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World Mosquito Day: इन्होंने की थी मच्छर की खोज, लगाया था डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी का पता

Bhawna Chaudhary

Publish: Aug 20, 2019 13:28 PM | Updated: Aug 20, 2019 13:28 PM

Raipur

आज वल्र्ड मॉस्किटो डे (World Mosquito Day ) है यह दिवस पेशेवर चिकित्सक सर रोनाल्ड रास (Doctor Ronald Ross) की स्मृति में मनाया जाता हैं।

मच्छर (Mosquito) दुनिया का सबसे ख़तरनाक जीव है। ये ऐसी बीमारियां (Dengue disease) फैलाता है जिसकी वजह से दुनिया भर में हर साल क़रीब दस लाख लोग मरते हैं। आप मच्छरों से कई वर्षों से जानते हैं, लेकिन क्या यह पता है कि मच्छर की खोज किसने की और कब इसके बारे में जानकारी मिली। आज वल्र्ड मॉस्किटो डे (World Mosquito Day ) है यह दिवस पेशेवर चिकित्सक सर रोनाल्ड रास (Doctor Ronald Ross) की स्मृति में मनाया जाता हैं।

World Mosquito Day

1897 में हुई खोज
मच्छर की खोज साल 1897 में हुई जिसे बिट्रिश डॉक्टर सर रोनाल्ड रॉस ने की। दुनिया का सबसे पुराना मच्छर एक फीमेल ट्रांसमिट था जिसके काटने से मलेरिया रोग का जन्म हुआ। बाद में इस पर अनेक तरह के तथ्य डॉ. रॉस ने निकाले और उस मादा मच्छर का नाम एनाफिलीज दिया गया। इसमें प्लासमोडियम पेरासाइट रहता है जो मानव के ब्लड में घुलकर रोग पैदा करता है।

दिया गया नोबल पुरस्कार
डॉ. रोनॉल्ड रॉस ने मलेरिया और उसकी खोज को प्रकट करके एक इतिहास रच दिया। इसके लिए उन्हें मलेरिया के बेहतरीन चिकित्सा के लिए 1902 में नोबल पुरस्कार से नवाजा गया। उन्होंने मलेरिया के लिए 25 साल रिसर्च की और बाद में फिर इंडिया में अपनी सेवाएं दीं।

डेंगू भी बड़ा खतरा
डेंगू एेडीज एजिप्टी मच्छर से होने वाली बीमारी है। जागरूकता से ही इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। प्रदेश में इस साल डेंगू का कहर राजधानी और भिलाई में देखा जा रहा है और अभी तक डेंगू से २० लोगों की मौत हो चुकी है। डेंगू वायरस चार अलग-अलग प्रकारों के होते हैं। यदि किसी व्यक्ति को इनमें से किसी एक प्रकार के वायरस का संक्रमण हो जाए तो आमतौर पर उसके पूरे जीवन में वह उस प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षित रहता है। बाकी तीन प्रकारों से वह कुछ समय के लिये ही सुरक्षित रहता है।

यह है डेंगू वायरस
डेंगू आमतौर पर डेन1, डेन2, डेन3 और डेन4 सरोटाइप का होता है। 1 और 3 सरोटाइप के मुकाबले 2 और 4 सेरोटाइप कम खतरनाक होता है। टाइप 4 डेंगू के लक्षणों में शॉक के साथ बुखार और प्लेट्लेट्स में कमी, जबकि टाइप 2 में प्लेट्लेट्स में तीव्र कमी, हाईमोरहैगिक बुखार, अंगों में शिथिलता और डेंगू शॉक सिंडरोम प्रमुख लक्षण हैं। डेंगू की हर किस्म में हीमोरहैगिक बुखार होने का खतरा रहता है, लेकिन टाइप 4 में टाइप 2 के मुकाबले इसकी संभावना कम होती है। डेंगू 2 के वायरस में गंभीर डेंगू होने का खतरा रहता है।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विमल किशोर राय ने कहा कि एडीज एजिप्टी मच्छर ज्यादातर दिन में काटते हैं। ऐसे में पानी के कंटेनर खाली कर दें और जिन जगहों पर पानी के जमा होने की उम्मीद हैं वहां कीटनाशकों का उपयोग करें। रोजाना मच्छरदानी लगाकर सोएं और पूरे कपड़े पहनकर रहें। मच्छर ना काटें इसके लिए क्रीम लगाकर रखें।