं भी नई दुकानों या शॉपिंग काम्पलेक्स का निर्माण नहीं किया है। जबकि निजी स्तर पर बनी दुकानें या तो गैर कर्मिशयल क्षेत्र में होती है या फिर इनकी कीमत इतनी अधिक होती है कि आम व्यक्ति ऐसी दुकानों को लेने का मन भी नहीं बना पाता।


हमने करीब 110 दुकानों का प्रस्ताव तैयार कर रखा है। लेकिन उसके निर्माण के लिए जमीन आवंटित नहीं हो पाई। यदि अब भी जमीन मिल जाए तो दुकानें बन सकती हैं।
मंगला शैलेष गुप्ता, नपाध्यक्ष

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