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इलेक्ट्रिक इंजन से पचोर-ब्यावरा आने लगीं मालगाड़ी,84 किमी का काम बाकी

Praveen tamrakar

Publish: Nov 15, 2019 04:16 AM | Updated: Nov 14, 2019 23:28 PM

Rajgarh

करीब महीनेभर पहले हुए फाइनल ट्रायल के बाद अब ब्यावरा, पचोर तक आने वाली मालगाडिय़ां इलेक्ट्रिक पावर से संचालित हो रही हैं

ब्यावरा. करीब महीनेभर पहले हुए फाइनल ट्रायल के बाद अब ब्यावरा, पचोर तक आने वाली मालगाडिय़ां इलेक्ट्रिक पावर से संचालित हो रही हैं। हालांकि पचोर से आगे काम अधूरा होने से वहां डीजल वाला ही इंजन काम करता है। फिलहाल 188 किलोमीटर की मक्सी-विजयपुर इलेक्ट्रिफिकेशन में से 104 किमी का काम हो गया, 84 का शेष है।
पचोर तक रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का निरीक्षण हो जाने और इलेक्ट्रिक पॉवर का ट्रॉयल हो जाने के बाद अब आगे का बचा काम जोरों पर है। रोजाना पांच से छह घंटे की शिफ्ट में ब्लॉक लेकर काम किया जा रहा है। इसके तहत पचोर से आगे मास इरेक्शन (पोल लगाना), फाउंडेशन और वायरिंग का काम किया जा रहा है।

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दिन-रात में राइट कंपनी की पैटी कॉन्ट्रेक्टर केईसी द्वारा काम किया जा रहा है। पहले पोलका काम बचा था, जिसे अब पूरा किया जा रहा है। हालांकि पचोर से ब्यावरा विजयपुर तक काम पूरा हो चुका है, कहीं कोई ट्रॉयल की गुंजाइश नहीं है। ऐसे में जनवरी-2020 तक बचे हुए काम को पूरा करने का लक्ष्य केईसी ने रखा है।
...और पीएम का फास्ट ट्रैक प्रोजेक्ट अधर में
इधर, प्रधानमंत्री के फास्ट ट्रैक प्रोजेक्ट्स में शामिल हुए रामगंजमंडी-भोपाल लाइन का मामला फिलहाल अधर में है। भले ही पीएम ऑफिस से इसे विशेष प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया गया हो लेकिन मप्र की सीमा में इसका कोई काम ही रेलवे शुरू नहीं कर पा रहा है। राजस्थान की सीमा तक तमाम प्रकार का काम किया जा चुका है, ट्रेनें रामगंजमंडी से झालावाड़ तक आने-जाने भी लगीं, लेकिन मप्र की सीमा में कहीं भी ट्रेन की पटरियों के फाउंडेशन तक की शुरुआत नहीं हो सकी है।

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इलेक्ट्रिफाई से इंजन बदलने का समय बचेगा
मक्सा-रुठियाई रेल खंड बी उससे जुड़े भोपाल-उज्जैन, गुना-ग्वालियर, कोटा-बीना रेल खंड के साथ पूरी तरह इलेक्ट्रिफाई हो जाएगा। इससे न सिर्फ बार-बार पावर बदलने की फजीहत होगी वहीं, ट्रेनों में करीब 45 से ५० मिनट प्रत्येक इलेक्ट्रिफाई वाले स्टेशन पर समय की बचत होगी। इससे ट्रेनों के रनिंग शेड््यूल में बदलाव होगा और यात्रियों को सीधा लाभ होगा। साथ ही ट्रेनों की रफ्तार भी आम दिनों से अधिक हो जाएगी और पैसेंजर के साथ ही मालगाडिय़ों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी।
&फिलहाल इलेक्ट्रिक पॉवर की माल गाडिय़ां ब्यावरा और पचोर तक ही आने लगी हैं। पैसेंजर में पॉवर बदलने की झंझट के कारण फिलहाल डीजल का ही चल रहा है। अगले साल से काम पूरा होने पर दौड़ेंगी बिजली वाली गाडिय़ां।
पीएस मीना, स्टेशन मास्टर, ब्यावरा

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