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जीएसटी लागू होने के बाद तीन गुना बढ़ गया वाणिज्यिक कर विभाग का रेवेन्यू

Rajesh Kumar Vishwakarma

Publish: Jan 17, 2020 11:19 AM | Updated: Jan 17, 2020 11:19 AM

Rajgarh

-गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स
-ईवे-बिल के साथ ही जीएसटीआर के माध्यम से होने वाले रिटर्न के बाद रेवेन्यू में हुई बढ़ोतरी

ब्यावरा. करीब ढाई साल पहले 01 जुलाई 2019 से लागू हुए गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) मे भले ही रिटर्न फाइल करने को लेकर तमाम तरह की दिक्कतें आ रही हों लेकिन इसने वाणिज्यिक कर विभाग का रेवेन्यू तीन गुना तक बढ़ा दिया है। हर स्तर की टैक्स चोरी पर अंकुश लगने के बाद तीन गुना तक टैक्स शासन के खाते में जमा होने लगा है।


दरअसल, अलग-अलग स्लैब में तय की गई जीएसटी की दरों के हिसाब से यदि आंकड़े निकाले जाएं तो शासन को बड़ा फायदा इसके लागू होने से हुआ है। अकेले राजगढ़ जिले का 25 करोड़ तक सिमट कर रह जाने वाला रेवेन्यू 80 करोड़ के आस-पास पहुंच गया है। साथ ही टैक्स चोरी पर भी अंकुश लगा है। हालांकि रेवेन्यू बढऩे का यह आंकड़ा फिलहाल राजगढ़ जिले का ही है। बाकी अन्य जिलों और प्रदेश में जीएसटी के हाल अलग हैं। अन्य जगह रिटर्न फाइल करने के साथ ही अन्य जटिलताएं भी इसमें आ रही है। वेबसाइड की दिक्कतें आम हैं, जिसे हर माह व्यापारी फेस करते हैं।

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जिले के रेवेन्यू पर एक नजर
वर्ष रेवेन्यू
2016-17 25 करोड़
2017-18 80 करोड़
2018-19 82 करोड़
(नोट :वाणिजि्यक कर विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार)


सोयाबीन-धनिये में एक प्रतिशत की बचत
जिले की मुख्य उपज में शामिल सोयाबीन और धनिये में तमाम प्रकार के टैक्स पहले लगते थे, इनमें 5 प्रतिशत वैट, 1 प्रतिशत एंट्री टैक्स लगता था। छह प्रतिशत टैक्स देने के साथ ही अन्य टैक्स अन्य राज्यों पर भेजने पर देना होता था। सी-फॉर्म के माध्यम से 2 प्रतिशत इसके बिना 5 प्रतिशत तक लगता था। साथ ही अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग परमिट भी वाहन के बनवाने पड़ते थे। अब सीधे 5 प्रतिशत लगता है। फिर ई-वे बिल के आधार पर देशभर में माल ले जाया जा सकता है।

मोबाइल, अन्य जरूरी सामग्री पर आधी बचत
वाणिजि्यक कर विभाग के अधिकारियों के अनुसार जीएसटी के तय स्लैब में यदि देखा जाए तो जरूरी सामग्री पर 12 प्रतिशत टैक्स तय किया गया है। इसके तहत यदि हम जरूरी सामान में मोबाइल खरीदते हैं तो उस पर 12 प्रतिशत जीएसटी देना होता है। लेकिन इससे पहले जब जीएसटी लागू नहीं हुआ था तो 14 प्रतिशत वैट टैक्स, 12.5 एक्साइज ड्यूटी, 02 प्रतिशत सेंट्रल सेल्स टैक्स, 02 प्रतिशत एडीशनल टैक्स यानि कुल मिलाकर 30 से 32 प्रतिशत टैक्स लगता था, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ता था। यानि सीधे 50 प्रतिशत फायदा हुआ।

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...और टैक्स चोरी पर अंकुश : दो या तीन प्रतिशत के लिए रिस्क नहीं लेते
यह सारी व्यवस्था ऑनलाइन हो जाने, वेबसाइड पर ही रिटर्न फाइल करने से टैक्स चोरी पर भी कुछ हद तक अंकुश लगा है। दो या तीन प्रतिशत टैक्स चोरी के लिए कोई भी फर्म या व्यापारी रिस्क नहीं लेता। इसी कारण यह इजाफा रेवेन्यू में हुआ है। हालांकि बिना जीएसटी और तमाम टैक्स के भी काम हो रहे हैं, जिसमें लाखों, करोड़ों रुपए की चोरी जारी है। इसके पीछे प्रमुख कारण संसाधनों और स्टॉफ का अभाव है।


रेवेन्यू में हुई है बढ़ोतरी
विभाग के रेवेन्यू में तीन गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा टैक्स चोरी में भी कटौती हुई है। हालांकिरिटर्न की दिक्कत सर्वाधिक है फिर भी अन्य जिले से रेवेन्यू की स्थिति में सुधार है, जिसका ऑनलाइन रिकॉर्ड भी है।
-सतेंद्र चौरसिया, जिला वाणिजि्यक कर अधिकारी, राजगढ़

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