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दो साल तीन रिमाइंडर के बाद भी नहीं आई 22 बच्चों की डीएनए रिपोर्ट

Bhanu Pratap Thakur

Publish: Dec 09, 2019 16:55 PM | Updated: Dec 09, 2019 16:55 PM

Rajgarh

देशभर में बच्चों से चोरी कराने के मामले सामने आने के बाद महिला बाल विकास द्वारा कराया जा रहा था डीएनए

राजगढ़. जिले का पचोर और बोड़ा थाना ऐसे है। जहां प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की पुलिस आए दिन चोरी के मामलों में अपराधियों की तलाश करने आती रहती है। इन थानों में जहां कई युवा चोरी के मामलों से जुड़े है। वहीं करीब आधा दर्जन गांव ऐसे भी है। जिनमें बच्चों के माध्यम से चोरी कराने का काम कराया जाता है।

पिछले दिनों मिले ऐसे कई सबूतों के बाद कहीं न कहीं यह देखने को मिला कि इन गांवों में बाहर से बच्चे लाकर उन्हें चोरी सिखाते हुए आपराधिक गतिविधियों से जोड़ दिया जाता है।

मामला उस समय और भी साफ हो गया जब खुद एक बच्चा गांव से भागकर आया और उसने पुलिस के सामने अपने बयान देते हुए बताया कि एक महिला उसे चोरी की ट्रेनिंग दे रही थी। बच्चे की गवाई को पहले अनसुना किया गया। लेकिन जब मामला मीडिया में आया तो कोतवाली में यह मामला दर्ज किया गया।

मामले के उजागर होने के बाद चाइल्ड लाइन और अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से कुछ मामलों की जांच की गई। जिसमें यह देखने को मिला कि जो लोग बच्चों को अपना माता-पिता बताते है वे उनके माता पिता नहीं है। स्वयंसेवी संस्थाओं की जांच को पुख्ता करने के लिए महिला बाल विकास के माध्यम से ऐसे 22 बच्चों का डीएनए टेस्ट कराने के लिए रिपोर्ट हैदराबाद भेजी गई।

लेकिन दो साल पहले भेजी गई इस रिपोर्ट की जांच आज तक नहीं हो सकी। इसके लिए विभाग ने तीन बार रिमाइंडर भी किए है।

अब डीएनए के लिए ही कर दिया जाता है मना-
बच्चों के डीएनए की रिपोर्ट नहीं आई और अब जब नए मामलों में डीएनए टेस्ट की बात कही जाती है तो विभाग यह कहकर टाल जाता है कि रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है जिसके कारण अब डीएनए टेस्ट के लिए कोई रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही है।

यह है संदेह के मामले-
प्रमाण पत्र निकले झूठे-
छत्तीसगढ़ पुलिस पिछले वर्षो में एक लडक़ा और लडक़ी को पचोर लेकर आई थी। यहां बच्चों को कडिया गांव की एक महिला ने अपना बताया। महिला की उम्र खासी थी। जब जांच की गई तो प्रमाण पत्र झूठे पाए गए।

फर्जी निकली माता पिता की समग्र आईडी-
बिलासपुर से १३ साल के बालक को जब संदिग्ध अवस्था में पाया गया तो पुलिस उसे लेकर कडिया गांव पहुंची। यहां जो माता पिता ने दस्तावेज तैयार किए थे। उनमें समग्र आईडी दिखाई गई थी। जांच में वह फर्जी मिले।

भोपाल से लाया गया बच्चा-
जाटखेड़ी के नाम से एक बच्चे को भोपाल से राजगढ़ छोड़ा गया। इसकी जब जांच की गई तो बच्चे पर हक जताने वाला व्यक्ति वहां नहीं मिला और न ही वहां बच्चे को किसी ने पहचाना।

मां बनकर पहुंची अविवाहिता-
जयपुर से एक 12 वर्षीय बच्चे के पकड़े जाने के बाद एक महिला उसे अपना बेटा बताते हुए लेने पहुंची। जब उसकी जांच की गई तो महिला अविवाहित थी। लेकिन बाद में बच्चा उसी को दे दिया गया।

अनुबंध करके लाए थे बच्चे को-
दिल्ली में एक सीसीटीवी में बच्चा शादी समारोह में एक बैग उठाते हुए नजर आया। जब बच्चे की तलाश की गई तो पता लगा कि वह गुलखेड़ी पचोर थाने का है। पुलिस ने जब जांच की तो दो लाख रुपए के अनुबंध पर बच्चे को लाया गया था।

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लगातार इस तरह की शिकायतों के बाद जिले से २२ बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया जाए। इसके लिए हैदराबाद रिपोर्ट भेजी गई। दो साल के बाद भी अभी तक जांच रिपोर्ट वापस नहीं आई। हम इसके लिए लगातार रिमाइंडर करते रहते है।
- श्यामबाबू खरे, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी राजगढ़


ऐसे मामलों में आगामी कार्रवाई जरूर की जानी चाहिए। मामला बाल आयोग के ध्यान में आया है। इस पर बड़े स्तर पर काम किया जाएगा।
- रजनीकांत यादव, सदस्य राष्ट्रीय बाल आयोग

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