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पर्यावरण को बचाने हर एक को आना होगा आगे

Ashutosh Kumar

Publish: Sep 20, 2019 20:30 PM | Updated: Sep 20, 2019 20:30 PM

Raipur

रायपुर. एक तरफ शासन और विभिन्न संगठनों द्वारा दुनियाभर में पेड़ों को बचाने के लिए मुहिम चलाई जा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ पेड़ों पर लगे बोर्ड और कीलों के माध्यम से लगे बैनर, पोस्टर पेड़ों के विकास में बाधा बन रहे है।

रायपुर. एक तरफ शासन और विभिन्न संगठनों द्वारा दुनियाभर में पेड़ों को बचाने के लिए मुहिम चलाई जा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ पेड़ों पर लगे बोर्ड और कीलों के माध्यम से लगे बैनर, पोस्टर पेड़ों के विकास में बाधा बन रहे है। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए कई संस्थाएं ऐसा काम कर रही हैं। उनके द्वारा पर्यावरण संरक्षण का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है बल्कि उन्हें इस बात की जानकारी भी नहीं है ऐसा करने से वृक्षों को क्या नुकसान पहुंचेगा। प्रदेश में भी ऐसी स्थिति देखी जा सकती है। हमें भी ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन की तर्ज पर वृक्षों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरुरत है। अभी कुछ दिन पहले ही ऐसा ही कुछ नजारा चेन्नई में देखने को मिला था। जहां ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन ने सड़क किनारे लगे पेड़ों पर विज्ञापन, तार या लाइट्स लगाकर उन्हें नुकसान पहुंचाने पर लोगों के साथ-साथ निजी संस्थाओं पर 25000 रुपए का जुर्माना साथ ही तीन साल जेल की सजा का प्रावधान किया है। वनस्पति शास्त्र के विशेषज्ञों का मानना है कि पेड़ों में कील आदि ठोंकने से कई बार पेड़ों के छाल निकल जाती है जिससे वृक्षों का विकास रुक जाता है। सभी प्रमुख मार्गों पर स्थित सड़क किनारे के पेड़ों पर विभिन्न प्रतिष्ठानों के प्रचार बोर्ड, बैनर, पोस्टर, होर्डिंग्स लगे देखे जा सकते हैं। जिससे न सिर्फ पेड़ों की सेहत बिगड़ रही है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा पैदा हो रहा है।

रुक जाता है पेड़ों का विकास
विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य रूप से कील ठोंकने से पेड़ों को कोई खास नुकसान नहीं होता। लेकिन कील ठोंकने के दौरान अगर पेड़ों की छाल निकल जाए, तो उससे जड़ों से तनों व पत्तियों में जाने वाला पानी ऊपर नहीं जा पाता। वहीं पेड़ों के लिए भोजन प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से पत्तियों में बनता है। उन्होंने बताया कि छाल निकल जाने से पेड़ों के जायलम और फ्लोयम नष्ट हो जाते हैं। जिससे पेड़ों का विकास रुक जाता है। साथ ही पेड़ सूख भी सकते हैं।

ट्री प्रोटेक्शन एक्ट : पेड़ों पर कील ठोंकना है अपराध
पेड़ों पर कील आदि ठोंकना ट्री प्रोटेक्शन एक्ट के तहत अपराध है। कील ठोकने वाले के विरुद्ध पांच हजार तक का जुर्माना हो सकता है। इतना ही नहीं, गलती दोहराए जाने पर 15 दिनों की सजा का भी प्रावधान है। आए दिन सूखा, बाढ़, बेतहाशा बढ़ रही गर्मी आदि की समस्या उत्पन्न हो रही है। इसका जिम्मेदार प्रदूषण है। इसे रोकना व पर्यावरण का संरक्षण करना मानव जीवन के लिए अहम है। पर्यावरण के लिए हरियाली लाना और अधिक से अघिक वृक्षों का होना आवश्यक है तथा पेड़ पौधे से जीवन के लिए महत्वपूर्ण ऑक्सीजन हमें मिल पाती है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रति वर्ष पांच अरब पौधे लगाए जा रहे हैं और वहीं 10 अरब पौधों को काटा जा रहा है। इस असंतुलित स्थिति से बचाव के लिए पौधारोपण करके उनका संरक्षण करना आवश्यक है।

पेड़-पौधों को गोद लेकर कर सकते है उनकी सुरक्षा
पेड़-पौधों को बचाने और अगर कोई पेड़ गोद लेना चाहे तो उसे वन विभाग को अर्जऱ्ी देनी पड़ेगी। एक बार अर्ज़ी मंज़ूर हो जाए तो उस पेड़ के साथ अर्जऱ्ी देने वाले का मिथ (भाई-भाई) या मिथिनी (भाई-बहन) का कानूनी रिश्ता बन जाएगा। इस नियम के मुताबिक, किसी के द्वारा गोद लिए गए पेड़ को काटना, जलाना या नष्ट करना अपराध माना जाएगा और इसके लिए वन अधिनियम के तहत सज़ा भी हो सकती है।