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हो जाएं सावधान! मिलावटी मिठाई बिगाड़ सकती है सेहत

Praveen tamrakar

Publish: Oct 17, 2019 04:23 AM | Updated: Oct 16, 2019 23:42 PM

Rajgarh

मिठाई की मांग बढऩे के साथ ही उसमें मिलावट की संभावना भी बढ़ जाती है

राजगढ़. आने वाले दिनों में हर दिन नया त्योहार होगा, इन त्योहारों मैं मिठाई का अपना एक अलग ही महत्व है। यही कारण है की मिठाई की मांग बढऩे के साथ ही उसमें मिलावट की संभावना भी बढ़ जाती है, क्योंकि राजगढ़ की नहीं बल्कि ग्वालियर और इंदौर की तरफ से बड़ी मात्रा में मावा मंगाया जाता है। इसमें कई बार मिलावटी और केमिकल युक्त मावा भेज दिया जाता है।

इसी खाद्य सामग्री से कुछ दुकानदार मिठाई बनाते हैं। जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। ऐसा नहीं है कि मिलावटी सामग्री वाला मावा जिले में सभी जगह आता है, लेकिन इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता कि कुछ दुकानदार इस तरह के मावे का उपयोग न करते हों। पिछले वर्षों में ब्यावरा में ग्वालियर से इंदौर की तरफ जा रहे मावे की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। हालांकि बाद में यह पता नहीं चल पाया कि यह खेप कहां से और किसके यहां भिजवाई जा रही थी। लेकिन बताया जाता है कि उसमें बड़ी मात्रा में मिलावट थी। इसके बाद से ही खाद्य विभाग त्योहारों के समय सक्रिय रहता है, लेकिन अभी तक ऐसी कोई जांच शुरू नहीं की गई है। चेकिंग ट्रेन या बसों में भी नहीं हो रही है। जबकि जिले से आयात, निर्यात ही नहीं बल्कि जिले में मावे की खेप आना शुरू हो गई है।

तीन पर एफ आइआर और सात सैंपल फेल
पिछले महीनों में पूरे प्रदेश में खाद्य सामग्रियां और मिलावटी दूध से बनी सामग्रियों की जांच कराई गई। इसमें जिले से सात सैंपल फेल हुए थे। इनमें तीन के खिलाफ एफ आइआर भी दर्ज कराई गई। लेकिन लगातार मिलावट के मामले सामने आने के बाद भी यह कार्रवाई रोक दी गई है। इससे एक बार फिर मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और मार्केट में मिलावटी सामग्री उपलब्ध कराई जाने लगी है, वहीं खाद्य विभाग के अधिकारी भी नजर नहीं आ रहे हैं।

ऐसे करें मिलावट का पता
फूड विशेषज्ञों के मुताबिक थोड़ी सी मिठाई या मावे पर टिंचर आयोडीन की पांच-छह बूंदें डालें। ऊपर से इतने ही दाने चीनी के डाल दें। फि र इसे गर्म करें। अगर मिठाई या मावे का रंग नीला हो जाए तो समझें उसमें मिलावट है। इसके अलावा मिठाई या मावे पर हाइड्रोक्लोरिक एसिड यानी नमक के तुकड़े की पांच-छह बूंदें डालें। अगर इसमें मिलावट होगी, तो मिठाई या मावे का रंग लाल या हल्का गुलाबी हो जाएगा। मावा चखने पर थोड़ा कड़वा और रवेदार महसूस हो, तो समझ लें कि इसमें वनस्पति घी की मिलावट है। मावे को उंगलियों पर मसल कर भी देख सकते हैं अगर वह दानेदार है, तो यह मिलावटी मावा हो सकता है। इतना ही नहीं रंग-बिरंगी मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले सस्ते घटिया रंगों से भी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। अमूमन मिठाइयों में कृत्रिम रंग मिलाए जाते हैं। जलेबी में कृत्रिम पीला रंग मिलाया जाता है, जो नुकसानदेह है। मिठाइयों को आकर्षक दिखाने वाले चांदी के जगह एल्यूमीनियम फ ॉइल से बने वर्क इस्तेमाल लिए जाते हैं। इसी तरह केसर की जगह भुट्टे के रंगे रेशों से मिठाइयों को सजाया जाता है।

&चिकित्सकों का कहना है कि मिलावटी मिठाइयां सेहत के लिए नुकसानदेह हैं। इनसे पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। फूड प्वाइजनिंग का खतरा भी बना रहता है। लंबे अरसे तक खाये जाने पर किडनी और लीवर पर बुरा असर पड़ सकता है। आंखों की रोशनी पर भी बुरा असर पड़ सकता है। बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास अवरुद्ध हो सकता है। घटिया सिल्वर में एल्यूमीनियम की मात्रा ज्यादा होती है, इससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों के ऊतकों और कोशिकाओं को नुकसान हो सकता है।
डॉ. अभिनव विजयवर्गीय, राजगढ़