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किसानों से दो रुपए में खरीदकर अफसरों ने कमाए लाखों, करोड़ों की प्याज नष्ट होने में दर्शा डाली

Rajesh Kumar Vishwakarma

Publish: Dec 06, 2019 03:00 AM | Updated: Dec 05, 2019 17:24 PM

Rajgarh

-विभागीय तर्क- कोल्डस्टोरेज नहीं, कहां रखें? इसी की आड़ में अफसरों ने कमा लिए करोड़ों
-आज एक-एक प्याज के लिए मोहताज हो रही जनता, 140 किलो मिल रहे हैं मार्केट में

ब्यावरा. जिस प्याज के बढ़े हुए भाव पर देशभर में हाहाकार मची हुई असल में उसे पैदा करने वाले अन्नदाता को यह लाभ नहीं मिल पाया है। बिचौलिए और औने-पौने दाम में खरीदने वाले व्यापारियों की इसमें चांदी हुई है। प्रशासनिक अफसरों की मिलीभगत के चलते जब-जब प्याज का उत्पादन प्रदेश या जिले में बढ़ता है, तब-तब अफसरों की चांदी हो जाती है।
दरअसल, देश के विभिन्न शहरों के साथ ही ब्यावरा में भी प्याज 1०0 रुपए किलो के पार हो गया है।

 

लोगों ने प्याज को खरीदना बंद कर दिया है। इसका प्रमुख कारण बाहर से प्याज नहीं आना और स्थानीय तौर पर उपलब्ध नहीं होना माना जा रहा है। जब तक नई प्याज नहीं आती, तब तक हालात ऐसे ही रहने के आसार हैं। खास बात यह है कि जिस प्याज को महंगा बताकर मुद्दा बनाया जा रहा है असल में उस प्याज का लाभ किसानों को कतई नहीं मिल रहा। ये वो प्याज है जो बिचोलियों ने स्टोर कर रखी थी।

 

साथ ही जिन्होंने औने-पौने दाम में किसानों से खरीद ली थी और अब मनमाने दाम वसूलना चाहते हैं। इसी प्याज को शासन स्तर पर खरीदने में बीते दो सालों में जिले के अफसरों की भी चांदी हो गई। नागरिक आपूर्ति निगम, वेयर हाउस कॉर्पोरेशन, मार्केफेड, मंडी, सोसायटियां सभी ने इसमें हेरफेर की। सर्वाधिक हेर-फेर वेयर हाउस के अफसरों ने की।

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जिन व्यापारियों ने शासन स्तर पर प्याज खरीदी गई, उन्हें जिम्मेदार अफसरों ने रुपए लेकर अच्छी क्वालिटी वाली प्याज मुहैया करवा दी और बची हुई प्याज को भी खराब बताकर नष्ट करना दर्शा दिया। इसी कारण किसानों की दो से तीन रुपए किलो में बेची गई प्याज का ही भाव आज आसमान छू रहा है।


जिले में नहीं की स्टोरेज, बाहर भेजी और नष्ट दर्शाई
वर्ष-2017 में करीब 5 लाख क्वींटल से अधिक प्याज जिले में खरीदी गई, जिस पर करीब 42 करोड़ से अधिक का खर्च शासन को हुआ लेकिन फायदा न के बराबर भी नहीं हो पाया। किसानों को इसी प्याज का भाव आठ रुपए किलो के भीतर मिला। जब प्याज की मात्रा बढ़ी तो अफसरों ने उसका स्टोरेज नहीं किया, अन्य जिलों में प्याज भेजी गई। जिले में कोल्ड स्टोरेज नहीं होने और अन्य वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण प्याज को औने-पौने दाम में बाहर भेजी गई और कुछ रखी हुई खराब हो गई। हकीकत में वह खराब नहीं हई थी उसे खराब होना जिम्मेदारों ने दिखा दिया था।


जानें कैसे हुआ प्याज खरीदी में गड़बड़ी का खेल?
-522340 क्वींटल प्याज बीते सालों में खरीदी गई।
-427757440 रुपए का खर्च शासन को आया।
-50 फीसदी प्याज को नष्ट होना दर्शा दिया।
-10 प्रतिशत भी हकीकत में खराब नहीं हुई।
-90 फीसदी प्याज को छंटनी में बेचकर खराब होना दर्शा डाला।
(नोट : इसके अलावा नॉन, वेयर हाउस कॉर्पोरेशन बाकी की जानकारी देना ही नहीं चाहते?)

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वेयर हाउस कॉर्पोरेशन ने छंटनी के नाम पर व्यापारियों से एंठें लाखों
एक व्यापारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि प्याज खरीदी के दौरान एक स्लॉट में खरीदी हुई थी। जिसमें कुछ खराब प्याज भी थी लेकिन वेयर हाउस के अधिकारी ने रुपए लेकर उस प्याज में छंटनी करवा दी और बची हुई को नष्ट होना दर्शा दिया। इसी का लाभ उठाकर मोटी रकम एंठने में जिम्मेदार लगे हुए हैं। जिस पर कोई जांच जिम्मेदारों ने नहीं की। अकेले वेयर हाउस में ही लाखों रुपए की हेर-फेर बीते दो सालों में हुई है। जिस पर प्रशासन की जांच की आंच नहीं लग पाई।


अन्य विभाग ही दे पाएंगे
मेरे पास जितनी जानकारी है मैं मुहैया करवा दूंगा एक-दो दिन में, बाकी आपको अन्य विभागों से लेना होगी। जो लोग आरोप लगा रहे हैं वह गलत है, ऐसा नहीं हुआ। यहां जितना स्टोरेज था उतना रखा, बाकी जो खराब हुआ उसे नष्ट कर दिया गया।
-नरेश तोमर, प्रबंधक, वेयर हाउस कॉर्पोरेशन, ब्यावरा


दो से तीन कट्टे आ रहे बस
महज दो से तीन कट्टे प्याज रोजाना आ रही है जो लोकल की नई वाली है। बाकी बाहर से मंहगी प्याज नहीं बुलवा रहे। भाव के ऊतार-चढ़ाव के कारण कोई रिस्क नहीं लेता। इसीलिए प्याज की शॉर्टेज है, फिलहाल खेरची में 100 रुपए किलो प्याज बिक रही है।
-फुलसिंह कुशवाह, थोक सब्जी विक्रेता, ब्यावरा

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