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अभी भी खेतों में 50 फीसदी सोयाबीन, बारिश हुई तो हो जाएगी बर्बाद

Rajesh Kumar Vishwakarma

Publish: Oct 20, 2019 18:44 PM | Updated: Oct 20, 2019 18:44 PM

Rajgarh

- किसानों को डरा रहा मौसम का बदलता मिजाज
- सप्ताहभर से थमी बारिश के बाद जैसे-तैसे पटरी पर आया था खेती-किसानी का काम, अब फिर चिंता बढ़ी

ब्यावरा. दो दिन से बदले मौसम के मिजाज ने किसानों में फिर से डर पैदा कर दिया है। कुछ ही किसानों द्वारा निकाली गई सोयाबीन के अलावा 50 फीसदी से अधिक अभी भी खेतों में है।

कई जगह की कटी नहीं है तो कई जगह सूख नहीं पाने के कारण निकल नहीं पाई। ऐसी स्थिति में यदि थोड़ी बारिश भी हुई तो बची हुई सोयाबीन पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी।


दरअसल, दो दिन से बादलों की लुकाछिपी के बीच ही मौसम पूरी तरह से सुष्क हो गया है। रात और दिन के तापमान में भी काफी गिरावट आई है। ऐसे में खेतों में फसलें समटने में जुटे किसानों की परेशानी दो गुना बढ़ गई है।

कुछ काटने में जुटे हैं तो कुछ ने खेतों और खलियानों में एकत्रित कर दी लेकिन बदलते मौसम के कारण उन्हें ढंकना पड़ी। अब भी सोयाबीन के पौधों में नमी थी और धूप की कमी के कारण फिर से सोयाबीन को खतरा पनप रहा है।

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मौसम विभाग की मानें तो आगामी दिनों में और भी मौसम सुष्क रहने के आसार हैं। पूर्वी और दक्षिणी मध्यप्रदेश में बादल छाए रहेंगे, सुष्क मौसम रहेगा और कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। इससे न सिर्फ लोगों की दीवाली बिगड़ी है बल्कि पूरा खेती-किसानों का पूरा गणित बिगाड़ दिया है।

उल्लेखनीय है कि जिलेभर में अभी भी 50 फीसदी से अधिक किसान उपज निकालने से वंचित हैं, उन पर मौसम की मार पड़ सकती है। हालांकि एहतियात के तौर पर किसान उपज के साथ ही मवेशियों के लिए भूंसे को भी संभालने में जुट गए हैं।

माचलपुर क्षेत्र में बूंदाबांदी
सुष्क मौसम के बीच कंपकपा देने वाली हवाएं भी दिनभर चलती रही। इसी बीच दोपहर करी साढ़े तीन बजे जीरापुर, माचलपुर क्षेत्र में हल्की-फुल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे किसानों में भाग-दौड़ मच गई।

कोई उपज को ढंकने में जुट गया तो कोई निकाल ली गई सोयाबीन के भूंसे को ढंकने में। हालांकि बादलों का झुंड भीगा देने वाली बारिश कर गायब हो गया। इसके बाद जिले में बाकी स्थानों पर मौसम सुष्क बना रहा।


कैसी दीवाली साहब! फसलें समेटना ही पहली सफाई
कैसी दीवाली साहब! यह तो शहर के और नौकरी वालों के लिए होती है। हमारी तो दीवाली इन्हीं खेतों में मनना है। जैसे-तैसे उपज निकाल भी ली तो फिर खेतों को तैयार करना है।

यदि बारिश या बूंदाबांदी भी हो गई तो बची हुई सोयाबीन का एक दाना भी घर नहीं पहुंच पाएगा। ब्यावरा क्षेत्र के किसान संजय यादव, रामबाबू दांगी, लखन यादव सहित अन्य ने बताया कि फसलें समेटना ही हमारी दीवाली की असल सफाई है, अन्यथा बिना उपज के हम कैसे दीवाली मनाएंगे?

पत्रिका खास-खास
- 3.40लाख हैक्टेयर में है सोयाबीन।
- 3500रु. प्रति क्वींटल अधिकतम बिक रही।
- 50प्रतिशत सोयाबीन, अन्य उपज अभी भी खेतों में।
- 100प्रतिशत हो जाएगा नुकसान बारिश से।
- 07डिग्री कम हुआ दिन और रात का तापमान।


संकट के दौर में किसान
शासन-प्रशासन की मदद पहले ही नहीं मिल पाई और अब मौसम की मार से किसानों पर संकट का दौर चल रहा है। मौसम ने यदि साथ नहीं दिया तो किसान काफी नुकसान में रहेंगे। शासन-प्रशासन को पूरी मदद उनकी करना चाहिए।
- कुमैरसिंह सौंधिया, संभागीय अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, राजगढ़


शुष्क बना रहेगा मौसम
औसत समुद्र तल से 1.5 मीटर ऊपर तक फैला हुआ राजस्थान के मध्य भागों पर स्थित प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण भी कम पाया गया। इससे प्रदेश में आगामी दो-तीन दिन मौसम शुष्क रहने की संभावना है। साथ ही कहीं-कहीं बारिश भी हो सकती है।
-एसके नायक, मौसम विशेषज्ञ, मौसम विज्ञान केंद्र, भोपाल