स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

पहले राजगढ़ रेफर की, फिर वहां से भोपाल भेजा, प्रसूता की रास्ते में मौत

Rajesh Kumar Vishwakarma

Publish: Aug 13, 2019 16:42 PM | Updated: Aug 13, 2019 16:42 PM

Rajgarh

-परिजनों का आरोप पहले राजगढ़ भेजा, वहां उपचार नहीं मिला, फिर भोपाल भेज दिया, 108 वाला चार घंटे परेशान करता रहा

ब्यावरा.मंगलवार को फिर स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी और लापरवाही से एक प्रसूता ने दम तोड़ दिया। रेफर करने के फेर में फंसी प्रसूता की भोपाल ले जाने में ही मौत हो गई। प्रसूता को लेकर रवाना हुई संजीवनी-108 की अनदेखी इसमें सामने आई है। चालक और ईएमटी की लापरवाही से चार घंटे तक प्रसूता राजगढ़ से नरसिंहगढ़ के बीच ही रही और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
दरअसल, ब्यावरा से रेफर की गई एक प्रसूता की मौत मंगलवार सुबह उस वक्त हो गई जब उसे पहले राजगढ़ भेजा गया और वहां से भोपाल। उपचार के अभाव में रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार संगीतबाई पति हेमराज प्रजापति (२४) निवासी लसूल्डिया महाराजा की मौत भोपाल ले जाते समय हो गई। उन्हें सबसे पहले आमल्या हाट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था, वहां दो दिन रखने के बाद सोमवार रात करीब ८.२० बजे उसे ब्यावरा लाया गया। यहां डिलीवरी के बाद बच्चे का वजन कम होने से बच्चे को राजगढ़ भेज दिया गया। बाद में रात १० बजे प्रसूता को भी जिला चिकित्सालय भेज दिया गया लेकिन रात ३ बजे फिर से उसे ब्लीडिंग होने लगी और तबीयत बिगड़ गई। इस पर डॉक्टर्स ने उसे फिर रात ३.५० बजे रेफर कर दिया।

परिजनों का आरोप- 108 समय पर पहुचंा देती तो बच जाती जान
नवविवाहिता प्रसूता संगीताबाई के परित हेमराज ने आरोप लगाया कि पहले हमें अस्पताल वालों ने मदद नहीं की, ब्यावरा से भेजे जाने के बाद राजगढ़ में किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। फिर आधी रात को दोबारा ब्लीडिंग हुई तो उन्होंने फिर भोपाल रेफर कर दिया गया। 108 वाला फोन करने के 40 से 50 मिनट बाद आया, इसके बाद हमें ब्यावरा ले जाकर प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगाने लगा, बोला कि यहीं दिखा लो ठीक हो जाएगा? हमने खूब मन्नतें की लेकिन उसने नहीं मानी, फिर हमारे परिजन आए तब वह भोपाल की ओर बढ़ा लेकिन रफ्तार धीमी रखी। हमने बोला तो कहने लगा कि इससे ज्यादा नहीं चलेगी गाड़ी। चालक यदि समय पर पहुंचा देता तो प्रसूता की जान बच जाती। उसे इमरजेंसी मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूत थी। सुबह छह बजे वे नरसिंहगढ़ पहुंचे, लेकिन तब तक महिला ने दम तोड़ दिया।
...और अजीब फरमान, फिर भी रेफर किया
एक चौंका देने वाले फरमान इन दिनों जिला चिकित्सालय में दिया गया है जिसमें कोई भी कॉम्प्लिकेटेड केस राजगढ़ न भेजने के निर्देश सिविल सर्जन ने दिए हैं। यानी जिले के किसी भी अस्पताल में कितनी ही इमरजेंसी हो लेकिन उन्हें राजगढ़ न भेजा जाए? इसके पीछे प्रबंधन का तर्क है कि स्टॉफ की दिकक्त है? और हर विवादित केस को भोपाल, इंदौर भेजा जाना भी संभव नहीं है। इस मामले में भी यही हुआ रेफर का मना करने के बावजूद ब्यावरा से उसे राजगढ़ भेज दिया गया और केस बिगड़ गया। इधर, ड्यूटी डॉक्टर्स का कहना है कि प्रसूता का पूरा उपचार करने के बाद हमने बच्चे के पास भेजा था न की क्रिटिकल कंडिशन में।

नव-विवाहिता थी मृतका, बच्चा एनबीएसयू में, तहसीलदार-पुलिस पहुंची
जानकारी के अनुसार एक साल पहले ही संगीता की शादी हुई थी वह नवविवाहिता थी। उसका पहला बच्चा है जो कि वर्तमान में एनबीएसयू राजगढ़ में भर्ती है। मंगलवार सुबह डॉक्टर्स की पैनल द्वारा पोस्टमॉर्टम किया जाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इससे पहले प्रभारी तहसीलदार सौरभ वर्मा मौके पर पहुंचे और पंचनामा तैयार किया। इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की है। हालांकि मामला मलावर थाने का होने से केस जोरी पर कायमी कर वहां भेज दिया गया।
प्रसूता को ट्रीटमेंट के बाद ही भेजा था
पूरे ट्रीटमेंट के बाद ही उसे रेफर किया गया था। डिलीवरी कॉम्प्लिकेटेड थी, परिजन दो दिन से उसे आमाल्या में भर्ती किए हुए थे। यहां आने पर हमने डिलवरी करवाई। बच्चे में वजन कम था तो हमने राजगढ़ रेफर किया था, बाद में प्रसूता को भी हमने स्टेबल करके ही भेजा, यहां केस नहीं बिगड़ा।
-डॉ. आर. के. जैन, महिला रोग विशेषज्ञ, सिविल अस्पताल, ब्यावरा
हमारी गलती नहीं है
केस की शिकायत के बाद मैंने पूरा ब्यौरा निकलवाया है, हमारे स्टॉफ की कोई गलती नहीं है। समय पर गाड़़ी पहुंच गई थी, उल्टा उनके परिजनों ने पहले राजगढ़ और फिर ब्यावरा में गाड़ी रोके रखी। ईएमटी ने खख्ती से बोला तब वे ब्यावरा से बढ़े।
-राघवेंद्र शर्मा, जिला अधिकारी, संजीवनी-108, राजगढ़
केस स्टेबल था, फिर भी जिसकी गलती होगी कार्रवा
ई करेंगे
पहले प्रसूता को ब्यावरा में स्टेबल किया गया, फिर जिला चिकित्सालय में। डॉक्टर्स ने पूरे प्रयास किए, ब्लड भी चढ़ाया। यदि 108 वाले की गलती है तो मैं दिखवाता हूं कार्रवाई होगी। जहां तक रेफर केस नहीं भेजने की बात है तो हम वह आदेश निरस्त कर देंगे।
-डॉ. के. के. श्रीवास्तव, सीएमएचओ, राजगढ़
000