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फॉस्ट टैक प्रोजेक्ट में शामिल हुआ दूधी रेल्वे ब्रिज, हर दिन की मॉनीटरिंग कर रहे डीआरएम

Rajesh Kumar Vishwakarma

Publish: Oct 16, 2019 18:49 PM | Updated: Oct 16, 2019 18:49 PM

Rajgarh

-अब पूरा भर पाएगा मोहनपुरा डैम
-मक्सी-रुठियाई रेल्वे ट्रेक के दूधी पुल को आठ किमी डायवर्ट कर बनाया जा रहा, पानी में भी कर रहे काम, मोहनपुरा डैम की दिक्कतें कम होंगी
-डीआरएम बोले- नये स्ट्रक्चर के हिसाब से शुरू हुआकाम, हाईट बढ़ेगी, डायवर्शन भी आठ किमी का

 

राजेश विश्वकर्मा
ब्यावरा. मक्सी-रुठियाई रेल्वे ट्रेक के जिस दूधी ब्रिज की ऊंचाई कम होने से मोहनपुरा डेम में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचाया जा सक रहाथा अब वह ब्रिज नये सिरे से बन रहा है। करीब तीन साल से अटके उक्त प्रोजेक्ट को अब रेल्वे ने अपने फॉस्ट टैक प्रोजेक्ट में शामिल किया है। कुछ माह पहले से ही रेल्वे ने इसका काम शुरू करवा दिया और हर दिन की मॉनीटरिंग डीआरएम खुद कर रहे हैं, प्रत्येक दिन के काम की प्रोग्रेस रिपोर्ट रेल्वे को पहुंच रही है।


दरअसल, मंगलवार को ब्यावरा रेल्वे स्टेशन पर अपनी टीम के साथ पहुंचे डीआरएम उदय बोरवानकर ने रेल्वे के विभिन्न प्रोजेक्ट्स से संबंधी बातें पत्रिका से साझा की। उन्होंने कहा कि पहले कुछभूमि-अधिग्रहण के मामलों को लेकर उक्तप्रोजेक्ट अटका हुआ था, लेकिन अब तेजी से काम शुरू कर दिया गया है।

 

फिलहाल बेसमेंट का काम शुरू हुआ है, इसलिए कोई तय समयसीमा इसकी नहीं है। फिरबी रेल्वे की कोशिश है कि जल्द से जल्द यह पूरा हो। दूधी में मौजूदा रेल्वे ट्रेक से आठ किलोमीटर के डायवर्शन पर उक्त ब्रिज बनेगा, जिसकी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अब महज काम शुरू होना, शिफ्ट में हो रहे काम की कोई लागत मूल्य भी फिलहाल तय नहीं हुआहै। उल्लेखनीय है कि उक्तमौजूदा रेल्वे ब्रिज के कारण मोहनपुरा डेम को पूरा नहीं भरा जा सक रहा था।

ज्यादा बारिश हो जाने या पानी एकत्रित होने पर गेट खोलकर पानी निकालना पड़ता है, अन्यथा पूरा ब्रिज डूब जाए। इसके अलावा मोहनपुरा डेम में पर्याप्त पानी रहने की स्थिति में दूधी रेल्वे ब्रिज महज पांच से छह फीट ही खाली रह जाता है, जिसमें ट्रेन को पेट्रोलिंग कर निकाला जाता है। अब नया ब्रिज बन जाने से यह दिक्कत खत्म हो जाएगी।


इलेक्ट्रिफाई सिंगल बनेगा नया रेल्वे ब्रिज
करीब आठ से 10 किलोमीटर के डायवर्शन पर बनने वाला नया रेल्वे ब्रिज सिंगल और इलेक्ट्रिफाईहोगा। यानि मक्सी-विजयपुर इलेक्ट्रिफिकेशन से उसे सीधा जोड़ा जाएगा। इसके अलावा उक्त ब्रिज की ऊंचाई भी मौजूदा ब्रिज से अधिक होगी। ब्रिज बन जाने के कारण न सिर्फ डेम में पानी पर्याप्त रह पाएगा बल्कि ट्रेनें भी अपनी नीयत रतार से निकल पाएंगी। जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग द्वारा करीब तीन सौ करोड़ रुपए इसके लिएराज्य शासन के माध्यम से रेल्वे को दे दिए थे लेकिन डैम के निर्माण के दौरान से ही रेल्वे ने इसमें लेटलतीफी की और काम समय पर पूरा नहीं हो पाया, लेकिन अब फॉस्ट टैक प्रोजेक्ट में शामिल हो जाने से काम की रतार बढ़ी है।

डीआरएम उदय बोरवानकर से पत्रिका की विशेष बात-चीत
सवाल- सर, लंबे समय से यह प्रोजेक्ट शुरू होना था फिर इतना समय क्यों लगा?
जवाब : शासन स्तर पर कुछभूूमि अधिग्रहण के मामले थे जिनमें थोड़ा वक्त लगा, लेकिन अब काम शुरू हो गया है।
सवाल- कब तक यह पूरा हो पाएगा और किस तरह का काम होगा?
जवाब : यह रेल्वे के विशेष प्रोजेक्ट में है जिसकी हम हर दिन मॉनीटरिंग कर रहे हैं, फिलहाल कोई टाइम लाइन फिक्स नहीं है।
सवाल- रामगंजमंडी रेल लाइन किस स्टेज में है, मप्र में इसकी रफ्तार क्यों नहीं बढ़ पा रही, क्या कारण है?
जवाब : बहुत ज्यादा रफ्तार नहीं कह सकते, कुछ प्रशासनिक मामले हैं जिनमें काम किए जाना है। फिलहाल कुछस्पष्ट नहीं कहा जा सकता।