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दूसरे राज्यों को बेची सस्ते में दवाएं, छत्तीसगढ को 200 फीसदी अधिक में

jitendra dahiya

Publish: Oct 23, 2019 00:39 AM | Updated: Oct 23, 2019 00:57 AM

Raipur

- दवा खरीदी में 100 से 200 दिन देर से खरीदी, फिर भी दूसरे मॉडल दवा निगमों से नहीं कर रेट मिलान

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन में दवा खरीदी को लेकर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कुछ दवा कंपनियां अन्य राज्यों को दवाएं सस्ते दामों पर बेच रही है। वही दवाएं सीजीएमएससी को दोगुने दर पर बेचने के लिए टेंडर भरा गया है। उन दरों को सीजीएमएससी ने स्वीकार भी कर लिया है।

 

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन में दवा खरीदी को लेकर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कुछ दवा कंपनियां अन्य राज्यों को दवाएं सस्ते दामों पर बेच रही है। वही दवाएं सीजीएमएससी को दोगुने दर पर बेचने के लिए टेंडर भरा गया है। उन दरों को सीजीएमएससी ने स्वीकार भी कर लिया है।

पत्रिका ने सीजीएमएससी द्वारा खरीदी जा रही दवाओं दरों की तुलना में अन्य राज्यों के दवा निगमों की दरों से मिलान किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। देश भर में मॉडल माने जाने वाले कार्पोरेशन राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और मध्यप्रदेश की दरों से तुलना की गई, जिससे पता चला की हर निविदा में आधी चयनित दवाओं की दर अन्य राज्यों की तुलना में 35 से 45 प्रतिशत अधिक है।

पत्रिका ने तीन निविदाओं 46/एम/सीजीएमएससी, 45/एम/सीजीएमएससी, 41/एम/सीजीएमएससी के ऑनलाइन उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की। जिसमें अधिक दर में हो रही खरीदी का खुलासा हुआ है। बीते कुछ माह में सीजीएमएससी में कई बदलाव व प्रयास किए गए हैं। इसके बावजूद दवाओं की खरीदी समय पर नहीं हो पा रही है।

क्रय समिति की लापरवाही

खरीदी प्रक्रिया का पत्रिका ने कॉर्पोरेशन की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर अध्ययन किया। अध्ययन करने पर पता चला कि प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों को क्रय समिति में शामिल किया गया है। विभाग की निर्माण शाखा के इंजीनियर को क्रय समिति में शामिल किया गया है। जबकि क्रय समिति में तकनीकी जानकार का होना अनिवार्य है।

निविदा फाइनल करने में 200 से ज्यादा का दिन,

फिर भी गड़बड़ी निविदाओं की जांच में यह बात सामने आयी की निविदा के जारी होने के बाद निविदा जमा करने की अंतिम तिथि कई बार बढ़ायी जाती है। निविदा तीन लिफाफा पद्धति के आधार पर बुलाई जाती है। लिफाफा अ, ब और प्राइस बिड के सारे दस्तावेजों की जांच क्रय समिति द्वारा किया जाता है। इसमें 110 से 200 दिनों तक समय लगता है। यानि निविदा जारी होने के बाद तीन से छह माह तो निविदा को फाइनल करने में ही गवां दिए जाते हैं।

बार-बार तोड़ रहे हैं नियमों को

सीजीएमएससी की निविदाओं में कुछ गिनी चुनी कंपनिया ही निविदा में भाग लेती हैं। अधिकांश दवाओं की खरीदी एकल निविदा प्राप्त होने पर भी कर दी जाती है। जो भंडार क्रय नियमों और केंद्रीय सतर्कता आयोग के निर्देशों का उल्लंघन है।

हो सकती है ब्लैक लिस्टेड

जानकार सूत्रों से चर्चा पर ऐसी स्थिति में ब्लैकलिस्ट किए जाने के नियमों की जानकारी भी मिली है। कुछ दवाओं में एल-1 निविदा और एल-2 की दर में 1000 प्रतिशत से भी अधिक का अंतर मिला है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज द्वारा मान्य की गयी कुछ दवाओं की दर अन्य राज्यों की दरों के दोगुने से भी अधिक है। एक दवा के मामले में दो निविदाकारों की दर एक जैसी है। जानकार सूत्र इसे निविदाकारों की आपसी सांठगांठ बता रहें हैं।

निविदा क्रमांक - जारी दिनांक - खुलने का दिनांक- कुल दिन- कुल आइटम (निविदा बुलाई)- फाइनल हुए- ये आइटम अधिक दर पर खरीदी

46/एम/सीजीएमएससी - 06/06/2019 - 24/09/2016- 108 दिन- 115 - 54 - 2945/एम/सीजीएमएससी 29/05/2019 - 24/09/2019 - 115 दिन - 98 - 28 - 1341/एम/सीजीएमएससी 28/02/2019 - 24/09/2016 - 206 दिन - 67 - 24 - 13

नोट:- राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और मध्यप्रदेश में सप्लाई की गई दवाओं की दर से तुलना।

क्रय समिति के निर्णय पर ही फैसला लिया जाता है। अन्य राज्यों की दरों से तुलना की जाती है। एकल निविदा में मान्य की गयी दवाओं की ये तीसरी निविदा थी। फिर भी मामले की जांच करवाई जाएगी।

भुवनेश यादव, एमडी, सीजीएमएससी