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ऊर्जा मंत्री के गृह जिले में रात में ठिठुरने को मजबूर अन्नदाता, 10 घंटे की बिजली में भी दिन की बजाए रात का शेड्यूल

Rajesh Kumar Vishwakarma

Publish: Jan 14, 2020 18:19 PM | Updated: Jan 14, 2020 18:41 PM

Rajgarh

- बिजली कंपनी का किसानों के लिए अजीब शेड्यूल
- रात में 10 से 02 और फिर 02 से सुबह 06 बजे तक ठिठुर रहे किसान, बिजली कंपनी का अजीब सप्लाई शेड्यूल...

ब्यावरा. मप्र शासन के ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह गृह जिले में किसान बिजली के मनमाने शेड्यूल के चलते ठिठुरने को मजबूर हैं। कपकपा देने वाली छंट में आधी रात को किसान सिंचाई करने को मजबूर हैं। 10 घंटे के बिजली शेल्यूल को कंपनी ने दिन और रात में बांट रखा है। इससे किसानों को रात मे भी ठंड में परेशान होना पड़ता है।

दरअसल, शासन की ओर से 10 घंटे की बिजली सप्लाई का नियम है। जिसमे से बिजली कंपनी सात दिन सुबह 6 से 12 और सात दिन 12 से 6 बजे के हिसाब से फीडर वाइज बिजली चालू करती है। बचे हुए चार घंटे रात में 10 से 2 और 2 से 6 बजे तक दी जाती है। इससे 10 घंटे की सीमित समयावधि में सिंचाई की पूर्ति के लिए किसानों को रात में भी ठिठुरना पड़ता है।

यदि बिजली कंपनी दिन में ही शेड्यलू के हिसाब से बिजली की पूर्ति कर दे तो किसानों की परेशानी कुछ हद तक कम हो सकती है लेकिन सालों से मौजूद इस शेड्यूल के हिसाब से ही व्यवस्था है। इसी के तहत किसान सिंचाई करते हैं लेकिन कई बार इन छह और चार घंटे में भी बिजली पर्याप्त नहीं मिल पाती, जिससे किसानों का ठिठुरना किसी काम नहीं आता।

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बिजली कंपनी का तर्क, लोड मैनेज करने के लिए शेड्यूल
पर्याप्त बारिश और तमाम प्रकार से बिजली पर्याप्त होने के बावजूद सिंचाई के दौरान बिजली कंपनी का तर्क होता है कि उन्हें लोड मैनेज करना होता है।

यानि एक ही समय में 10-10 घंटे लगातार बिजली नहीं दी जा सकती। साथ ही 24 घंटे में ही तमाम फीडर मैनेज करना होता है। एक सब-स्टेशन पर जितने फीडर होते हैं उन्हें इसी तरह से शेड्यूल में ही मैनेज करना होता है। इसी कारण हर जगह ऐसी ही व्यवस्था है।

शाम का टैरिफ महंगा, इसलिए पम्प पर लागू नहीं
सूत्रों के अनुसार अन्य कंपनियों से खरीदी जाने वाली बिजली की दरें शाम के समय बढ़ जाती है। टैरिफ प्लॉन की तर्ज पर यहां बिजली की सप्लाई होती है।

शाम के समय इन टैरिफ की रेट Óयादा हो जाती है। पिक हॉवर (व्यस्ततम समय) के दौरान तमाम निजी कंपनियों, इंडस्ट्रीज और उद्योगों से बिजली कंपनी का टॉय अप भी होता है कि इस समय बिजली कट नहीं होना चाहिए। इस लोड को बचाने के लिए भी शाम को 6 से 10 के बीच पम्प कनेक्शन की सप्लाई नहीं दी जाती।

फैक्ट-फाइल
- 2.5 लाख घरेलू कनेक्शन जिले में।
- 82, 000 पम्प कनेक्शन।
- 2.52 लाख से अधिक पंजीकृत किसान।
- 10 घंटे बिजली का है फिलहाल नियम।
- 06 घंटे दिन, 04 रात में दे रहे।
(नोट : बिजली कंपनी से मिली जानकारी के अनुसार)

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24 घंटे सप्लाई के लिए चाहिए दो गुना इन्फास्ट्रक्चर
बिजली कंपनी के अधिकारियों की मानें तो 10 घंटे की सप्लाई को लेकर तमाम प्रकार का लोड देखना होता है। रही बात 24 घंटे पम्प कनेक्शन सप्लाई की तो इसके लिए दो गुना इन्फास्ट्रक्चर चाहिए होता है।

फिलहाल सरकार ने प्रपोजल मांगा है कि किस तरह का सेट अप 12-12 घंटे की सप्लाई के लिए होता है। इसे लेकर प्लॉन भेजा भी गया है। हालांकि 12-12 घंटे सप्लाई के लिए पॉवर ट्रांसफॉर्मर बढ़ाकर भी मैनेज किया जा सकता है। साथ ही लोड को बांटकर भी ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं।

किसान बोले- ठंड हो या गर्मी हमारे लिए कोई नियम नहीं
बिजली कंपनी जैसे बिजली देती है उसी हिसाब से हम लोग सिंचाई करते हैं। किसानों के लिए कोई अलग से नियम नहीं होता। ठंड हो या सर्दी हमें तो काम करना ही है।
- विष्णु पाटीदार, किसान, निवासी पीपल्या कुल्मी

10 घंटे भी बिजली कंपनी वाले कटौती कर देते हैं। उसमें भी हमें मैनेज करना होता है। रात में कई बार पूरे चार घंटे बिजली नहीं मिलती, जिससे हमारा ठिठुरना बेकार जाता है।
- संजय यादव, किसान, निवासी ब्यावरा

लोड मैनेज करना होता है
फिलहाल 12 या 24 घंटे के हिसाब का इन्फ्रॉस्ट्रक्चर नहीं है। हमें लोड मैनेज करने के लिए और सब-स्टेशनों की पॉवर सप्लाय एडजस्ट कर के ही किसानों तक पहुंचाना होती है। 10 घंटे यदि लगातार एक फीडर में दे दें तो बचे हुए को कैसे मैनेज कर पाएंगे? इसीलिए फिलहाल यह व्यवस्था बनाई गई है।
- आरके सिंह, एसई, एमपीईबी, राजगढ़