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आवक कम, किसानों के पास भी लगभग खत्म, अब 4400 पार पहुंची सोयाबीन

Rajesh Kumar Vishwakarma

Publish: Dec 14, 2019 17:17 PM | Updated: Dec 14, 2019 17:17 PM

Rajgarh

- बिचौलियों का खेल या कृषि बाजार का कमाल?
- हर बार ऐसे ही ठगे जाते हैं किसान, पहले उत्पादन में निराशा हाथ लगी फिर इस भाव में मारी

ब्यावरा. अतिवृष्टि के कारण कम हुए सोयाबीन के पैदावार का नुकसान उठा रहे अन्नदाता को भाव ने भी रुला दिया है। दिवाली के आस-पास मंडियों में उपज लेकर पहुंचे किसानों को औने-पौने दाम ही मिल पाए। अब आवक आधी से भी कम हो गई और किसानों के पास लगभग बीत चुकी है, तब जाकर सोयाबीन का भाव 4400 के पार पहुंच गया है।

इसका सीधा सा मतलब निकाला जा सकता है कि बिचौलियों और दलालों के दौर में किसानों को उपज के सही दाम मिल ही नहीं पाते हैं। हर बार उस वक्त अचानक भाव बढ़ जाते हैं जब किसानों के पास उपज होती ही नहीं है। शुरुआत में सोयाबीन का भाव 23०० से 300० रुपए प्रति क्वींटल तक रहा।

उस दौरान गीली और दागी सोयाबीन होने के कारण किसानों को मजबूरन बेचना पड़ा। खास बात यह है कि उस दौरान अच्छी क्वालिटी की सोयाबीन भी तीन हजार के पार नहीं पहुंच पाई। इससे किसानों को दोहरी मार झेलना पड़ी है। प्रति बीघा में किसानों को लाग मूल्य भी नहीं निकला है। अब आम तौर पर हुई बढ़ी हुई आवक (करीब 10 से 15 हजार क्वींटल) से घटकर महज पांच से छह हजार क्वींटल प्रतिदिन रह गई है।

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बीमा मिला नहीं, मुआवजा भी नाम का
पहले बारिश फिर भाव की मार झेल रहे किसान शासन स्तर पर भी कदम-कदम पर छले गए हैं। उन्हें खराब उपज का बीमा अभी तक नहीं मिल पाया वहीं, राज्य शासन की ओर से दिया गया बीमा भी नाकाफी है। नुकसान का 25 प्रतिशत बीमा उक्त उपज का लागत भी नहीं दे पा रहा है। इससे किसान हर तरह से त्रस्त हो चुके हैं। अब उन्हें यूरिया के लिए परेशान होना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर गेहूं की पैदावार पर पडऩा तय है। इससे हर तरह से किसान ही परेशान है।

ब्यावरा मंडी भाव
सोयाबीन 2750-4425
गेहूं 1997-2145
चना 3510-3755
मक्का 1560-2230
धनिया 4170-6480
मसूर 3820-4530
(नोट : मंडी के अनुसार)

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बड़ा सवाल : कोई नहीं करता भाव की बात?
तमाम प्रकार के राजनीतिक दल, संगठन और खुद को किसानों की हितैषी बताने वाली सरकारें भी कभी उपज के दाम को लेकर बात नहीं करते। पीएम खेती को लाभ का धंधा बनाने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत में उन्हें हमेशा ही उनकी ही उपज के दाम सही नहीं मिल पाते।

वहीं, अन्य राजनीतिक दल तो तमाम प्रकार के चुनावी सब्ज बाग किसानों को दिखाते हैं वे भी पूरे नहीं हो पाते। ऐसे में सिर्फ चुनावी घोषणाओं और सभाओं को संबोधित करने तक ही किसान हितैषी योजनाएं रह गई हैं।

हर तरह से किसानों के साथ छलावा
फसल के भाव हो, मुआवजा हो या बीमा या शासन की बोनस राशि हर तरह से किसान के हिस्से में सिर्फ परेशानी ही आई है। हर तरह से उनके साथ छलावा ही होता आया है।
- कुमैरसिंह सौंधिया, संभागीय अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, ब्यावरा (राजगढ़)

आवक में कटौती हुई है
भाव पहले से बेहतर हुए हैं लेकिन लोगों के पास अब माल (उपज) बचा ही नहीं है। इसीलिए आवक में भी कमी आई है। अब आव बढऩे के आसार बेहद कम है।
- लक्ष्मीनारायण दांगी, सचिव, कृषि उपज मंडी समिति, ब्यावरा

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